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Thursday, April 14, 2011

चीन की मेज़बानी में ब्रिक्स सम्मेलन शुरू


सान्या : चीन के सान्या शहर में गुरुवार को ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका यानी ब्रिक्स देशों के तीसरे शिखर सम्मेलन की विधिवत शुरूआत हो गई। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं ने एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया।
कूटनीतिक सूत्रों ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया कि घोषणा पत्र में कहा गया है कि वैश्रि्वक अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय मसलों और विकास से जुडे़ पक्षों पर ब्रिक्स देशों में सहमति बनी।
इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ ने की और इसमें ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ, रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव, भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने हिस्सा लिया।
दुनिया के पांच उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के संगठन यानी ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय तंत्र में सुधार का आह्वान किया है।
सम्मेलन में हू ने कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए हमें न्यायोचित, समेकित और बेहतर प्रबंधन युक्त अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय तंत्र स्थापित करना चाहिए। इसके लिए इन तंत्रों में उभरते बाजारों ओर विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत है।
हू ने कहा कि हमें एक सामान और न्यायोचित अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार तंत्र को बढ़ाते हुए सभी तरह के संरक्षणवाद का विरोध करना चाहिए। हमें बहुपक्षीय व्यापार को मजबूती प्रदान करते हुए दोहा दौर की वार्ता के लक्ष्यों को जल्द से जल्द हासिल करना चाहिए।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक हू ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संकट ने वैश्विक आर्थिक असंतुलन को लेकर एक बार फिर से सोचने पर मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि अंत में कहा जा सकता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा असंतुलन उत्तर और दक्षिण के बीच विकास का असंतुलन है। दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी समस्या विकासशील देशों का अपर्याप्त विकास है।
उन्होंने नेताओं से विकासशील देशों के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार और उसका विकास होगा।

Tuesday, April 12, 2011

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चीन रवाना


नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी पांच दिन की चीन यात्रा पर आज रवाना हो गये। प्रधानमंत्री पांच विकासशील देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिये चीन गये हैं। ब्रिक्स के नाम से चर्चित इन देशों - ब्राजील,रूस,भारत,चीन और दक्षिण अफ़्रीका के नेता ईंधन और खाद्य सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दों पर समन्वित प्रयास की आवश्यकता पर बल देने के साथ साथ खाड़ी तथा उत्तरी अफ़्रीकी देशों में उभरी नई अनिश्चितताओं से उत्पन्न स्थिति पर भी चर्चा करेंगे।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यह विदेश यात्रा पांच दिन की है, जिसमें आखि‍री दो दिन वह कजाकिस्तान में होंगे। प्रस्थान के समय सिंह ने एक बयान में कहा, आर्थि‍क वृद्धि के परंपरागत स्रोत अब भी दबाव में हैं और इस बीच विश्व के विभिन्न हिस्सों में हाल की घटनाओं से अनिश्चितता उभरी है. सम्मेलन के विषयों के बारे में में विदेश मंत्रालय में सचिव आर्थि‍क संबंध मानबीर सिंह ने कल कहा था कि लीबिया एक ‘प्रमुख मुद्दा’ है क्योंकि यह सभी बिक्स देशों को प्रभावित करता है. शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है.

चीन के दक्षिणी तटवर्ती शहर सान्या में होने इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री सिंह की चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओं, रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव, ब्राजील के राष्ट्रपति दालिमा रोसेफ़ और दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा से मुलाकात करेंगे।

प्रधानमंत्री की इस यात्रा को भारत-चीन के संबंधों के निहितार्थ भी देखा जा रहा है। इससे पहले प्रधानमंत्री के साथ जाने वाले जम्मू-कश्मीर के पत्रकारों को चीनी दूतावास ने अलग से कोई वीज़ा

Tuesday, March 22, 2011

कांगो:विमान हादसे में 19 की मौत


ब्राजील: कांगो की आर्थिक राजधानी प्वाइंटी-नोइरे के आवासीय क्षेत्र में एक मालवाहक विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई।

कांगो की राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन एजेंसी के महानिदेशक मिशेल एमबेन्डे के मुताबिक इस हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हुए हैं। इतना ही नहीं मरने वालों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। एमबेन्डे का कहना है कि विमान उस समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ जब यह हवाई अड्डे पर उतर रहा था।

Friday, March 4, 2011

कर्ज़दार देशों की सूची में भारत को 5वां स्थान


नई दिल्ली : आर्थिक क्षेत्र में दुनिया भर में अपना लोहा मनवा चुके भारत को बडा धक्का लगा है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत को दुनिया भर के देशों की सूची में पांचवा स्थान प्राप्त हुआ। लेकिन ये स्थान प्राप्त होना, कोई ख़ुशी का मौक़ा नहीं है बल्कि एक गहरी सोच और मंथन का विषय है। लगातार तेजी से आर्थिक तरक्की कर रहे भारत को, आर्थिक मोर्चे पर ही बड़ा धक्का लग गया है।

दरअसल अब भारत विश्व का पांचवा सबसे बड़ा कर्जदार देश बन गया है। सितंबर 2010 को समाप्त तिमाही के दौरान भारत के उपर 1,332,195 करोड़ का बाहरी कर्ज रहा है। इससे पहले मार्च 2010 को समाप्त तिमाही में बाहरी कर्ज 1,184,998 करोड़ रुपये रहा था।

इस बात का खुलासा वर्ल्ड बैंक के ‘ग्लोबल डेवेलपमेंट फाइनैंस 2010’ रिपोर्ट में हुआ है। इस लिस्ट में दुनियाभर के 20 सबसे कर्जदार देशों के नाम का जिक्र है। जिसमें भारत पांचवे पायदान पर रहा है।

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोक सभा में पूछे गए एक प्रश्न के जबाव में यह जानकारी संसद को दी। उन्होंने यह भी बताया कि इस लिस्ट में पहले नंबर पर रूस का नाम है। जबकी दूसरे नंबर पर चीन, तीसरे पायदान पर तुर्की और चौथे स्थान पर ब्राजील का नाम है।

ग़ौरतलब है कि अगर केंद्रीय सरकार, स्विस बैंकों में जमा काले धन को भारत वापस लाने में सफ़ल हो पाती है तो भारत के सर से क़र्ज़ का एक बडा बोझ काफ़ी हद तक हल्का हो सकेगा। एक अनुमान के मुताबिक़, स्विस बैंकों में जमा भारत के 87 लाख करोड रूपयों में से कितना पैसा इन्कम टैक्स के ज़रिये सरकारी खातों में जाएगा, इस बात का तो अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता। अगर काला धन वापस आ जाता है तो भारत, अपने ऊपर चढ़ा क़र्ज़ उतारकर दूसरे देशों को क़र्ज़ देने की स्थिति में आ जाएगा।

Saturday, February 26, 2011

दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत में भारत को 5वां स्थान


केंद्रीय सरकार की लचर नीतियों और भ्रष्टाचार के कारण बेरोज़गारी और महंगाई से जूझने के बावजूद भारत को आर्थिक मोर्चे पर कामयाबियों का सिलसिला लगातार जारी है। पहले भारत ने दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को मंदी से उबरने में सहारा दिया और अब भारत खुद दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन गया है। आर्थिक शक्ति के लिहाज से भारत अब दुनिया के 112 सबसे मजबूत देशों में पांचवें नंबर पर आ गया है।

शुक्रवार को पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अर्थव्यवस्था की संसाधन जुटाने की क्षमता, ऋण मूल्य और साख के आधार पर यह आकलन किया गया है। अलग अलग देशों की सरकारों की आर्थिक शक्ति के सूचकांक यानी आईजीईपी भारत का कद काफी बढ़ गया है। इसके अनुसार दुनिया में सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका पहले स्थान पर है। इसके बाद दूसरे नंबर पर चीन को जगह मिली है। फिर जापान, जर्मनी, भारत, रूस, ब्राजील, फ्रांस, इटली तथा ब्रिटेन को स्थान दिया गया है।

Sunday, September 26, 2010

लॉस एंजिलस की अदालत करेगी फ़ैसला:बेशकीमती पन्ना किसका

लॉस एंजिलस: दुनिया के मूल्यवान रत्नों में शामिल बाहिया पन्ने पर
9 वर्षो से छिड़ी लड़ाई का समाधान अब लॉस एंजिलस की एक अदालत में होगा। इसकी खोज के बाद से ही इसके स्वामित्व को लेकर कई लोग अपना दावा पेश कर चुके हैं। पन्ने पर दावा करने वाले टोनी थॉम्स के मुताबिक उन्होंने इसे ब्राजील के एक जौहरी से 60 हजार डॉलर में खरीदा था। लेकिन जब इस पन्ने को घर भेजने की व्यवस्था की गई तब उस जौहरी ने उन्हें इसके चोरी होने की खबर दी उसने ऐसा इसलिए ताकि वह इसे किसी अन्य व्यक्ति को बेच सके। फिलहाल टोनी का मामला अदालत में चल रहा है। लेकिन मामले में शामिल अन्य लोगों का कहना है कि यह मामला खारिज होना चाहिए क्योंकि टोनी को वह पन्ना कभी बेचा ही नहीं गया था।

ब्राजील से गायब होने के बाद 2005 में इसे न्यू ओरलीन्स के एक गोदाम में पाया गया। यह बेशकीमती पन्ना कैटरीना तूफान में बहने से बच गया। एक समय इसे इंटरनेट ऑक्शन साइट ईबे पर 7.5 करोड़ डॉलर में बिक्री के लिए भी रखा गया था। इसके बाद इसे लास वेगास के एक जौहरी के पास से जब्त किया गया। फिलहाल यह पन्ना लॉस एंजिलस शेरिफ्स डिपार्टमेंट की कस्टडी में है।
2001 में ब्राजील में खोदे गये 381 किलो के इस पन्ने की कीमत 40 करोड़ डॉलर है।

Wednesday, June 16, 2010

FIFA 2010: ब्राज़ील की पहली जीत


दक्षिण अफ़्रीका-जोहानेसबर्ग। मैकॉन और ब्लूमर इलानो के गोल की बदौलत पांच बार की चैंपियन ब्राजील ने फीफा विश्व कप में उत्तर कोरिया को 2-1 से हराकर अपने विजय अभियान की शुरुआत की। इस जीत से ब्राजील ग्रुप-जी में तीन अंकों के साथ शीर्ष पर है। 44 वर्षों के बाद विश्व कपखेल रही कोरियाई टीम ने काफ़ी रक्षात्मक खेल दिखाया। गेंद ज़्यादातर ब्राज़ील के पैरों तले ही रही। काका, रोबिन्हो जैसे स्टार स्ट्राइकरों के बावजूद ब्राजील पहले हाफ में कोई गोल नहीं कर सका। मगर दूसरे हाफ में यही सुरक्षात्मक रवैया उत्तर कोरिया को भारी पड़ा। मैकॉन ने 55वें मिनट में दर्शनीय गोल पूरे स्टेडियम को मंत्रमुग्ध कर दिया। गोलपोस्ट के दाई ओर से गेंद गोलकीपर को छकाते हुए सीधे जाली में जा उलझी। इसके बाद ब्राजील के हमले तेज हो गए। 72वें मिनट में बढि़या मूव बना और इसे ब्लूमर इलानो ने भुनाते हुए सीधे गेंद गोलपोस्ट में पहुंचा दी।

कोरियाई गेंद को अपने पास रखने के लिए निरंतर संघर्ष करते रहे। हालांकि 88वें मिनट में जी युन नाम ने मिडफील्डरों के बढि़या पास का फायदा उठाते हुए गोल कर दिया। मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी। ब्राजील ने यह मैच 2-1 से अपने नाम कर लिया। यह बढ़त और भी ज्यादा हो सकती थी, अगर उत्तर कोरिया हद से ज्यादा डिफेंस नहीं खेलता तो। पहले हाफ में ब्राजील ने शुरू से गेंद पर कब्जा जमाए रखा, लेकिन टीम उस आक्रामक अंदाज में नहीं दिखी, जिसके लिए वह मशहूर है। एशिया के वेन रूनी के नाम से मशहूर उनके फारवर्ड जोंग ताय से ने ब्राजीली खेमे में सेंध तो लगाई, लेकिन गेंद पर काबू नहीं कर पाए। ब्राजील के इलानो ने आठवें मिनट में शानदार शॉट लगाया, जो गोलपोस्ट से काफी दूर रहा। इसके बाद रोबिन्हो, एम बास्टोस, मैकॉनो ने कई प्रयास किए जो सफल नहीं हो सके|


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