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Sunday, July 24, 2011

चीन में ट्रेन दुर्घटना, 32 मरे, 100 घायल



बीजिंग: चीन में एक बुलेट ट्रेन के दो डिब्बे पुल से गिर जाने से कम से कम 32 लोग मारे गए और 100 अन्य घायल हो गए। यह घटना पूर्वी झेजियांग प्रांत में हुई।

सरकारी टेलीविजन ने बताया कि 32 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि 100 अन्य को उपचार के लिए अस्पतालों में भेजा गया है।

अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने बताया कि यह ट्रेन स्थानीय समय के अनुसार रात साढ़े आठ बजे झेजियांग में शुआनग्यू कस्बे में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उन्होंने सरकारी संवाद एजेंसी शिन्हुआ को बताया कि तेज गति वाली ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरने के बाद पुल से नीचे गिर गए।

Thursday, June 30, 2011

सबसे लंबे पुल पर यातायात शुरू



बीजिंग: चीन ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी आर्थिक विकास का सुबूत पेश करते हुए पानी पर भी जीत हासिल कर ली है। चीन ने समुद्र पर 36.48 किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण किया है।

दुनिया के इस सबसे लंबे पुल पर गुरूवार से यातायात भी शुरू हो गया। इस पुल का नाम किंगडाओ जियाओझोउ है। इस पुल का निर्माण 2007 में शुरू हुआ था और इसको बनाने में 14.8 अरब युआन (2.3 अरब डॉलर) का खर्चा आया है। 8 रास्‍तों वाला यह पुल बीजिंग के शहरी इलाके को हुआंगडाओ जिले से जोड़ता है। इस पुल के निर्माण से पहले समुद्र पर बने सबसे लंबे पुल की लंबाई 36 किलोमीटर थी।

Thursday, April 14, 2011

चीन की मेज़बानी में ब्रिक्स सम्मेलन शुरू


सान्या : चीन के सान्या शहर में गुरुवार को ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका यानी ब्रिक्स देशों के तीसरे शिखर सम्मेलन की विधिवत शुरूआत हो गई। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं ने एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया।
कूटनीतिक सूत्रों ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया कि घोषणा पत्र में कहा गया है कि वैश्रि्वक अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय मसलों और विकास से जुडे़ पक्षों पर ब्रिक्स देशों में सहमति बनी।
इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ ने की और इसमें ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ, रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव, भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने हिस्सा लिया।
दुनिया के पांच उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के संगठन यानी ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय तंत्र में सुधार का आह्वान किया है।
सम्मेलन में हू ने कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए हमें न्यायोचित, समेकित और बेहतर प्रबंधन युक्त अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय तंत्र स्थापित करना चाहिए। इसके लिए इन तंत्रों में उभरते बाजारों ओर विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत है।
हू ने कहा कि हमें एक सामान और न्यायोचित अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार तंत्र को बढ़ाते हुए सभी तरह के संरक्षणवाद का विरोध करना चाहिए। हमें बहुपक्षीय व्यापार को मजबूती प्रदान करते हुए दोहा दौर की वार्ता के लक्ष्यों को जल्द से जल्द हासिल करना चाहिए।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक हू ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संकट ने वैश्विक आर्थिक असंतुलन को लेकर एक बार फिर से सोचने पर मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि अंत में कहा जा सकता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा असंतुलन उत्तर और दक्षिण के बीच विकास का असंतुलन है। दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी समस्या विकासशील देशों का अपर्याप्त विकास है।
उन्होंने नेताओं से विकासशील देशों के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार और उसका विकास होगा।

Tuesday, April 12, 2011

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चीन रवाना


नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी पांच दिन की चीन यात्रा पर आज रवाना हो गये। प्रधानमंत्री पांच विकासशील देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिये चीन गये हैं। ब्रिक्स के नाम से चर्चित इन देशों - ब्राजील,रूस,भारत,चीन और दक्षिण अफ़्रीका के नेता ईंधन और खाद्य सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दों पर समन्वित प्रयास की आवश्यकता पर बल देने के साथ साथ खाड़ी तथा उत्तरी अफ़्रीकी देशों में उभरी नई अनिश्चितताओं से उत्पन्न स्थिति पर भी चर्चा करेंगे।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यह विदेश यात्रा पांच दिन की है, जिसमें आखि‍री दो दिन वह कजाकिस्तान में होंगे। प्रस्थान के समय सिंह ने एक बयान में कहा, आर्थि‍क वृद्धि के परंपरागत स्रोत अब भी दबाव में हैं और इस बीच विश्व के विभिन्न हिस्सों में हाल की घटनाओं से अनिश्चितता उभरी है. सम्मेलन के विषयों के बारे में में विदेश मंत्रालय में सचिव आर्थि‍क संबंध मानबीर सिंह ने कल कहा था कि लीबिया एक ‘प्रमुख मुद्दा’ है क्योंकि यह सभी बिक्स देशों को प्रभावित करता है. शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है.

चीन के दक्षिणी तटवर्ती शहर सान्या में होने इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री सिंह की चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओं, रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव, ब्राजील के राष्ट्रपति दालिमा रोसेफ़ और दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा से मुलाकात करेंगे।

प्रधानमंत्री की इस यात्रा को भारत-चीन के संबंधों के निहितार्थ भी देखा जा रहा है। इससे पहले प्रधानमंत्री के साथ जाने वाले जम्मू-कश्मीर के पत्रकारों को चीनी दूतावास ने अलग से कोई वीज़ा

Thursday, March 31, 2011

गूगल संबद्ध कंपनियों पर धोखाधड़ी का आरोप



बीजिंग: अमेरिकी सर्च इंजिन गूगल और उसकी तीन संबद्ध कंपनियों पर चीन सरकार ने कर चोरी का आरोप लगाया है। अमेरिकी कंपनी ने हाल ही में चीन सरकार पर अपनी सेवा ब्लाक करने का आरोप लगाया था।

सरकारी मीडिया इकोनामिक डेली में आज चीनी कर अधिकारियों के हवाले से छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक गूगल से संबद्ध तीन कंपनियां गलत बिल और बही खाते में हेरफेर करती पाई गई हैं। साथ ही 4 करोड़ युआन [60.6 करोड़ अमेरिकी डालर] के बराबर कर अनियमितता का मामला भी सामने आया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक गूगल पहले से ही कर चोरी के मामले में जांच के दायरे में है और कर अधिकारियों ने कंपनियों से गलत काम बंद करने और कर के रूप में पैसा भुगतान करने को कहा है। गौरतलब है कि 10 दिन पहले ही गूगल ने चीन सरकार पर अपनी सेवाओं को 'ब्लाक' करने का आरोप लगाया था।

Tuesday, March 15, 2011

लीबिया: गद्दाफी ने भारत से मांगा समर्थन


नई दिल्‍ली : दुनिया भर से विरोध की मार झेल रहे लीबिया के तानाशाह शासक मुअम्मर गद्दाफ़ी ने अब भारत से मदद की गुहार लगाई है। अपनी इस मांग को मनवाने के लिये गद्दाफ़ी ने अपनी तेल कंपनियों में भारत को साझीदारी देने की पेशकश की है और बदले में भारत से राजनीतिक समर्थन मांगा है। गद्दाफी ने लीबिया की राजधानी त्रिपोली में भारत के राजदूत से मुलाकात में यह पेशकश की है।

भारत के अलावा, उन्‍होंने चीन और रूस के राजदूतों से भी मुलाकात की। गद्दाफी ने तीनों राजदूतों को कहा कि लीबिया में विद्रोह शुरू होने के बाद से पश्चिमी तेल कंपनियां भाग रही हैं। लीबिया में तेल का उत्‍पादन कम हो रहा है। ऐसे में इन कपंनियों की हिस्‍सेदारी भारत, चीन व रूस ले सकते हैं। बदले में वे लीबिया सरकार को समर्थन दें।

ग़ौरतलब है कि अफ्रीकी देशों के तेल संसाधनों में हिस्‍सेदारी के लिए भारत को लगातार चीन से प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है। पर ज्‍यादा निवेश की मजबूरी के चलते वह इस मामले में पिछड़ रहा है।

लीबिया में भारत के राजदूत एम. मनिमेकलाई और गद्दाफी की मुलाकात की दिल्‍ली में सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है। पर सूत्रों ने बताया कि लीबियाई नेता ने भारतीय राजदूत को धन्‍यवाद देने के लिए बुलाया था। यह धन्‍यवाद अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से लीबिया पर आयद प्रतिबंध का विरोध करने के लिए दिया गया।

भारत अब तक लीबिया पर आर्थिक प्रतिबंध के खिलाफ रहा है। भारत के मुताबिक़, जनता को मुश्किल में डालने वाला कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। अगर किसी देश के शासक का विरोध किया जा रहा हो तो इसकी सज़ा उस देश की जनता को नहीं दी जानी चाहिये। भारत लीबिया को नो फ्लाई जोन घोषित करने या उसके खिलाफ सैन्‍य ताकत के इस्‍तेमाल का भी विरोध करता रहा है। जबकि ब्रिटेन और फ्रांस लीबिया को नो फ्लाई जोन बनाने की वकालत करते रहे हैं।

Tuesday, March 8, 2011

1 करोड़ 23 लाख रुपये में नीलाम हुई अगरबत्ती


बीजिंग : ये सुनकर शायद दुनिया भर के लोग भौचक्के रह जाएंगे। लेकिन ये हक़ीकत है कि चीन में एक अगरबत्ती की बोली भारतीय मुद्रा के हिसाब से 1 करोड़ से ऊपर की क़ीमत में लगाई गई। चीन में एक प्राचीन शासक के मक़बरे पर पहली अगरबत्ती जलाने के लिये कई कंपनियों समेत हज़ारों लोगों में होड़ मची हुई थी। जिसका फ़ैसला बोली के माध्यम से होना था।

चीन में क़रीब 5,000 साल शासन करने वाले एक शासक के मकबरे पर पहली अगरबत्ती जलाने के अवसर की नीलामी 11.8 लाख युआन (करीब 180,000 डॉलर या एक करोड़ तेइस लाख भारतीय रुपए) में हुई है। हेनान प्रांत के हुआईयांग में फू जी के मकबरे पर प्रार्थना के लिए रविवार को हजारों लोग इकट्ठे हुए थे लेकिन उन हज़ारों लोगों में से केवल एक ही भाग्यशाली शख्स को परम्परागत रूप से पहली अगरबत्ती लगाने का अवसर मिला।

फू जी का जन्म 5,000 साल पहले हुआ था और वह प्राचीन चीन के तीन शासकों या ईश्वर समान शासकों में से एक माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने मछली पकड़ने व शिकार की कला का आविष्कार किया था। उन्हें स्वर्ग, झील, अग्नि, आंधी, हवा, पानी, पर्वत और पृथ्वी से जोड़कर देखा जाता है।

समाचार पत्र ‘शंघाई डेली’ के मुताबिक हेनान झिंगयिन रियल इस्टेट कम्पनी, हेनान यक्जिंताई इन्वेस्टमेंट और गारंटी कम्पनी ने 11.8 लाख युआन की राशि चुकाकर यह विशेष अगरबत्ती खरीदी थी।

जबकि पूजा समारोह के लिए पवित्र वाइन से भरे पहले कप की बिक्री 80,000 युआन में हुई। हेबेई प्रांत की शराब निर्माता कम्पनी लुझोउलाओजियाओ ने इसे खरीदा।

Friday, March 4, 2011

कर्ज़दार देशों की सूची में भारत को 5वां स्थान


नई दिल्ली : आर्थिक क्षेत्र में दुनिया भर में अपना लोहा मनवा चुके भारत को बडा धक्का लगा है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत को दुनिया भर के देशों की सूची में पांचवा स्थान प्राप्त हुआ। लेकिन ये स्थान प्राप्त होना, कोई ख़ुशी का मौक़ा नहीं है बल्कि एक गहरी सोच और मंथन का विषय है। लगातार तेजी से आर्थिक तरक्की कर रहे भारत को, आर्थिक मोर्चे पर ही बड़ा धक्का लग गया है।

दरअसल अब भारत विश्व का पांचवा सबसे बड़ा कर्जदार देश बन गया है। सितंबर 2010 को समाप्त तिमाही के दौरान भारत के उपर 1,332,195 करोड़ का बाहरी कर्ज रहा है। इससे पहले मार्च 2010 को समाप्त तिमाही में बाहरी कर्ज 1,184,998 करोड़ रुपये रहा था।

इस बात का खुलासा वर्ल्ड बैंक के ‘ग्लोबल डेवेलपमेंट फाइनैंस 2010’ रिपोर्ट में हुआ है। इस लिस्ट में दुनियाभर के 20 सबसे कर्जदार देशों के नाम का जिक्र है। जिसमें भारत पांचवे पायदान पर रहा है।

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोक सभा में पूछे गए एक प्रश्न के जबाव में यह जानकारी संसद को दी। उन्होंने यह भी बताया कि इस लिस्ट में पहले नंबर पर रूस का नाम है। जबकी दूसरे नंबर पर चीन, तीसरे पायदान पर तुर्की और चौथे स्थान पर ब्राजील का नाम है।

ग़ौरतलब है कि अगर केंद्रीय सरकार, स्विस बैंकों में जमा काले धन को भारत वापस लाने में सफ़ल हो पाती है तो भारत के सर से क़र्ज़ का एक बडा बोझ काफ़ी हद तक हल्का हो सकेगा। एक अनुमान के मुताबिक़, स्विस बैंकों में जमा भारत के 87 लाख करोड रूपयों में से कितना पैसा इन्कम टैक्स के ज़रिये सरकारी खातों में जाएगा, इस बात का तो अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता। अगर काला धन वापस आ जाता है तो भारत, अपने ऊपर चढ़ा क़र्ज़ उतारकर दूसरे देशों को क़र्ज़ देने की स्थिति में आ जाएगा।

Sunday, February 6, 2011

करमापा के मठ से दस्तावेज,चीनी सिम बरामद




हिमाचलप्रदेश: बौद्ध धर्म गुरु 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजी के चीनी कनेक्शन के राज़ धीरे धीरे सामने आ रहे हैं। दोरजी के ट्रस्ट कार्यालय से करोड़ों की बेनामी विदेशी मुद्रा बरामद होने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय ने उनके मठ से बहुत सारे चीनी मोबाइल सिम कार्ड, कम्प्यूटर और जमीन की खरीदी-बिक्री संबंधी दस्तावेज बरामद किए हैं।

पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने दोरजी के ट्रस्ट कार्यालय से कई सारे चीनी मोबाइल सिम कार्ड, कम्प्यूटर एवं अन्य सामग्री बरामद की है। इनमें कम्प्यूटर से कई सारी जानकारी हटा दी गई थी, जिसकी जाँच अब पुलिस कर रही है। हालाँकि यह जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, कि मोबाइल सिम कार्ड्स में किन किन लोगों के नंबर हैं। लेकिन कुछ दस्तावेजों से साफ हुआ है कि करमापा का चीनी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क रहा है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों करमापा के मठ से करोड़ों की विदेशी मुद्रा बरामद होने के बाद करमापा का चीनी जासूस होने पर संदेह किया गया था। जिसके चलते पुलिस ने इस ट्रस्ट के सारे बैंक खाते सील कर दिए गए थे।

Monday, January 31, 2011

चीन ने कहा,जासूस नहीं है करमापा



बीजिंग: चीन ने तिब्बतियों के धर्म गुरु करमापा का चीनी जासूस होने से इंकार किया है। पिछले दिनों करमापा के मठ से करोड़ों की विदेशी मुद्रा बरामद होने के बाद उसके चीनी जासूस होने पर संदेह किया गया था। चीन का कहना है कि करमापा को चीनी जासूस कहना यह जताता है कि भारत को अब भी चीन पर पूर्ण रुप से भरोसा नहीं है।

करमापा के ऑफिस पर छापे को लेकर भारतीय मीडिया में आई खबरों पर चीन का कहना है कि , '17वें करमापा पहले ऐसे जीवित बुद्ध हैं जिन्हें चीन की केंद्रीय सरकार ने 1951 में तिब्बत की शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद अपनी पुष्टि और स्वीकृति दी थी।' इतना ही नहीं करमापा को सर्वोच्च तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा और चीनी सरकार का समर्थन भी हासिल है।

करमापा का वास्तविक नाम उग्यान त्रिंगले डोरजी है और वह जनवरी 2000 में चौदह वर्ष की उम्र में चीन से भाग कर आए थे। तभी से वह धर्मशाला स्थित मठ में रह रहे हैं। उनकी संदिग्ध गतिविधियों पर पहले से ही निगाह रखी जा रही थी। गौरतलब है कि उनके पास से साढ़े छह करोड़ की मुद्रा मिलने के बाद से उनसे पूछताछ की जा रही है

Saturday, January 29, 2011

करमापा का सच और हमारी विफ़लता

न्यूज़लाईन विशेष :बौद्ध गुरु करमापा उग्येन दोरजे के मठ से करोड़ों रूपये की विदेशी मुद्रा आख़िर कहां से और कैसे आई? क्या करमापा चीनी जासूस हैं? ये कुछ सवाल ऎसे हैं जिनका जवाब देशहित में नितांत आवश्यक है। दरअसल करमापा पर चीनी जासूस होने का आरोप यूं ही नहीं लग रहा है। करमापा को चीन का बेहद करीबी माना जाता है।

आश्रम में रखी करोड़ों की विदेशी मुद्रा का खुलासा भी तब हुआ जब हिमाचल पुलिस ने ऊना के रहने वाले दो लोगों को एक करोड़ रुपए के साथ गिरफ्तार किया। उनसे पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये पैसे लेकर वो करमापा दोरजे के आश्रम जा रहे थे। जब पुलिस ने तफ्तीश आगे बढ़ाई तो पता चला कि आश्रम से हवाला कारोबार चल रहा है जिसका सीधा संबंध दिल्ली के मजनूं के टीला इलाके से है।

बौद्ध गुरु करमापा उग्येन दोरजे पहले भी सवालों के घेरे में रहे हैं। जब करमापा उग्येन और उनके गुरु भाई रिम्पोछे 2000 में चीन से भागकर भारत पहुंचे थे तो उन पर चीन का जासूस होने का शक किया गया था। सरकार ने रिम्पोछे को तो सात दिन में भारत छोड़ने का भी आदेश दे दिया था। लेकिन करमापा को हिमाचल के धर्मशाला में शरण दी गई थी। तब से लेकर आज तक कई बार उन पर चीन के लिये जासूसी करने की बात सामने आती रही है। लेकिन उच्च स्तर से कभी भी इसकी ख़ुफ़िया जांच नहीं कराई गई।

करमापा उग्येन को दलाई लामा और पंचेन लामा के बाद तीसरे नंबर का तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु माना जाता है। अपनी नियुक्ति के बाद से ही करमापा विवादित रहे हैं। हालांकि जांच एजंसियां करमापा से पूछताछ में लगी हैं लेकिन अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका है। करमापा का सच जो भी हो, लेकिन एक बार पूरी तरह साफ़ हो गई है कि हम एक बार फ़िर आंतरिक सुरक्षा के मुहाने पर विफ़ल हुए हैं।
ख़ालिद हसन
मुख्य संपादक, न्यूज़लाईन

Friday, January 21, 2011

ड्रैगन की समझदारी और हमारी लाचारी

ख़ालिद हसन, (न्यूज़लाईन विशेष)
ड्रैगन एक बार फ़िर आग उगल रहा है, और वो भी विश्व की महाशक्ति अमेरिका के सामने। और हम लाचर हैं, सरकार और विपक्ष में तिरंगा फ़हराने को लेकर तनातनी चल रही है। चीन के राष्ट्रपति हु जिंताओ अपनी संप्रभुता के मुद्दे पर अमेरिका को उसकी धरती पर धमका रहे हैं, और हमारी सरकार और विपक्ष देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता पर एक दूसरे की खिंचाई कर रहे हैं।

चीन के राष्ट्रपति हु जिंताओ इस समय अमेरिका के चार दिन के राजकीय दौरे पर हैं, खबर है कि हु ने ओबामा को चीन के तथाकथित अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप ना करने की हिदायत दी है, और वो भी तिब्बत और ताईवान के मुद्दे पर। दरअसल कल ही अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चीनी राष्ट्र्पति हु जिंताओ को तिब्बत के मसले पर दलाई लामा के प्रतिनिधियों से वार्ता करने का सुझाव दिया था, लेकिन आज ड्रैगन ने साफ़ कर दिया कि यह उसका अंदरूनी मसला है, और वह (अमेरिका) तिब्बत से दूर रहे नहीं तो इसका असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। इससे चीन की बेहतर कूट्नीतिक सक्षमता का पता चलता है।

चीनी राष्ट्रपति का यह बयान हमारे लिये सीख देने वाला है और वह भी ऎसे वक़्त में जब हम गणतंत्र दिवस पर अपने ही देश में तिरंगा फ़हराने को लेकर विवाद में हैं। ज़्यादा वक़्त नहीं बीता है जब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत की यात्रा की थी, और हम आतंकवाद से लेकर कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सिर्फ़ अमेरिका के सामने गिड़गिड़ाते नज़र आये। हद तो तब हो गई जब हमारे मेहमान बन कर पधारे ओबामा ने पाकिस्तान की तारीफ़ों के पुल बांधे।

अब बात हमारे और चीन के संबंधों की, अमेरिका को उसकी धरती पर धमकाने वाला चीन कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के लिये अलग से नत्थी वीज़ा दे रहा है और हम चुप बैठे है। यही नहीं चीन अरुणाचल प्रदेश पर भी अपना दावा कर रहा है। ये अलग बात है कि चीन एशियाई महाशक्ति है, लेकिन हम यह क्यूं भूल जाते हैं कि हम भी किसी से कम नहीं। आखिरकार क्यूं हम कूटनीतिक रूप से अक्षम है?

तिब्बत-ताईवान पर चीन ने अमेरिका को दिखाई ’औकात’

वाशिगंटन।अमेरिकी दौरे पर गये चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने कहा है कि, वह ताइवान और तिब्बत के मामले पर ज्यादा जोर न दे। हू ने कहा कि उभरती एशियाई शक्ति को सहयोग की जरूरत है, अमेरिका को चीन का सहयोग करना चाहिए।

गौरतलब है कि चीनी राष्ट्रपति इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं। कैपिटल हिल में सीनियर अमेरिकी सांसदों के साथ चीनी राष्ट्रपति ने विभिन्न महत्तवपूर्ण मसलों पर बातचीत की। बातचीत में आर्थिक और मानवाधिकार का मामला भी उठाया गया। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित लियु श्याबाओ को जेल की सजा का मुद्दा भी शामिल था। हू ने एक दूसरे के सम्मान का अनुरोध किया और कहा कि चीनी और अमेरिकी संबंध ऐसे नहीं हैं, जिनमें एक को लाभ और दूसरे को हानि हो।

लेकिन ताइवान और तिब्बत के मसले पर चीनी राष्ट्रपति ने अमेरिका को चेतावने भरे लहज़े में दो टूक कहा कि यह चीन की संप्रभुता और भूभागीय एकता से जुड़े मुद्दे हैं, और इससे चीन के महत्वपूर्ण हित जुड़े हुए हैं।

गौरतलब है कि ताइवान एक स्वशासित द्वीप है। इसकी स्थापना चीन के पराजित राष्ट्रवादियों ने की थी। वहीं, तिब्बत बौद्धों का एक बड़ा भूभाग है जहां चीन ने 1950 में अपने सैनिक भेजे थे। चीन ताइवान और तिब्बत को अपना अभिन्न अंग मानता है। बहरहाल, चीनी राष्ट्रपति ने अमेरिकी दौरे पर यह पूरी तरह साफ़ कर दिया है कि वह किसी भी अंतर्राष्ट्रीय दबाव में झुकने वाला नहीं है।

Tuesday, January 18, 2011

चीन ने किया वर्ल्ड बैंक को भी पीछे...




पिछले कुछ समय से चीन ने काफी तेजी से आर्थिक तरक्की की है। इतना ही नहीं अब कर्ज देने के मामले में चीन ने वर्ल्ड बैंक को भी पछाड़ कर एक नई पहचान बनाई है।

खबर के मुताबिक चीन के विकास बैंक और आयात-निर्यात बैंक ने पिछले दो सालों में अलग अलग सरकारों और निजी कंपनियों को 110 अरब डॉलर का कर्ज दिया है। यह विश्व बैंक के ऋण वादों से 10 फीसदी ज्यादा है। विश्व बैंक ने वित्तीय संकट के दौरान वर्ष 2008 से 2010 के बीच सौ अरब डॉलर के ऋण मंजूर किए हैं। इसी दौरान चीन ने वेनेजुएला, रूस और ब्राजील को तेल सौदों के लिए भारी कर्ज दिया जो चीन की लगातार बढ़ती आर्थिक का सबसे बड़ा सबूत है।

इन कर्जों के जरिए चीन विकासशील देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही चीन पश्चिम देशों को निर्यात पर भी अपनी निर्भरता कम करता नजर आ रहा है।

Thursday, January 6, 2011

अब चीनी मोबाइल कंपनी 'जी’फाइव देगी नोकिया को टक्कर


भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले मोबाइल हैंडसेट नोकिया को चीन की कंपनी जी’फाइव जबर्दस्त टक्कर दे रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक ’जी’फाइव इंटरनेशनल भारत में मोबाइल फोन बेचने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। कंपनी इस समय अपने डीलर नेटवर्क और नए-नए मॉडलों के बूते बाज़ार में छाई हुई है, और वह उसके लिए विज्ञापनों का सहारा नहीं ले रही है। कंपनी अपने सस्ते हैंडसेट बेचकर अपनी बिक्री बढ़ा रही है। इतना ही नही कंपनी ने भारत में 500 से ज्यादा सर्विस सेंटर खोल दिए हैं, ताकि ग्राहकों को ज्यादा दूर न जाना पड़े। इसके अलावा कंपनी 500 दिनों की वारंटी देती है, जो कोई और कंपनी नहीं देती है।

जी’फाइव के नैशनल प्रेसीडेंट जेफ चांग के मुताबिक नोकिया को टक्कर देने के लिए उनकी कंपनी कम कीमत और बेहतर क्वालिटी का सहारा ले रही है। उनका कहना है कि हम कम पैसे में ज्यादा वैल्यू दे रहे हैं। कंपनी आने वाले समय में उच्च टेक्नोलॉजी वाले हाई एंड प्रॉडक्ट बाज़ार में उतारेगी जिससे वह नए ग्राहक बना सकेगी। इसके तहत ही कंपनी स्मार्टफोन और 3जी फोन भी पेश करेगी। इस समय जी’फाइव 1,400 रुपए से लेकर 7,000 रुपए तक के हैंडसेट बेच रही है लेकिन वह और सस्ते यानी 1,000 रुपए तक के फोन भी बेचेगी। इसके अलावा वह 10,000 रुपए के भी सेट बाज़ार में उतारेगी।

चीन में भारी हिमपात, हजारों लोग बेघर


बीजिंग: भारी हिमपात की वजह से चीन में 200 से ज्यादा मकानों के ध्वस्त होने की खबर है। इतना ही नहीं इस हिमपात के कारण 22,800 से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ कर किसी सुरक्षित जगह पर शरण लेनी पड़ी।

आपातकालीन सेवा विभाग के प्रवक्ता का कहना है कि इन मकानों की छत हिमपात के कारण जम गयी थी। उसके बाद बर्फ का बोझ नहीं सह पाने की वजह से गिर गई। माना जा रहा है कि हिमपात की वजह से इस प्रांत में चार करोड़ की वित्तीय क्षति हुई है और 79,100 हेक्टेयर में लगी फसल भी बर्बाद हो गई।

हालांकि चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने 1,455 मकानों के ध्वस्त होने की बात कही है। एजेंसी के अनुसार सड़कों पर जमी बर्फ की चादर को हटाने के काम में आई तेजी की वजह से 30 घंटों से बंद राजमार्ग खुलने लगे हैं और घंटों से फंसे लोग भी निकलने लगे हैं।

Thursday, November 25, 2010

चीन ने की 60,000 पॉर्न वेबसाइट बंद


बीजिंग: चीन में कड़ी कार्रवाई के तहत 60,000 से अधिक अश्लील वेबसाइटों को बंद कर दिया गया है। दिसंबर 2009 में अभियान शुरू किए जाने के बाद से करीब 17.85 लाख वेबसाइटों को जाँचा जा चुका है और ऑनलाइन अश्लीलता के 2,197 मामलों से निपटा गया है।

चीन ने 60 हजार से भी ज्यादा पोर्न साइट्स बंद कर दी हैं। अश्लील सामग्री से संबंधित इन साइट्स के खिलाफ सरकार ने दिसंबर 2009 में कार्रवाई करनी शुरू की थी। पोनरेग्राफिक व अवैध प्रकाशन पर नजर रखने वाले राष्ट्रीय कार्यालय का कहना है कि जब से यह अभियान शुरू हुआ है हमने 17 लाख वेबसाइट्स चेक की हैं। इस दौरान ऑनलाइन पोनरेग्राफी के 2200 मामले दर्ज किए गए। साथ ही हमें लोगों से पोर्न संबंधी 1,60,000 गुप्त सूचनाएं मिलीं।

कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक गुप्त सूचनाएं देने वाले 516 मुखबिरों को 79 हजार डॉलर दिये गये है। इंटरनेट इस्तेमाल करने में चीन दुनिया में सबसे आगे है। यहां करीब 42 करोड़ लोग नेट की सर्फिग करते हैं, जबकि देश में मोबाइल फोन के जरिए इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या करीब 28 करोड़ है|

Monday, November 15, 2010

डीजल की कमी से रुका दाह संस्कार


बीजिंग: चीन के चोंगक्विंग शहर में डीजल न होने के कारण एक शवदाह गृह की भट्ठी के नहीं जल पाने की वजह से दाह संस्कार रुक गया है। लोंगजिंग शवदाह गृह के प्रबंधक फैंग एई ने कहा कि रविवार सुबह शवदाह गृह का डीजल समाप्त हो जाने से ऐसा हुआ।

'चाइना डेली' के मुताबिक शवदाह गृह के बाहर 10 शव दाहकर्म के इंतजार में रखे हुए हैं। रविवार को पूरे शहर के करीब 20 डीजल स्टेशनों पर जाने के बावजूद शवदाह गृह के कर्मचारियों को डीजल नहीं मिल पाया। इसलिये यह दाह संस्कार नहीं हो पाया है।

Saturday, November 13, 2010

एशियाड 2010: भारत के ओमकार पहुंचे फाइनल में



चीन में चल रहे 16वें एशियाई खेलों में भारतीय महिला निशानेबाजों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब पुरूषों की टीम से उम्मीद जगाई जा रही है।

महिला निशानेबाजों ने 10 मीटर की एयर राइफल स्पर्धा में निराश किया। महिला निशानेबाजों में कोई भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी और 10 मीटर की एयर राइफल की टीम स्पर्धा में पदक उम्मीदें खत्म हो गई। स्टार निशानेबाज तेजस्विनी सावंत से बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन वह 390 अंक ही हासिल कर सकीं।

वहीं दूसरी ओर पुरूषों टीम की 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में पहुंच गई। भारत के ओमकार सिंह ने 50 मीटर की पिस्टल स्पर्धा में 557 का स्कोर हासिल करके पांचवां स्थान प्राप्त किया और फाइनल में जगह बनाई। खेलो के पहले दिन मेजबान चीन ने एक स्वर्ण जीतकर पदकों की शुरूआत की। साथ ही ईरान ने रजत और उज्बेकिस्तान ने कांस्य से अपना खाता खोला।


Friday, November 12, 2010

पर्ल नदी के द्वीप पर होगा एशियाई खेलों का भव्य उद्घाटन


16वें एशियाई खेलों का भव्य उद्घाटन आज चीन के दक्षिण में बसे ग्‍वांग्‍झू शहर में होगा। इस कार्यक्रम को अनूठा बनाने के लिए आयोजकों ने उद्घाटन कार्यक्रम को किसी स्‍टेडियम में कराने के बजाय शहर से होकर बहने वाली पर्ल नदी के द्वीप पर कराने की तैयारी की है।

उद्घाटन समारोह के दौरान पर्ल नदी पर नौ किलोमीटर लंबी नावों की परेड का प्रदर्शन किया जाएगा। 45 मिनट तक चलने वाली इस परेड में आधुनिक चीन की खूबसूरती और ग्‍वांगझू शहर की कैंटोनीज सभ्‍यता की झलक देखने को मिलेगी।

एशियाई खेलों की आयोजन समिति के अधिकारियों के मुताबिक परेड के दौरान बेहद शानदार तरीके से सजी 46 नावों पर इन खेलों में भाग ले रहे खिलाड़ी और अधिकारी भी सवार होंगे। ये नावें बेरटान से होकर हेक्सिन्सा स्क्वायर पहुंचेंगी और इस दौरान ये नदी पर बने छह पुलों के नीचे से होकर गुजरेंगी। इस दौरान नाविक लाल और सफेद नौका, लालटेन, सफेद रुई, शांति के प्रतीक कबूतर और ग्वांग्झू खेलों के प्रतीक चिह्न की एलईडी छवि प्रदर्शित करेंगे।

27 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में 42 खेलों को शामिल किया गया है। इन खेलों में एशिया के 45 देशों से 14 हजार से अधिक एथलीट और अधिकारी हिस्‍सा ले रहे हैं।

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