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Monday, March 14, 2011

बलात्कार कर भारतीय छात्रा को मौत के घाट उतारा


मेलबर्न : अपने उज्जवल भविष्य के लिये विदेश में पढ़ने गए भारतीय छात्रों-छात्राओं के लिये अब अपना लक्ष्य हासिल करना इतना ख़तरे से ख़ाली नहीं रह गया है। आए दिन विदेशों में, ख़ास कर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्र-छात्राओं के साथ उत्पीड़न, बलात्कार व हत्या की ख़बरें अब आम सी बात हो गई हैं।

ऑस्ट्रेलिया में हुए एक ताज़ा मामले में एक दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में एक भारतीय मूल की 24 वर्षीया छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के बाद उसकी हत्या किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। छात्रा का शव सिडनी के एक पार्क में सूटकेस से बरामद किया गया।

समाचार पत्र 'द एज' के अनुसार पुलिस ने बताया है कि छात्रा का शव शुक्रवार सुबह पश्चिमोत्तर सिडनी के मिडोबैंक पार्क से सटी नहर से बरामद किया गया है। स्थानीय पुलिस की ओर से जारी बयान में बताया गया कि 11 मार्च की सुबह निर्माण कार्य में लगे मजदूरों ने मिडोबैक पार्क के पास की नहर से सूटकेस में रखे महिला के शव को देखने के बाद इसकी जानकारी को पुलिस को दी। मृतका की पहचान भारतीय छात्रा तोशा ठक्कर के रूप मं की गई है।

पुलिस शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत के कारणों का पता चल सके। पुलिस ने इस हत्या के मामले में 19 वर्षीय डेनियल स्टानी रेजिनाल्ड को गिरफ्तार किया है और पुलिस आरोपी से हत्या और दुष्कर्म के मामले को लेकर पूछताछ कर रही है। डेनियल पर आरोप है कि उसने पिछले बुधवार को छात्रा के साथ बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी। डेनियल को शुक्रवार रात को गिरफ्तार किया गया था। सोमवार को इस मामले की संक्षिप्त सुनवाई बर्वुड स्थानीय अदालत में हुई। उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि मृतक छात्रा को आखिरी बार नौ मार्च को जिंदा देखा गया था। पुलिस तोषा के कॉलेज से तथ्य जुटाने में लगी है।

तोशा ठक्कर सिडनी कॉलेज ऑफ बिजनेस एंड आईटी में अकाउंट की पढ़ाई कर रही थी और वह ऑस्ट्रेलिया की स्थाई निवासी थी। समाचारपत्र के मुताबिक युवती के एक मित्र ने बताया, "हम बहुत दुखी हैं और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। वह बहुत अच्छी थी और सभी के साथ मिलजुलकर रहती थी। यह काफी दुखद घटना है।"

गिरफ़्तार आरोपी डेनियल रेजीनॉल्ड क्रोडॉन में ठक्कर के निवास के समीप ही रहता है। उसे पुलिस ने एशफील्ड मोटल से गिरप्तार किया। उसे पारामट्टा के स्थानीय कोर्ट में पेश किया गया, लेकिन जज ने उसे जमानत नहीं दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मौजूद थे। अदालत के बाहर भी भारतीय छात्रों ने घटना के विरोध में प्रदर्शन किया।

मामले की प्रमुख जांचकर्ता निरीक्षक पामेला योंग ने कहा कि युवती एक सम्मानित महिला थी और इस तरह की घटना की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि युवती के माता-पिता ने अभी ऑस्ट्रेलिया आने की योजना नहीं बनाई है। पुलिस हिंदू परम्परा के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए शव भारत भेजने पर विचार कर रही है।

Wednesday, March 9, 2011

डीयू छात्रा की हत्या की गूंज संसद में भी


नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन हुए राधिका हत्याकांड का मामला अब संसद में जा पहुंचा है। हत्या होने के अगले ही दिन दिल्ली पुलिस द्वारा किये जाने वाले ’पब्लिक की सुरक्षा’ के दावों की धज्जियां उड़ा देने वाली इस घटना की गूंज अब संसद में सुनाई देने लगी है। देश की सर्वश्रेष्ट पुलिस का तमग़ा प्राप्त दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि छात्रा की हत्या को 24 घंटे बीत चुके हैं लेकिन अब तक दिल्ली पुलिस कातिल का सुराग तक नहीं ढूंढ नहीं पाई है।

इस बीच, इस मामले में न्याय की मांगे भी उठनी शुरु हो गई हैं। राधिका के साथ रामलाल आनंद कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं ने हत्या के विरोध में आज प्रदर्शन किया है। राधिका को इंसाफ दिलाने को लेकर छात्रों ने कॉलेज से लेकर इंडिया गेट तक प्रदर्शन किया है। छात्रों का नारा था हमें इंसाफ चाहिए, कातिल को अरेस्ट करो। इससे पहले गुस्साए छात्रों ने मंगलवार को रिंग रोड पर जाम भी लगाया था।

वहीं इसकी गूंज आज लोक सभा में भी सुनाई पड़ी। बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने दिल्ली में महिलाओं पर हो रहे अपराध के मामले को लोकसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अपराध चरम सीमा पर है और कानून-व्यवस्था सही नहीं है।

गौरतलब है कि 8 मार्च यानि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सुबह के 10 बजे धौलाकुआं के पास फुटओवर ब्रिज पर राधिका तंवर नाम की लड़की की सरेआम गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। गोली मारने के बाद बेखौफ अपराधी वहां से फरार होने में क़ामयाब रहा था। 22 वर्षीय राधिका दिल्ली युनिवर्सिटी के रामलाल आनंद कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर की छात्रा थी। लड़की नारायणा गांव की रहने वाली थी।

Monday, March 7, 2011

अमेरिका: धर्मगुरू, लडकियों से छेडछाड के दोषी क़रार


वॉशिंगटन : आए दिन अब इन पाखंडी बाबाओं और धार्मिक गुरूओं की काली करतूतों से पर्दा उठने लगा है। अब ताज़ा मामला अमेरिका का है जहां एक हिंदू धर्मगुरू ने गुरू की मर्यादा को तार-तार कर ’धर्मगुरू’ के शब्द पर एक बदनुमा दाग़ लगा दिया है। अमेरिका के बड़े हिंदू धार्मिक स्थलों में गिने जाने वाले एक आश्रम के प्रमुख गुरु प्रकाशनंद सरस्वती को दो युवतियों के साथ छेड़छाड़ का दोषी करार दिया गया है।

बरसाना धाम नामक इस आश्रम में इन युवतियों के परिवार के लोग सेवा कार्य करते थे और वे इसी आश्रम में रहते थे। ऑस्टिन में बना बरसाना धाम 200 एकड़ में फैला है और अमेरिका के कोने-कोने से हिंदू यहां आते हैं। प्रकाशनंद को उनके भक्त श्री स्वामीजी के नाम से पुकारते हैं। लेकिन प्रकाशनंद ने लोगों की आस्था से खिलवाड किया है।

स्वामी प्रकाशनंद का शोषण के आरोपों से पुराना रिश्ता रहा है। 30 साल की श्यामा रोज और 27 साल की वेसला काजीमेर ने कहा कि पिछले सालों में कई मौकों पर उनका शोषण करने की कोशिश की। दोनों युवतियों का कहना है कि जब वे 12 साल की थीं, जब से स्वामी जी उनसे छेड़छाड़ की कोशिश करते रहे हैं। दोनों की शिकायत पर अप्रैल, 2008 में गिरफ्तार होने के बाद प्रकाशनंद सरस्वती को एक मिलियन (10 लाख) अमेरिकी डॉलर के बॉन्ड पर रिहा किया गया था। 31 साल की एक और महिला कैट टॉनेसन ने भी हाल में प्रकाशनंद सरस्वती पर ऐसे ही आरोप लगाए थे।

स्वामी को छेड़छाड़ का दोषी करार दिए जाने के बाद आश्रम से जुड़े लोग काफी हैरत में हैं। बरसाना धाम के प्रवक्ता अमन अग्रवाल ने कहा हमें इस फैसले से निराशा हुई है। हम जानते हैं कि स्वामी जी निर्दोष हैं। यह कानूनी प्रक्रिया का अंत नहीं है। इस मामले में आज यानी सोमवार को सजा पर फैसला होना है। धर्मगुरू को 20 साल की अधिकतम सजा हो सकती है।

इस घटना ने पूरी दुनिया में लोगों को सुख शांति का पाठ पढ़ा रहे हिंदू धर्मगुरूओं को शक़ के दायरे में ला खडा किया है। ऐसी घटनाओं क कारण अब दुनिया भर में स्थित हिंदू आश्रमों को शक़ की नज़रों से देखा जाने लगेगा। ऐसी घटनाओं से लोगों की आस्था को भारी ठेस पहुंचती है।

Monday, February 21, 2011

मालेगांव विस्फोट मामले में सही जांच नहीं हुई - सलमान खुर्शीद


मुंबई : देश भर में इन दिनों मालेगांव ब्लास्ट मामले मे गिरफ़्तार किये गये मुस्लिम युवकों की रिहाई की मांग की जा रही है। अब जबकि महाराष्ट्र और देश भर के लिये एक कलंक साबित हुए मालेगांव ब्लास्ट मामले में हिंदू कट्टरपंथी स्वामी असीमानंद द्वारा पुलिस के सामने अपना गुनाह क़ुबूल किया जा चुका है। लेकिन इसके बाद भी इस मामले में गिरफ़्तार मुस्लिम युवकों की रिहाई के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे है। अब इस मामले में, केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री सलमान खुर्शीद ने अफ़्सोस जताते हुए कहा है कि मालेगांव विस्फोट मामले में सही जांच नहीं हुई है। इस मामले में अभी न्याय की जरूरत है।

एक उर्दू समाचार चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित सलमान खुर्शीद ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ‘यह एकदम साफ है कि अन्याय हुआ है। हालांकि 100 प्रतिशत साफ-सुथरी जांच की गुंजाइश किसी भी केस में नहीं होती। कई लोगों को गिरफ्तार किया जाता है। कुछ छोड़ भी दिए जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों को लगातार निशाना बनाना यकीनन गलत है।’

मालेगांव केस में नौ मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया है। इनकी गिरफ्तारी पर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं। और अब इनकी रिहाई की लगातार मांग की जा रही है।

खुर्शीद ने बताया, ‘केंद्रीय गृह मंत्री लगातार इस मामले पर नजर रख रहे हैं। वे इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और केंद्रीय कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली के भी संपर्क में हैं।’ महाराष्ट्र के मालेगांव में 8 सितंबर 2006 को हुए बम विस्फोट में 36 लोग मारे गए थे। करीब 100 लोग घायल हुए थे। इस मामले में हिंदू कट्टरपंथी स्वामी असीमानंद पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल कर चुका है।

वहीं इसी कार्यक्रम में मह्जूद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री चव्हाण ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि "मालेगांव मामला महाराष्ट्र के इतिहास का दुखद अध्याय है। इसमें जो लोग गलत तरीके से गिरफ्तार किए गए हैं, उन्हें न्याय मिलेगा।"

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