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Tuesday, April 26, 2011

पाक में आतंकियों ने बस फूंकी, 15 ज़िंदा जले


क्‍वेटा : पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में सिबी के निकट अज्ञात हमलावरों ने मंगलवार सुबह सवारियों से भरी बस में आग लगा दी। इस घटना में महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 15 लोगों की जलकर मौत हो गई। ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्‍तान में उठी बंटवारे की मांग के बीच आतंकियों ने यह कदम उठाया है।

इससे पहले पंजाब प्रांत के मुख्‍यमंत्री शाहबाज शरीफ ने मांग की थी कि सिंध प्रांत का बंटवारा कर कराची को अलग प्रांत बनाया जाए। हालांकि सोमवार को वह अपने बयान से मुकर गए। उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। सोमवार को पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के दफ्तर पर हुए हमले को भी शरीफ के बयान से ही जोड़ कर देखा जा रहा है। मंगलवार की घटना का संबंध भी इसी बात से जोड़ा जा रहा है। हालांकि इस बारे में अभी कोई पुख्‍ता संकेत नहीं हैं। शरीफ ने अपने दफ्तर में मीडिया के सामने सफाई दी कि वह तो बस यह पूछ रहे थे कि क्‍या कराची को अलग प्रांत बनाया जा सकता है, उन्‍होंने ऐसी कोई मांग नहीं की थी या सुझाव नहीं दिया था।

पुलिस के मुताबिक मरने वाले में सात बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा, मरने वाले लोगों में से तीन अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय के हैं। इनकी पहचान कपिल, वरशीन और पूजामल के तौर पर की गई है।

स्‍थानीय अखबार "द डॉन" ने सिबी के पुलिस उपायुक्त नसीर अहमद नासिर के हवाले से खबर दी है कि क्वेटा से करीब 160 किलोमीटर दूर यह हादसा सिबी शहर में उस वक्त हुआ जब एक बस सिंध प्रांत के जाकोबाबाद से क्वेटा की ओर जा रही थी। रास्ते में यह बस सड़क के किनारे एक रेस्तरां के सामने रूकी हुई थी।

Monday, April 25, 2011

कंधार जेल से 500 आतंकी फ़रार


अफ़ग़ानिस्तान के शहर कंधार की एक जेल से 470 से अधिक तालिबान आतंकियों के भाग निकलने की ख़बर हैं। चरमपंथी विद्रोहियों ने बाहर से जेल तक एक सुरंग खोदी और अपने साथियों को छुड़ाकर निकल भागे। वहीं तालिबान ने कहा है कि उनके सौ से ज़्यादा कमांडर मुक्त करवा लिए गए हैं। जेल के अधिकारियों ने भी स्वीकार किया है कि जो क़ैदी भाग निकले हैं उनमें से कई तालिबान चरमपंथी थे.

जेल के महानिदेशक ग़ुलाम दस्तगीर मयार के मुताबिक जेल के बाहर दक्षिणी हिस्से से जेल तक कई सौ मीटर लंबी एक सुरंग बनाई गई और रविवार की रात इससे 476 राजनीतिक क़ैदी भाग निकले। कंधार प्रांत के गवर्नर के कार्यालय ने कहा है कि जो लोग भागे थे उनमें से कुछ लोगों को पकड़ लिया गया है हालांकि इनका विवरण नहीं दिया गया है।

तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा है कि उन्होंने 320 लंबी (1050 फुट) लंबी सुरंग खोदी और इसमें उन्हें पाँच महीनों का समय लगा। जो जेल से निकले हैं उनमें से क़रीब सौ तालिबान कमांडर हैं और शेष विद्रोह में साथ दे रहे लड़ाके हैं। तालिबान प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने कहा, "जो जेल से निकले हैं उनमें से क़रीब सौ तालिबान कमांडर हैं और शेष विद्रोह में साथ दे रहे लड़ाके हैं।"

जेल से निकल भागे एक तालिबान लड़ाके का कहना है कि उसे 360 मीटर लंबी सुरंग से निकलने के लिए कोई आधे घंटे घुटनों के बल रेंगना पड़ा। पिछले तीन साल में जेल तोड़कर तालिबान के निकल भागने की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले जून, 2008 में एक आत्मघाती हमलावर ने कंधार जेल के दरवाज़े पर ख़ुद को उडा़ लिया था जिसके बाद 900 क़ैदी भाग निकलने में सफल हो गए थे।

गर्भवती हैं कार्ला ब्रूनी


पेरिस : फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की पत्नी कार्ला ब्रूनी गर्भवती हैं। इस खबर का न तो राष्ट्रपति निवास एलिसी पैलेस और न ही वरिष्ठ मंत्रियों ने खंडन किया है। डेली मेल आनलाईन ने इस आशय की ख़बर प्रकाशित की है।

डेली मेल के मुताबिक, 43 वर्षीय ब्रूनी का सार्कोजी से यह पहला बच्चा होगा। कार्ला का अपने पूर्व प्रेमी फिलॉस्फर राफेल एंथोवन से एक बेटा है, जो 2001 में पैदा हुआ था। उसका नाम ऑरलीन है। सरकोजी के पहली पत्नी मैरी डॉमनीक से दो बेटे पियरे (26) और जीन (25) हैं। दूसरी पत्नी सेसिलिया से उनका तीसरा बेटा भी है, जिसका नाम लुइस (14) है। सूत्रों का कहना है कि ब्रूनी को प्रेग्नेंट हुए कुछ ही हफ्ते हुए हैं, इस लिहाज से अगले स्प्रिंग में प्रेजिडेंशल कैंपेन के वक्त सरकोजी पिता बनेंगे। इन चुनावों को लेकर सरकोजी को उम्मीद है कि वह दूसरी बार भी राष्ट्रपति चुने जाएंगे।

56 साल के सार्कोजी से फटाफट प्यार के बाद ब्रूनी ने 2008 में शादी कर ली थी। गर्भवती होने की खबरें सबसे पहले फ्रेंच मैगजीन क्लोजर में आईं। मैगजीन ने सूत्रों के हवाले से इस खबर के पक्की होने का दावा किया। इस मैगजीन ने कुछ समय पहले भी इस तरह का दावा किया था, जो गलत साबित हुआ। ब्रूनी के मां बनने की अटकलें सबसे पहले फ्रांसीसी पत्रिका 'कलोजर' के ताजा अंक में भी प्रकाशित हुई थी।

Sunday, April 24, 2011

शाही शादी में ओबामा-सरकोजी को बुलावा नहीं


लंदन : ब्रिटिश राजघराने के प्रिंस विलियम और केट मिडलटन की 29 अप्रेल को होने जा रही शाही शादी के मेहमानों की लिस्ट में अमेरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी का नाम नहीं है। इस शाही शादी में दुनियाभर से 1900 लोगों को आमंत्रित किया गया है।

ब्रिटेन के शाही परिवार की ओर शुक्रवार को शादी में बुलाए जाने वाले मेहमानों की पूरी सूची और अन्य व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। शादी में शरीक हो रहे 1,900 मेहमानों में से कुछ के नाम पहले ही मीडिया में आ चुके हैं। इनमें सॉकर खिलाड़ी डेविड बैकहम, उनकी पत्नी विक्टोरिया, संगीतकार एल्टन जॉन, निर्देशक गाय रिची शामिल हैं। इसके अलावा गायक जॉस स्टोन, मिस्टर बीन के अभिनेता रोऑन एटकिंसन जो कि प्रिंस चाल्र्स के गरीबी मित्रों को भी मेहमानों की लिस्ट में शामिल किया गया है।

सेंट जेम्स के महल से पहली बार इस बात की पुष्टि की गई है कि बाहरेन के राजकुमार सलमान बिन अहमद अल खलीफा भी इस शादी में शिरकत करेंगे।

डेनमार्क, नॉर्वे, स्पेन, थाईलैंड और मोरोको से करीब 40 अन्य विदेशी शाही परिवार के लोग इस शादी में शामिल होंगे। अन्य मेहमानों में ब्रिटिश सरकार और सुरक्षा अधिकारी, ब्रिटिश सेना के जवान जिन्होंनें अफगानिस्तान में हुए युद्ध में भाग लिया और प्रिंस विलियम के चेरिटी के लिए काम करने वाले लोग शामिल हैं।

महल के अधिकारियों ने बताया कि इस शाही शादी में राज्यों के शाही लोगों को ही बुलाया गया है। ऐसे देश जो ब्रिटिश कॉमन वैल्थ में शामिल नहीं हैं उनके राजनयिकों को बुलावा नहीं दिया गया है। इसीलिये अमेरिका और फ़्रांस राष्ट्रपति बराक ओबामा या फ्रासं के राष्ट्रपति सरकोजी को शादी में नहीं बुलाया गया है।

Thursday, April 14, 2011

चीन की मेज़बानी में ब्रिक्स सम्मेलन शुरू


सान्या : चीन के सान्या शहर में गुरुवार को ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका यानी ब्रिक्स देशों के तीसरे शिखर सम्मेलन की विधिवत शुरूआत हो गई। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं ने एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया।
कूटनीतिक सूत्रों ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया कि घोषणा पत्र में कहा गया है कि वैश्रि्वक अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय मसलों और विकास से जुडे़ पक्षों पर ब्रिक्स देशों में सहमति बनी।
इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ ने की और इसमें ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ, रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव, भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने हिस्सा लिया।
दुनिया के पांच उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के संगठन यानी ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय तंत्र में सुधार का आह्वान किया है।
सम्मेलन में हू ने कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए हमें न्यायोचित, समेकित और बेहतर प्रबंधन युक्त अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय तंत्र स्थापित करना चाहिए। इसके लिए इन तंत्रों में उभरते बाजारों ओर विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत है।
हू ने कहा कि हमें एक सामान और न्यायोचित अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार तंत्र को बढ़ाते हुए सभी तरह के संरक्षणवाद का विरोध करना चाहिए। हमें बहुपक्षीय व्यापार को मजबूती प्रदान करते हुए दोहा दौर की वार्ता के लक्ष्यों को जल्द से जल्द हासिल करना चाहिए।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक हू ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संकट ने वैश्विक आर्थिक असंतुलन को लेकर एक बार फिर से सोचने पर मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि अंत में कहा जा सकता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा असंतुलन उत्तर और दक्षिण के बीच विकास का असंतुलन है। दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी समस्या विकासशील देशों का अपर्याप्त विकास है।
उन्होंने नेताओं से विकासशील देशों के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार और उसका विकास होगा।

Tuesday, April 12, 2011

भूकंप से फ़िर थर्राया जापान


टोक्यो : ठीक एक महीने बाद जापान में सोमवार को दोबारा भूकंप के झटके मह्सूस किये गये । उत्तर पूर्व में आए इस भूकंप की तीव्रता 7.1 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र राजधानी टोक्यो से 164 किलोमीटर दूर विकिरण प्रभावित फुकुशिमा प्रांत था। झटके के कारण टोक्यो शहर लगभग एक मिनट तक हिलता रहा।

11 मार्च को भूकंप और सुनामी से आई भीषण तबाही के बाद एक बार फ़िर एक महीने के बाद भूकंप के झटकों से जापान दहल उठा। भूकंप के बाद जापान के मौसम विभाग ने मियागी, फुकुशिमा, चीबा और इब्राकी में दो मीटर ऊंची सुनामी आने की चेतावनी जारी की। बृहस्पतिवार को ऐसे ही एक भूकंप में चार लोगों की जान गई थी।

सोमवार को आए भूकंप में पावर सप्लाई में बाधा पड़ने से लाखों घरों की बिजली जाने के साथ फुकुशिमा स्थित परमाणु संयंत्र के रिएक्टर नंबर एक, दो और तीन की कूलिंग प्रणाली भी प्रभावित हुई, जिससे विकिरण का खतरा फिर से बढ़ गया।

खतरे के कारण जापानी सरकार ने संयंत्र के आस पास का वह दायरा बढ़ा दिया है, जहां से लोगों को हटना होगा। संयंत्र का संचालन करने वाली टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी [टेपको] ने भी अपने कर्मचारियों को फिलहाल रिएक्टरों से हटा लिया है।

जापान के मुख्य केंद्रीय सचिव युकियो इदानो ने कहा कि बृहस्पतिवार और सोमवार को आए भूकंप के कारण नए निर्देश जारी किए गए हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों को संयंत्र से 20 से 30 किलोमीटर की दूरी पर रहने को कहा गया है।

भूकंप के ताज़ा झटकों ने एक बार फ़िर फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र के लिये ख़तरा पैदा कर दिया है, जिससे विकिरण के और बढ़ने की आशंका है।

Sunday, April 10, 2011

फ़्रांस में बुर्के पर बैन का विरोध, कई गिरफ़्तार


पेरिस : फ्रांस की राजधानी पेरिस में बुर्के पर प्रतिबंध के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। शनिवार को मुस्लिम परिधान बुर्के पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे 59 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से 20 लोग प्लेस दे ला नेशन में पूरा बुर्का पहन कर प्रदर्शन करने पंहुच गए थे, इस प्रदर्शन को मंजूरी नहीं दी गई थी।

गिरफ्तार व्यक्तियों में एक ब्रिटेन एवं एक बेल्जियम से आना वाला व्यक्ति भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि इस सोमवार से फ्रांस में बुर्के को प्रतिबंधित करने वाला कानून प्रभावी हो जाएगा। इसके तहत देश के सभी सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का पहनना वर्जित है और इस कानून की अवमानना किए जाने पर 150 यूरो का दंड भी मुकर्रर किया गया है। फ़्रांस में ज़्यादातर रोमन कैथोलिक हैं। देश के 50 लाख नागरिक इस्लाम धर्म में आस्था रखते हैं।

Wednesday, March 23, 2011

गद्दाफ़ी ने भरी हुंकार, कहा ’जीत हमारी ही होगी’


त्रिपोली : गठबंधन सेनाओं के हवाई हमलों से जूझ रहे लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी ने देश में हमले शुरू होने के बाद से पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर संघर्ष में जीत का दावा किया। साथ ही उन्होंने कहा कि वह अपने देश में शहीद के रूप में मरना पसंद करेंगे। लीबियाई टेलिविजन ने गद्दाफी के इस भाषण का सीधा प्रसारण किया। पिछले एक सप्ताह में गद्दाफी का यह पहला सार्वजनिक संबोधन था। टेलिविजन चैनल ने गद्दाफी को बालकनी से अपने समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते दिखाया।

लीबिया में गठबंधन सेना की कार्रवाई शुरू होने के बाद तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी पहली बार सरकारी टेलीविजन पर नजर आए। गद्दाफी ने एक बार फिर हुंकार भरते हुए कहा कि आखिरकार जीत उनकी ही होगी। गद्दाफी ने राजधानी त्रिपोली के पास अपनी छावनी में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ये बाते कहीं।

उन्होंने गठबंधन सेना की ओर से लीबियाई सेना पर पश्चिमी देशों की सेनाओं की ओर से किए जाने वाले हमलों को अन्यायपूर्ण करार देते हुए उसकी निंदा की और कहा, ' कम समय तक चलने वाले संघर्ष में हम उन्हें पराजित कर देंगे और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में भी हम उन्हें पराजित कर देंगे। '

गद्दाफी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिमी सेना से हो रही लड़ाई में जीत हमारी ही होगी। उन्होंने कहा कि वह हवाई हमले से नहीं डरते। हम सरेंडर नहीं करेंगे। इस ऐतिहासिक लड़ाई में हम ही जीतेंगे। उन्होंने सभी इस्लामी देशों से इस जंग में हिस्सा लेने की बात कही। उन्होंने पश्चिमी देशों की कड़ी आलोचना भी की।

उल्लेखनीय है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि गद्दाफी को हटाए जाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि हवाई हमले आम नागरिकों को सुरक्षा के लिए किए जा रहे हैं।

Tuesday, March 22, 2011

लीबिया पर हमले जारी, गद्दाफी को ओबामा की चेतावनी


त्रिपोली/वाशिगटन : लीबिया पर पश्चिमी देशों के हमले बदस्तूर चौथे दिन भी जारी हैं। सरकार के मुताबिक़, सोमवार रात हुए हमलों में कई और लोगों की जान जा चुकी है। लीबिया पर नो फ्लाई जोन लागू कर रही गठबंधन की सेनाओं ने त्रिपोली पर मिसाइल और हवाई जहाजों से हमले किए हैं। त्रिपोली में कर्नल गद्दाफी के ठिकानों से धमाकों और विमानभेदी गोलीबारी की आवाजें सुनी गई हैं।

उधर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जोर देकर कहा है कि यह अमेरिका की नीति है कि लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी सत्ता से हट जाएं और इस लक्ष्य की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उनके प्रशासन के पास कई साधन हैं।

ओबामा ने चिली में राष्ट्रपति सबास्टियन पिनेरा के साथ के सेंटियागो में आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह अमेरिका की नीति है कि गद्दाफी को पद से हटने की जरुरत है। हमारे पास सैन्य प्रयासों के साथ ऐसे कई साधन है, जिसकी मदद से हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि इस लक्ष्य की पूर्ति हो। उन्होंने कहा कि हम लीबिया के खिलाफ बहुत जल्द एकतरफा प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू करने वाले हैं, जिसके बाद हम उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय पाबंदी लगाए जाने में मदद करेंगे।

ओबामा ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी हासिल है जिसका मुख्य उद्देश्य लीबियाई नागरिकों को कर्नल गद्दाफी की ओर से उत्पन्न खतरे से रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि गद्दाफी न केवल नागरिकों की हत्या कर रहे थे बल्कि उन्होंने स्पष्ट रूप से धमकी दी थी कि वह बेंघाजी में रहने वाले लोगों के प्रति कोई दया नहीं दिखाएंगे।

मीडिया समाचारों के मुताबिक सोमवार रात त्रिपोली का आसमान विमानभेदी गोलीबारी से जगमगाता रहा और धमाकों की आवाज गूंजती रही। कर्नल गद्दाफी के बाब अल अजीजिया अहाते के नजदीक भी एक धमाके की आवाज सुनी गई। सरकार की युद्धविराम की घोषणा के बावजूद गद्दाफी समर्थक सेना और विद्रोहियों के बीच भी जंग जारी है। लीबिया के पूर्व में गद्दाफी की सेना ने विद्रोहियों को एक बार फिर अजदाबिया शहर से बाहर धकेल दिया है। लीबिया के सरकारी टीवी पर कई नए हमलों की जानकारी दी गई है।

लीबिया के एक सरकारी प्रवक्ता इब्राहीम मूसा ने कहा कि सिर्ते हवाई अड्डे पर हुए एक हवाई हमले में कई लोग मारे गए हैं, लेकिन इस खबर की पुष्टि नहीं हो पाई। त्रिपोली से 200 किलोमीटर पूर्व में स्थित मिसराता शहर में भीषणा ल़डाई जारी है। वहां मौजूद विद्रोहियों का कहना है कि पिछले चार दिनों से गद्दाफी समर्थक सेना उन पर हवाई हमले कर रही है।

अब्दुल्ला सालेह शासन के ख़ात्मे के आसार बढ़े


दुबई : मिस्र और लीबिया के बाद यमन में शुरु हुई सरकार विरोधी गतिविधियों ने रफ़्तार पकड़ ली है और इनमें एक नई जान आ गई है। यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह का 32 साल का शासन खत्म होता दिख रहा है। सालेह की सेना के तीन जनरल और उनके कई राजदूतों ने सोमवार को पाला बदलकर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों से हाथ मिला लिया है। सैन्य अधिकारियों के इस क़दम ने राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला को तगड़ा झटका दिया है और विपक्षी खेमे को मज़बूती प्रदान की है।

इस घटना के बाद राष्ट्रपति अब्दुल्ला सालेह का 32 साल का शासन लड़खड़ाने लगा है। यमन की सेना के ये तीनों अधिकारी सालेह की इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी खेमे में शामिल हो गए। सालेह ने रविवार को सरकार को बर्खास्त कर दिया। सरकारी समाचार एजेंसी साबा की रिपोर्ट के मुताबिक, सालेह ने मंत्रियों से अगले आदेश तक कार्यवाहक की तरह काम करते रहने को कहा है।

अल जजीरा चैनल के मुताबिक़, यमन के दक्षिणी प्रांत अदन के गवर्नर अहमद कताबी भी प्रदर्शनकारियों के साथ हो गए हैं। सड़कों पर टैंकों और बख्तरबंद गाडि़यों की तैनाती के मद्देनजर प्रदर्शनकारियों के साथ संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। इन तीन अधिकारियों में सबसे सीनियर मेजर जनरल अली मोहसिन अल अहमर हैं। वह लंबे समय तक सालेह के विश्वस्त रहे हैं और सेना की फर्स्ट आर्म्ड डिविजन के कमांडर रह चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, सेना के 90 फीसदी लोग प्रदर्शनकारियों का साथ दे रहे हैं।

यमन के दो अन्य अधिकारियों के नाम मोहम्मद अली मोहसिन और हमदी अल कुसैबी है। यह दोनों ब्रिगेडियर रैंक के हैं। इन सैन्य अधिकारियों के विपक्षी खेमे में शामिल होने की खबर उस घटना के बाद आई है, जिसमें शुक्रवार को 52 लोगों के मारे जाने के बाद लोग समूचे देश में उमड़ पड़े थे। तब सालेह के सुरक्षा बलों ने सना में प्रदर्शनकारियों पर छत से गोलीबारी की थी। यमन के तानाशाह के लिए यह बड़ा झटका है क्योंकि वह सत्ता बचाए रखने के लिए सेना के जिन जनरलों पर भरोसा कर रहे थे, उन्हीं लोगों ने उनसे गद्दी छोड़ने को कहा है। इतना ही नहीं, इन जनरलों ने प्रदर्शनकारियों को बचाने के लिए टैंक और बख्तरबंद वाहन तैनात कर दिए हैं।

Sunday, March 20, 2011

लंबे युद्ध के लिए तैयार है लीबिया : गद्दाफी


काहिरा/त्रिपोली : लीबिया के तानाशाह शासक मुअम्मार गद्दाफी ने अंतरराष्ट्रीय सेनाओं द्वारा लीबिया पर किये गए हमलों के ख़िलाफ़ बोलते हुए कहा कि वह एक लंबे युद्ध के लिए तैयार है। उन्होंने संकल्प जताया कि वह इस युद्ध में पश्चिमी देशों को मात देंगे।

ग़ौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय सेनाएं लीबिया को उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किए जाने के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू कराने के लिए लीबिया पर हवाई हमले कर रही है। इन हमलों में अब तक 48 लीबियाई नागरिकों की जान जा चुकी है।

सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक ध्वनि संदेश में गद्दाफी ने कहा कि हम एक लंबे और गौरवपूर्ण युद्ध की तैयारी कर रहे है। उन्होंने कहा कि हम उन्हें हराएंगे। हम अपनी जमीन पर लड़ रहे है और अपने सम्मान के लिए लड़ रहे है। उन्होंने पश्चिमी देशों को राक्षस और अपराधी बताया। उन्होंने कहा कि आप वैसे ही हारेगे जैसे हिटलर हारा था। सभी आतातायी खत्म हुए है।

प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी, 52 की मौत


यमन की राजधानी सनाह में शनिवार को दोपहर की नमाज के बाद राष्ट्रपति से इस्तीफ़े की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों की गोलियों का निशाना बनना पड़ा। राष्ट्रपति अब्दुल्लाह अली के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लियेस एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों और सरकार समर्थक लोगों द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी की गई। इस कार्रवाई में कम से कम 52 लोगों की मौत हो गई और 300 से अधिक जख्मी हो गए। इस घटना के बाद सरकार ने देश में आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी।

इस घटना पर अपनी सफ़ाई पेश करते हुए राष्ट्रपति अब्दुल्लाह अली सालेह ने इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मौके पर पुलिस मौजूद नहीं थी और न ही उसने गोली चलाई। यह गोलीबारी नागरिकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई।

सरकारी सूत्रों के अनुसार मरने वालों की संख्या केवल 25 ही है जबकि सनाह विश्वविद्यालय के निकट प्रदर्शनकारियों के शिविर के पास बने अस्थाई अस्पताल के डाक्टर ने गोलीबारी में मरने वालों की संख्या 52 बताई। उसने यह भी बताया कि मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है और घायलों में कई की हालत गंभीर है।

यह गोलीबारी उस समय शुरू हुई जब प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगो के समर्थन में जुलूस निकालने का प्रयास किया। यह लोग सैकडों की संख्या में थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटनास्थल पर जले हुए टायरों का धुंआ भरा हुया है और जहां तहां खून बिखरा हुआ है।

ग़ौरतलब है कि आंदोलनकारी राष्ट्रपति अब्दुल्लाह अली सालेह के त्यागपत्र और देश में लोकतंत्र की स्थापना और संवैधानिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। सालेह का कार्यकाल 2013 में खत्म हो रहा है और उन्होनें कहा है कि इसके बाद अपना पद छोड़ देंगे। लेकिन प्रदर्शनकारी इससे संतुष्ट नहीं है और वे उनकी तुरंत विदाई चाहते हैं। वह पिछले 32 साल से सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर हैं।

Wednesday, March 16, 2011

किसी भी समय बंद हो सकता है आपका इंटरनेट


नई दिल्ली : दुनिया भर में इंटरनेट का इस्तेमाल दिनों दिन काफ़ी तेज़ रफ़्तार से बढ़ रहा है। दुनिया भर में अधिकतर लोग अपने भिन्न-भिन्न कार्यों को अंजाम देने के लिये इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगे हैं। या फिर यूं भी कहा जा सकता है कि विश्व भर में हज़ारों लोग पूर्ण रूप से इंटरनेट पर ही निर्भर हैं।

इसी प्रकार हमारे भारत में इस समय सात करोड़ इंटरनेट कनेक्शन हैं और इसकी रफ्तार 25 प्रतिशत की दर से बढ़ती जा रही है लेकिन इंटरनेट को लेकर एक बात ऐसी भी है जिसकी जानकारी बहुत कम लोगों को हैं। वह ये है कि किसी का भी इंटरनेट कनेक्शन केंद्रीय सरकार द्वारा कभी भी बंद किया जा सकता है।

भारत सरकार ने 2008 के आईटी ऐक्ट में एक संशोधन करके यह अधिकार अपने हाथ में ले लिया है कि वह या उसकी कोई भी सुरक्षा एजेंसी किसी भी व्यक्ति यचा संस्थान का इंटरनेट कनेक्शन कभी भी बंद कर सकती है। इंटरनेट कनेक्शन देश की सुरक्षा के नाम पर काटा जा सकता है और इसकी अवहेलना करने वाले को सात साल की सजा भी हो सकती है।

इंटरनेट कनेक्शन काटने को ’किल स्विट’ कहते हैं। इसके समर्थकों का कहना है कि इससे अफवाहें फैलने से रोका जा सकता है साथ ही झूठी सूचना देने पर भी रोक लगाई जा सकती है। दुनिया में ऐसे देशों की संखया कम ही है जहां यह व्यवस्था मौजूद है लेकिन बहुत से लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि देश की सुरक्षा के नाम पर ऐसे अधिकार लेना उचित नहीं है।

Tuesday, March 15, 2011

लीबिया: गद्दाफी ने भारत से मांगा समर्थन


नई दिल्‍ली : दुनिया भर से विरोध की मार झेल रहे लीबिया के तानाशाह शासक मुअम्मर गद्दाफ़ी ने अब भारत से मदद की गुहार लगाई है। अपनी इस मांग को मनवाने के लिये गद्दाफ़ी ने अपनी तेल कंपनियों में भारत को साझीदारी देने की पेशकश की है और बदले में भारत से राजनीतिक समर्थन मांगा है। गद्दाफी ने लीबिया की राजधानी त्रिपोली में भारत के राजदूत से मुलाकात में यह पेशकश की है।

भारत के अलावा, उन्‍होंने चीन और रूस के राजदूतों से भी मुलाकात की। गद्दाफी ने तीनों राजदूतों को कहा कि लीबिया में विद्रोह शुरू होने के बाद से पश्चिमी तेल कंपनियां भाग रही हैं। लीबिया में तेल का उत्‍पादन कम हो रहा है। ऐसे में इन कपंनियों की हिस्‍सेदारी भारत, चीन व रूस ले सकते हैं। बदले में वे लीबिया सरकार को समर्थन दें।

ग़ौरतलब है कि अफ्रीकी देशों के तेल संसाधनों में हिस्‍सेदारी के लिए भारत को लगातार चीन से प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है। पर ज्‍यादा निवेश की मजबूरी के चलते वह इस मामले में पिछड़ रहा है।

लीबिया में भारत के राजदूत एम. मनिमेकलाई और गद्दाफी की मुलाकात की दिल्‍ली में सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है। पर सूत्रों ने बताया कि लीबियाई नेता ने भारतीय राजदूत को धन्‍यवाद देने के लिए बुलाया था। यह धन्‍यवाद अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से लीबिया पर आयद प्रतिबंध का विरोध करने के लिए दिया गया।

भारत अब तक लीबिया पर आर्थिक प्रतिबंध के खिलाफ रहा है। भारत के मुताबिक़, जनता को मुश्किल में डालने वाला कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। अगर किसी देश के शासक का विरोध किया जा रहा हो तो इसकी सज़ा उस देश की जनता को नहीं दी जानी चाहिये। भारत लीबिया को नो फ्लाई जोन घोषित करने या उसके खिलाफ सैन्‍य ताकत के इस्‍तेमाल का भी विरोध करता रहा है। जबकि ब्रिटेन और फ्रांस लीबिया को नो फ्लाई जोन बनाने की वकालत करते रहे हैं।

Monday, March 14, 2011

बलात्कार कर भारतीय छात्रा को मौत के घाट उतारा


मेलबर्न : अपने उज्जवल भविष्य के लिये विदेश में पढ़ने गए भारतीय छात्रों-छात्राओं के लिये अब अपना लक्ष्य हासिल करना इतना ख़तरे से ख़ाली नहीं रह गया है। आए दिन विदेशों में, ख़ास कर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्र-छात्राओं के साथ उत्पीड़न, बलात्कार व हत्या की ख़बरें अब आम सी बात हो गई हैं।

ऑस्ट्रेलिया में हुए एक ताज़ा मामले में एक दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में एक भारतीय मूल की 24 वर्षीया छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के बाद उसकी हत्या किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। छात्रा का शव सिडनी के एक पार्क में सूटकेस से बरामद किया गया।

समाचार पत्र 'द एज' के अनुसार पुलिस ने बताया है कि छात्रा का शव शुक्रवार सुबह पश्चिमोत्तर सिडनी के मिडोबैंक पार्क से सटी नहर से बरामद किया गया है। स्थानीय पुलिस की ओर से जारी बयान में बताया गया कि 11 मार्च की सुबह निर्माण कार्य में लगे मजदूरों ने मिडोबैक पार्क के पास की नहर से सूटकेस में रखे महिला के शव को देखने के बाद इसकी जानकारी को पुलिस को दी। मृतका की पहचान भारतीय छात्रा तोशा ठक्कर के रूप मं की गई है।

पुलिस शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत के कारणों का पता चल सके। पुलिस ने इस हत्या के मामले में 19 वर्षीय डेनियल स्टानी रेजिनाल्ड को गिरफ्तार किया है और पुलिस आरोपी से हत्या और दुष्कर्म के मामले को लेकर पूछताछ कर रही है। डेनियल पर आरोप है कि उसने पिछले बुधवार को छात्रा के साथ बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी। डेनियल को शुक्रवार रात को गिरफ्तार किया गया था। सोमवार को इस मामले की संक्षिप्त सुनवाई बर्वुड स्थानीय अदालत में हुई। उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि मृतक छात्रा को आखिरी बार नौ मार्च को जिंदा देखा गया था। पुलिस तोषा के कॉलेज से तथ्य जुटाने में लगी है।

तोशा ठक्कर सिडनी कॉलेज ऑफ बिजनेस एंड आईटी में अकाउंट की पढ़ाई कर रही थी और वह ऑस्ट्रेलिया की स्थाई निवासी थी। समाचारपत्र के मुताबिक युवती के एक मित्र ने बताया, "हम बहुत दुखी हैं और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। वह बहुत अच्छी थी और सभी के साथ मिलजुलकर रहती थी। यह काफी दुखद घटना है।"

गिरफ़्तार आरोपी डेनियल रेजीनॉल्ड क्रोडॉन में ठक्कर के निवास के समीप ही रहता है। उसे पुलिस ने एशफील्ड मोटल से गिरप्तार किया। उसे पारामट्टा के स्थानीय कोर्ट में पेश किया गया, लेकिन जज ने उसे जमानत नहीं दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मौजूद थे। अदालत के बाहर भी भारतीय छात्रों ने घटना के विरोध में प्रदर्शन किया।

मामले की प्रमुख जांचकर्ता निरीक्षक पामेला योंग ने कहा कि युवती एक सम्मानित महिला थी और इस तरह की घटना की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि युवती के माता-पिता ने अभी ऑस्ट्रेलिया आने की योजना नहीं बनाई है। पुलिस हिंदू परम्परा के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए शव भारत भेजने पर विचार कर रही है।

Saturday, March 12, 2011

जापान: 1,000 के पार पहुंची मरने वालों की संख्या


टोक्यो : शुक्रवार को आए भूकंप और सुनामी से मरने वालों की संख्या में काफ़ी तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रहा है। जापान सरकार के मुख्य कैबिनेट सचिव यूकियो इदानो ने जानकारी दी कि उत्तर पूर्वी जापान में आए 8.9 तीव्रता के भूकम्प और इसके बाद समुद्र में उठी भयावह सुनामी लहरों से मरने वालों की संख्या 1,000 से ज्यादा हो सकती है। विभिन्न सूचनाओं के मुताबिक करीब 1,000 लोग लापता हैं और कई लोग घायल हुए हैं।

बचावकर्मी ढह गई इमारतों में जिंदा बचे लोगों को तलाशने का प्रयास कर रहे हैं। जापान के सेल्फ डिफेंस फोर्सेज (एसडीएफ) के जवान बचाव कार्य में लगे है और राहत कार्य के लिए अन्य दल भेजे जा रहे हैं। सरकार द्वारा बचाव कार्य के लिये 20,000 जवान, 190 विमान और 25 पोत तैनात किए गए हैं। एसडीएफ अमेरिकी सैन्य स्टेशन की मदद से 600 जापानी सैनिकों को अमेरिकी जहाजों से 250 वाहनों के परिवहन के लिए काम कर रहा है। हजारों घर गिर गए है कई पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं और बस एवं रेल सेवाएं बंद कर दी गई हैं। कई स़डकें बंद हैं और दूरसंचार सेवाएं ठप्प हो चुकी हैं।

टोक्यो के शहर नियोजन विशेषज्ञ मिनरोउ वेटेनावे ने कहा कि उत्तरी जापान में हुई तबाही सुमात्रा में दिसम्बर 2004 में हुई तबाही जैसी ही है। फुकुशिमा के मियामी सोमा में 1,800 घर तबाह हुए हैं और मदद केवल हेलीकॉप्टरों के जरिए ही पहुंच रही है।

फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में हुआ धमाका, चार लोग घायल


टोक्यो : कल सुनामी और भूकंप के रूप में टूटे क़ुदरत के क़हर ने जापान को तहस नहस कर कर दिया है। इस तबाही के कारण प्रभावित हुई चीज़ें भी अब नुक़सान के रूप में उभर कर सामने आनी शुरू हो गई हैं। अब ताज़ा घटना में भूकंप प्रभावित फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में आज विस्फोट होने से चार लोग घायल हो गए। भूकंप और सुनामी से जूझ रहे जापान के समक्ष एक बहुत बड़ा संकट सामने आ गया है।

उत्तरी जापान में भूकंप से हुई तबाही के बाद फुकुशिमा दायची परमाणु संयंत्र में परमाणु विकिरण सामान्य से 1,000 गुना ज्यादा दर्ज किया गया है। कूलिंग सिस्टम खराब होने के बाद संयंत्र से रिसाव शुरू हो गया है।

हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। खराबी के बाद सरकार ने पहली बार किसी परमाणु संयंत्र पर आपातकाल लगाया है। जापान के प्रधानमंत्री ने फुकुशिमा प्लाट का दौरा किया है और वे परमाणु विशेषज्ञों के साथ हालात पर खुद नजर रख रहे हैं। इस बात की आशका व्यक्त की जा रही है कि अत्यधिक गर्म हो रहे संयंत्र में भारी दबाव की वजह से रेडियोधर्मी विकिरण बाहर फैल रहा है। भूकंप के कारण संयंत्र को मिलने वाली बिजली और जल आपूर्ति बाधित हो गई है जिससे संयंत्र को ठंडा करने के उपकरण बंद हो गए हैं।

जापान के प्रधानमंत्री नाओतो कान ने संयंत्र के आसपास के खाली कराए जाने वाले इलाके का दायरा बढ़ाकर 10 किलोमीटर करने की घोषणा भी कर दी है। भूकंप के बाद प्रशासन ने संयंत्र के आस-पास के दो किलोमीटर के दायरे को खाली कराने की घोषणा की थी। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि अमेरिकी वायुसेना ने जापान के संकटग्रस्त परमाणु संयंत्र के लिए शीत उपकरण भेजे हैं। नाओतो ने हेलीकाप्टर से आपदाग्रस्त इलाके का दौरा किया।

अपने परमाणु संयंत्रों से रिसाव रोकने की कोशिश के तहत जापान ने आज पाचों परमाणु संयंत्रों पर आपातकाल लगा दिया और आसपास से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। इस बीच जापान ने भूकंप से तबाह हुए उत्तरपूर्वी हिस्से में जोरदार राहत अभियान शुरू किया है।

फुकूशिमा इलाके में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के नियंत्रण कक्ष में रेडियोधर्मी विकिरण में अचानक सामान्य से एक हजार गुणा ज्यादा इजाफे का पता चला। अधिकारियों का कहना है कि दरवाजे के बाहर यह मात्रा सामान्य से केवल आठ गुणा ज्यादा है और उससे फिलहाल स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं है। जापान की परमाणु सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि फुकुशिमा दायिचि परमाणु संयंत्र के छह में से एक 'बायलर' में प्रेशर सामान्य से 1.5 प्रतिशत बढ़ गया है। परमाणु एवं औद्योगिक सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि उसने परमाणु इकाई का संचालन करने वाली बिजली कंपनी को आदेश जारी किया है कि संयंत्र के कंटेनर से दाब घटाने के लिए वाल्व को खोल दिया जाए।

Friday, March 11, 2011

जापान में सुनामी-भूकंप से तबाही, 32 मौतों की पुष्टि

जापान में ज़बर्दस्त भूकंप और सुनामी से जान-माल का भारी नुक़सान हुआ है। 8.9 की तीव्रता वाले जबरदस्त भूकंप और उससे प्रशांत तट पर उठी भयानक सूनामी लहरों से भारी तबाही हुई है। अभी तक इस त्रासदी में 32 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। सैक्ड़ों लोग अब भी लापता हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी देश भर में भूकंप से हुई तबाही के आंकड़े जुटा रही है|
रिक्टर पैमाने पर 8.9 की तीव्रता वाले भूकंप से 10 मीटर ऊंची सूनामी लहरें उठी जो अपने रास्ते में आई हर चीज को बहा कर ले गईं। यहां तक कि घर और कारें भी बह गए। भूकंप के कारण कई इमारतों में आग लग गई। टोक्यो में लगभग चालीस लाख घरों की बिजली गुल हो गई। शेनदाई शहर में एक होटल की छत ध्वस्त होने की खबर है जिसके नीचे कईं लोगों के दबे होने की आशंका है।

जापान के सरकारी मीडिया संस्थान एनएचके ने खबर दी है कि भूकंप से बहुत से लोग घायल हुए हैं और लोगों को ऊंची इमारतों और तटीय इलाकों में ना जाने को कहा गया है| जापान में आए शक्तिशाली भूंकप के बाद फिलीपींस, ताइवान और इंडोनेशिया में सूनामी चेतावनी जारी की गई है| शुक्रवार को आए भूकंप ने 2004 की सूनामी की याद दिला दी है जिसमें जानमाल की भयानक तबाही हुई थी|

प्रशांत सूनामी चेतावनी केंद्र ने पूरे प्रशांत क्षेत्र के अलावा कोलंबिया और पेरू जैसे दूरदराज के देशों के लिए भी सूनामी चेतावनी जारी की है. भूकंप का केंद्र राजधानी टोक्यो से 300 किलोमीटर दूर सेंदाई शहर में बताया जा रहा है। वहीं इस भयानक तबाही के बाद लोगों में दहशत का माहौल है।

जापान में सुनामी व भूकंप से भयंकर तबाही



टोक्यो : जापान में आज क़ुदरत के क़हर का ख़ौफ़नाक नज़ारा पेश आया जिसने पूरी दुनिया को दहला कर रख दिया। टोक्‍यो से करीब 400 किलोमीटर दूर समुद्र में अचानक लहरों उठकर अपने उफ़ान पर आईं और देखते ही देखते 7 मीटर ऊंची लहरों ने टोक्‍यो का रूख़ कर लिया। लहरें इतनी तेज़ थीं कि पानी के जहाज़ लहरों के साथ बहकर शहर के अंदर आ गए। कई छोटे-बड़े पानी के जहाज़ अनियंत्रित होकर शहर में घुसे और इमारतों, फ्लाईओवर, ओवर ब्रिज से जा टकराये।

घरों के बाहर और स़डकों पर ख़डे हजारों वाहन बहकर समुद्र में पहुंच गए हैं। हजारों लोग घरों की छतों पर शरण लिए हुए हैं और मदद की गुहार कर रहे हैं। सरकार ने मदद के लिए सेना को बुलाया है। सुनामी से काफी क्षति हुई है और पानी में दर्जनों कारें, नाव और यहां तक कि कई मकान भी बह गये। टोक्यो में 40 लाख घरों में बिजली गुल है। भूकंप के बाद सभी परमाणु संयंत्रों को बंद कर दिया गया है। अधिकारी भूकंप के कारण हुई क्षति के अलावा घायलों और मृतकों की संख्या का पता लगा रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनके पास विस्तृत जानकारी नहीं है।

भूकंप के तेज झटकों के बाद सूनामी ने देश के उत्‍तरी तट को तबाह कर दिया। भूकंप की तीव्रता रिक्‍टर पैमाने पर 8.8 आंकी गई है। इनमें कई लहरें 13 मीटर तक की ऊंचाई वाली थीं। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वे के मुताबिक भूकंप का केंद्र राजधानी टोक्‍यो से करीब 400 किलोमीटर दूर 20 मील की गहराई में था। भूकंप से टोक्‍यो में कई इमारतें हिल गईं और डर के मारे लोग घरों से बाहर आ गए। भूकंप के बाद आई बाढ़ से समुद्र तट से सटे मियागी इलाके में कई इमारतें और कारें बह गईं।

पानी की लहरों में कारें, ट्रक, जीपें आदि तमाम वाहन कूड़े की तरह पानी में बह गए। इस दौरान कुछ देर के लिए ऐसा लगने लगा था कि पूरा टोक्‍यो डूब जायेगा। जापान के तटीय इलाकों में स्थित शहरों के अंदर करीब 50 किलोमीटर दूरी तक पहुंच गया। इसमें करीब 50 से अधिक शहर डूब चुके हैं। सदी के सबसे बड़े भूकंप में में कई इमारतों के नीचे के तीन से चार तल पूरी तरह डूब चुके हैं।

भूकंप के केंद्र के पास समुद्री तट पर आये सुनामी में कई मकान बह गये। टोक्यो से लोगों के घायल होने की भी खबरें है। कई अन्य देशों में भूकंप की आशंका जताई जा रही है। मौसम विज्ञान विभाग ने जापान के पूरे प्रशांत महासागर के तट के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की है। एनएचके ने चेतावनी दी कि तट के नजदीक रहने वाले लोग सुरक्षित इलाकों की ओर चले जाएं। हवाई में पैसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर ने कहा कि जापान, रूस, मार्कस आईलैंड और उत्तरी मारियाना के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गयी है। गुआम, ताईवान, फिलिपिंस, इंडोनेशिया और अमेरिकी राज्य हवाई को सुनामी पर नजर रखने को कहा गया है।

मौसम विभाग ने कहा कि पूर्वी तट से करीब 125 किलोमीटर की दूरी पर दस किलोमीटर की गहराई में रात दो बजकर 56 मिनट पर भूकंप के झटके आये। यह इलाका तोक्यो से 380 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। तोक्यो में बड़ी संख्या में भवन हिलने लगे और सुरक्षा के लिए लोग सड़कों पर निकल आये। टीवी फुटेज में दिखाया गया है कि एक बड़े भवन में आग लगी हुई है और तोक्यो के ओदैबा जिले में घरों से धुआं निकल रहा है।

मध्य टोक्यो में रेलगाड़ियों को रोक दिया गया। भूकंप आने के आधे घंटे बाद भी टोक्यो में बड़े भवन हिलते रहे और मोबाइल नेटवर्क ने काम करना बंद कर दिया। तटरक्षक बल के अधिकारी योसुके ओ ने कहा कि जापान के तटरक्षक बल ने कार्यबल का गठन किया है और अधिकारी आपात स्थितियों के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हम जल्द क्षति का आकलन करेंगे क्योंकि भूकंप काफी तगड़ा था।

Thursday, March 10, 2011

धर्मगुरू दलाई लामा ने लिया राजनीति से संन्यास


धर्मशाला : तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है और कहा कि वक्त आ गया है जब उनकी जगह, तिब्बतियों को खुद लोकतांत्रिक तरीके से अपने नेता को चुनना चाहिए। दलाई लामा ने कहा है कि वे तिब्बतियों के राजनीतिक नेता की भूमिका त्याग रहे हैं।

तिब्बती गुरू ने कहा कि वह औपचारिक रूप से निर्वासित तिब्बती संसद का प्रस्ताव रखेंगे जो आवश्यक संशोधन कर सके। तिब्बती आंदोलन के निर्वासित प्रमुख 76 वर्षीय नेता ने कहा कि वह औपचारिक रूप से निर्वासित तिब्बती संसद का प्रस्ताव रखेंगे जो आवश्यक संशोधन कर सके। उन्होंने कहा, 1960 के दशक से मैं लगातार जोर दे रहा हूं कि तिब्बती लोगों को एक ऐसे नेता की जरूरत है जो तिब्बती लोगों द्वारा स्वतंत्र रूप से निर्वाचित हो जिसे मैं अपनी शक्तियां दे सकूं। अब वह वक्त आ गया है जब इसे लागू किया जाए।

उन्होंने कहा, 'मैं लगातार जोर दे रहा हूं कि तिब्बती लोगों को एक ऐसे नेता की जरूरत है जो तिब्बती लोगों द्वारा स्वतंत्र रूप से चुना गया हो जिसे मैं अपनी शक्तियां दे सकूं। अब वह वक्त आ गया है जब इसे लागू किया जाए।' दलाई लामा 1959 में चीनी शासन के खिलाफ तिब्बती विद्रोह की जयंती पर बोल रहे थे।

उन्होंने कहा, 'मार्च से शुरू होने वाले 14वें निर्वासित तिब्बती संसद के आगामी 11वें सत्र के दौरान मैं औपचारिक रूप से प्रस्ताव करूंगा कि निर्वासित तिब्बतियों के लिए चार्टर बनाने की खातिर आवश्यक संशोधन किया जाए। इसमें मेरी औपचारिक शक्तियों को निर्वाचित नेता को देने का फैसला दिखे।

चीनी शासन के खिलाफ असफल विद्रोह के बाद 1959 में भारत आए दलाई लामा ने कहा, 'मैं ऐसा जिम्मेदारी से बचने के लिए नहीं कर रहा हूं बल्कि यह तिब्बतियों के लिए लंबे समय में फायदे की बात है। ऐसा नहीं है कि मैं निराश होकर ऐसा कर रहा हूं। नोबेल पुरस्कार विजेता ने कहा कि वह सिर्फ तिब्बतियों के हित के लिए अपनी भूमिका निभाने को प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि लोगों को धीरे-धीरे उनके इरादे समझ में आएंगे और उसी के मुताबिक उनका फैसला अमल में दिखने लगेगा। दलाई लामा ने इससे पहले तिब्बती आंदोलन के राजनीतिक प्रमुख पद से हटने का संकेत दिया था।

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