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Wednesday, March 23, 2011

गद्दाफ़ी ने भरी हुंकार, कहा ’जीत हमारी ही होगी’


त्रिपोली : गठबंधन सेनाओं के हवाई हमलों से जूझ रहे लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी ने देश में हमले शुरू होने के बाद से पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर संघर्ष में जीत का दावा किया। साथ ही उन्होंने कहा कि वह अपने देश में शहीद के रूप में मरना पसंद करेंगे। लीबियाई टेलिविजन ने गद्दाफी के इस भाषण का सीधा प्रसारण किया। पिछले एक सप्ताह में गद्दाफी का यह पहला सार्वजनिक संबोधन था। टेलिविजन चैनल ने गद्दाफी को बालकनी से अपने समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते दिखाया।

लीबिया में गठबंधन सेना की कार्रवाई शुरू होने के बाद तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी पहली बार सरकारी टेलीविजन पर नजर आए। गद्दाफी ने एक बार फिर हुंकार भरते हुए कहा कि आखिरकार जीत उनकी ही होगी। गद्दाफी ने राजधानी त्रिपोली के पास अपनी छावनी में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ये बाते कहीं।

उन्होंने गठबंधन सेना की ओर से लीबियाई सेना पर पश्चिमी देशों की सेनाओं की ओर से किए जाने वाले हमलों को अन्यायपूर्ण करार देते हुए उसकी निंदा की और कहा, ' कम समय तक चलने वाले संघर्ष में हम उन्हें पराजित कर देंगे और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में भी हम उन्हें पराजित कर देंगे। '

गद्दाफी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिमी सेना से हो रही लड़ाई में जीत हमारी ही होगी। उन्होंने कहा कि वह हवाई हमले से नहीं डरते। हम सरेंडर नहीं करेंगे। इस ऐतिहासिक लड़ाई में हम ही जीतेंगे। उन्होंने सभी इस्लामी देशों से इस जंग में हिस्सा लेने की बात कही। उन्होंने पश्चिमी देशों की कड़ी आलोचना भी की।

उल्लेखनीय है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि गद्दाफी को हटाए जाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि हवाई हमले आम नागरिकों को सुरक्षा के लिए किए जा रहे हैं।

Monday, March 21, 2011

पश्चिमी देशों के हमले जारी, गद्दाफी का परिसर तबाह


त्रिपोली : लीबिया पर पश्चिमी देशों के सुरक्षाबलों द्वारा किये जा रहे मिसाइल हमलों में राजधानी त्रिपोली में लीबियाई शासक कर्नल मुअम्मर गद्दाफी का एक परिसर नष्ट हो गया। गठबंधन सेना के अधिकारियों का कहना है कि यह इमारत कमांड सेंटर थी। वेबसाइट 'डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट बीबीसी डॉट को डॉट यूके' के अनुसार पत्रकारों को इस तीन या चार मंजिला इमारत का मलबा दिखाया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस हमले में कोई हताहत हुआ या नहीं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा लीबिया को उड़ान वर्जित क्षेत्र घोषित किए जाने से सम्बद्ध प्रस्ताव पारित होने के बाद से अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने उस पर हमले शुरू कर दिए।

ग़ौरतलब है कि कर्नल गद्दाफी के खिलाफ पिछले महीने भर से लीबिया में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि लीबियाई सशस्त्रबलों और हवाई सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए इन हमलों का निशाना कर्नल गद्दाफी नहीं थे।

रविवार रात त्रिपोली में विमान भेदी तोपों से गोलाबारी की गई और कई धमाके सुने गए। बाब अल-अजिजिया में कर्नल गद्दाफी के सैन्य ठिकाने और परिसर से धुएं के बादल उठते देखे गए। इससे पहले अमेरिकी रक्षा विभाग में नौसेना के वाइस एडमिरल विलियम गोर्टनी ने बताया कि शनिवार से शुरू हुई इस सैन्य कार्रवाई से लीबिया की हवाई ताकत को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि विद्रोहियों की ओर बढ़ रही जमीनी फौजों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि कर्नल गद्दाफी या उनके आवास को निशाना नहीं बनाया गया।

अमेरिकी अधिकारियों ने लीबिया सरकार द्वारा किए गए संघर्ष विराम के दावे पर संदेह व्यक्त किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टॉम डोनीलोन ने कहा, "संघर्ष विराम या तो लागू ही नहीं किया गया या फिर उसका तत्काल उल्लंघन कर दिया गया।"

उधर, अमेरिकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा है कि अमेरिका लीबिया पर इस कार्रवाई का हिस्सा बना रहेगा, लेकिन वह ज्यादा प्रमुख भूमिका नहीं निभाएगा।

इस बीच लीबिया को उड़ान वर्जित क्षेत्र घोषित करने के लिए फौजों का जमावड़ा लगना जारी है। कतर इसके लिए चार विमान भेजने वाला है। इसके साथ ही लीबिया पर कार्रवाई करने वाला कतर पहला अरब देश बन जाएगा।

उधर, फ्रांस का विमान वाहक पोता चार्ल्स द गाल भी भूमध्यसागर के तोलॉन बंदरगाह के लिए रवाना हो चुका है। डेनमार्क और नॉर्वे भी अपने विमान भेज रहे हैं। स्पेन ने तीन लड़ाकू विमान और एक विमान में ईंधन भरनेवाला विमान लीबिया रवाना किया है। इटली के लड़ाकू विमान भी तैनाती के लिए तैयार हैं। कनाडा ने सिसली में छह विमान लगा दिए हैं और उन्हें कार्रवाई के लिए तैयार किया जा रहा है।

इस बीच लीबिया को उड़ान वर्जित क्षेत्र घोषित किए जाने का समर्थन करने वाले अमर मूसा ने लीबिया पर हो रही बमबारी का विरोध किया है। उल्लेखनीय है कि लीबिया पर गत शनिवार को फ्रांसीसी हवाई हमलों के साथ ही फौजी कार्रवाई शुरू हो गई। अब तक अमेरिकी और ब्रिटिश युद्ध पोतों से 100 से ज्यादा मिसाइलें दागी जा चुकी हैं।

Sunday, March 20, 2011

लीबिया पर अंतरराष्ट्रीय फौज का हमला, 48 मरे


सत्ता पर क़ाबिज़ रहने के लिये अपनी ज़िद पर अड़े लीबिया के राष्ट्रपति गद्दाफ़ी पर अंतरराष्ट्रीय फौज ने कार्रवाई की शुरूआत कर दी है। लीबिया की वायु सीमा को भेद कर ब्रिटेन की मिसाइलें भी गद्दाफी की रियासत पर टूट पड़ी हैं। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने रॉकेट दागे हैं। लीबिया टीवी के मुताबिक़ इन हमलों में 48 लोगों की जान गई है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पास किए गए प्रस्ताव को लागू करने के लिए लीबिया में कार्रवाई की शुरूआत कर दी गई है। लेकिन इस लड़ाई में आम जनता को शिकार होना पड़ रहा है। अमेरिकी सैनिक कार्रवाई के साथ ब्रिटिश पनडुब्बियों से छूटे टॉमहॉक मिसाइलों ने लीबिया के ठिकानों को निशाना बनाया है। अब तक 100 से ज्यादा मिसाइलें दागी जा चुकी हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लीबिया के खिलाफ 'सीमित कार्रवाई' करने का एलान किया है. चीन ने लीबिया पर भारी हमले पर अफसोस व्यक्त किया है और कहा है कि चीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हिंसा के इस्तेमाल के खिलाफ है. जापान ने लीबिया के खिलाफ कार्रवाई का स्वागत किया है तो अफ्रीकी यूनियन ने हमला तुरंत रोकने को कहा है.

एक अमेरिकी फौजी अधिकारी के मुताबिक जहाजों और पनडुब्बियों से एक साथ किए जा रहे हमले में तटवर्ती इलाके के कम से कम 20 ठिकानों को निशाना बनाया गया है। लीबियाई शासक कर्नल गद्दाफी को विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई करने से रोकने की कोशिश की जा रही है। अमेरिका के इनकार करने के बाद ब्रिटेन के साथ मिल कर फ्रांस इस हमले का नेतृत्व कर रहा है। शनिवार को हमलों की शुरुआत फ्रांस के विमानों ने ही की।

लंदन में प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा, "आज की रात ब्रिटिश सेना लीबिया पर कार्रवाई कर रही है. ये लोग अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा है जो संयुक्त राष्ट्र की इच्छा का पालन करने और लीबिया के लोगों को बचाने के लिए एक साथ आए हैं." कैमरन ने ये भी कहा, "कर्नल गद्दाफी की अपने ही लोगों के खिलाफ क्रूरता हम सबने देखी है और वो जिस युद्धविराम की बात कर रहे थे वो कभी लागू ही नहीं हुआ बल्कि लीबियाई नागरिकों के खिलाफ और ज्यादा क्रूरता दिखाई गई."

ब्रिटिश सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल जॉन लॉरीमेर ने कहा कि मिसाइलों से हमला शुरुआती कदम है, "ब्रिटेन और सहयोगी ताकतें तब तक कार्रवाई करती रहेंगी जब तक कर्नल गद्दाफी और उनकी सेना को ये समझ नहीं आ जाता कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उन्हें अपने ही लोगों को मारते देखता नहीं रह सकता."

ब्रिटेन ने हमले में हिस्सा लेने के लिए अपने टॉरनाडो और टायफून लड़ाकू विमानों का बेड़ा लीबिया के पास तैनात कर दिया है. लीबिया पर सैनिक कार्रवाई को ऑपरेशन एल्लामी नाम दिया गया है. साइप्रस के एक्रोतिरी में ब्रिटेन का एक वायुसेना बेस है, हमले के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. भूमध्यसागर में ब्रिटेन के दो लड़ाकू जहाज एचएमएस कंबरलैंड और एचएमएस वेस्टमिनिस्टर पहले से ही मौजूद हैं. 2003 के इराक हमले के साए से बाहर निकलने के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने लीबिया पर हमले को जरूरी, उचित और कानूनी कहा. कैमरन ने ये भी कहा, "ये कानूनी रूप से सही है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अरब लीग और कई दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसका समर्थन किया है."

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गुरुवार को प्रस्ताव पास कर लीबिया में नागरिकों को बचाने और युद्धविराम लागू कराने के लिए हर तरह के उपाय करने की अनुमति दे दी. पिछले हफ्ते अरब लीग के विदेश मंत्रियों ने पश्चिमी देशों से लीबिया पर नो फ्लाई जोन लागू करने की मांग की. इसके जवाब में पश्चिमी देशों ने अरब जगत से सैनिक कार्रवाई के लिए समर्थन देने को कहा. इसके बाद शनिवार को पेरिस में सैनिक कार्रवाई पर विचार करने के लिए बुलाई गई बैठक में जॉर्डन, मोरक्को, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा ने हिस्सा लिया. कतर और बेल्जियम, नीदरलैंड्स, डेनमार्क, नॉर्वे समेत कई यूरोपीय देशों ने लीबिया पर हमले में शामिल होने की बात कही है।

Wednesday, February 16, 2011

ईरान में और विरोध प्रदर्शन चाहते हैं ओबामा


वाशिंगटन/तेहरान : मिस्र के बाद ईरान में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के ऊपर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बयान ने शायद इस मुद्दे को हवा दी है। ईरान के प्रेस टीवी द्वारा वाशिंगटन से जारी एक रपट के मुताबिक़ ओबामा, ईरान में और विरोध प्रदर्शन देखना चाहते हैं।

ओबामा ने व्हाइट हाउस में मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, "हमारी आशा एवं आकांक्षा यह है कि हम लगातार यह देखना चाहते हैं कि ईरान की जनता के पास अधिक आजादी और अपेक्षाकृत अधिक प्रतिनिधित्व वाली सरकार के लिए अपनी उत्कंठा जाहिर करने का साहस है।"

प्रेस टीवी ने कहा है कि ओबामा की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब इसके पहले सोमवार को, 2009 के राष्ट्रपति चुनाव में पराजित हुए उम्मीदवारों- मीर हुसैन मौसावी और मेहदी करौबी के समर्थक ईरान की राजधानी तेहरान में विरोध प्रदर्शन के लिए जमा हो गए थे और उन प्रदर्शनकारियों ने जमकर उतपात मचाया था।

मौसावी और करौबी ने मिस्र एवं ट्यूनिशिया में हुए विद्रोहों के समर्थन में सोमवार को रैली का आयोजन किया था। दोनों विपक्षी नेता फिलहाल नज़रबंद हैं और विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने में अक्षम हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष अली लारिजानी ने इन विरोध प्रदर्शनों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका का हाथ है। उन्होंने आगे कहा कि वाशिंगटन, मध्य पूर्व में चल रहे आजादी के आंदोलनों को ईरान के समर्थन से खफा है।

लारिजानी ने कहा, "मुख्य मकसद विरोध प्रदर्शनों को खड़ा करने का था, ताकि वे दावा कर सकें कि क्षेत्र में अमेरिका समर्थित तानाशाहों के यहां संकट फैल रहा है और ईरान जो कि क्षेत्र में लोकतंत्र का अगुआ रहा है, उसके यहां भी अंदरूनी समस्याएं हैं।"

ज्ञात हो कि ईरानी सांसदों ने मौसावी और करौबी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की है और अनधिकृत रैलियों के लिए उनकी निंदा की है। इन रैलियों में दो व्यक्तियों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं।

Saturday, February 12, 2011

मिस्र में "मुबारक" बदलाव



काहिरा: आखिरकार शुक्रवार को मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने घुटने टेकते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के साथ ही मुबारक अपने पूरे परिवार के साथ काहिरा छोड़कर जा चुके हैं। इस तरह मिस्र में मुबारक का 30 साल के शासन का अंत हो गया।

मिस्र के उप राष्ट्रपति उमर सुलेमान ने पुष्टि की है कि मुबारक अब राष्ट्रपति नहीं हैं। उन्होंने सरकारी टेलीविज़न पर घोषणा की है कि फ़िलहाल चुनाव होने तक सरकार का संचालन मिलिट्री काउंसिल करेगी। मिस्र की बागडोर सेना के हाथों में आने के बाद जहाँ मिस्र के भीतर जश्न मनाया जाने लगा वहीं दुनिया के अनेक देशों ने मुबारक के इस्तीफ़े का स्वागत किया।

अमेरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि मुबारक का इस्तीफ़ा मिस्र में बदलाव का अंत नहीं बल्कि एक शुरुआत है। अब सेना को देश में आपातकाल ख़त्म कर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने चाहिए।

उधर स्विट्जरलैंड सरकार ने मुबारक तथा उनके परिवार की सारी संपत्ति जब्त कर ली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लार्स नूचेल के मुताबिक यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मिस्र की किसी भी सरकारी संपत्ति की हेराफेरी का खतरा नहीं लेना चाहती। सरकार ने उनकी किसी भी संपत्ति खासकर रियल एस्टेट की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। गौरतलब है कि 2009 के अंत तक स्विस नेशनल बैंक में मिस्र का 3.6 अरब स्विस फ्रैंक्स (3.5 अरब डॉलर) जमा था।

Saturday, January 22, 2011

'ओबामा' का मुखौटा पहनकर बैंक लूटा


अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का मुखौटा पहनकर लूटपाट करने वाले एक व्यक्ति ने एक ऑस्ट्रियाई बैंक पर हाथ साफ कर डाला। पुलिस ने एक बयान में कहा कि इस लुटेरे ने हैंडनबर्ग स्थित एक बैंक को इसके बंद होने से ठीक पहले लूट लिया। यह लूट स्थानीय समयानुसार शाम छह बजे हुई ।

पुलिस द्वारा ये क़यास लगाये जा रहे हैं कि इस घटना को उसी व्यक्ति ने अंजाम दिया होगा जो पिछले दो साल से ओबामा का मुखौटा पहनकर बैंकों में लूटपाट की इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहा है। इस व्यक्ति ने बंदूक के बल पर बैंक कर्मचारियों को धमकाया और कर्मचारियों से धन निकलवाकर बैंक लूटकर फ़रार हो गया।

पुलिस द्वारा इस बात की पुष्टि नहीं की गई कि बैंक से कितना धन लूटा गया है लेकिन दैनिक ‘क्रोनेन्जीटुंग’ ने अपने ऑनलाइन संस्करण में बताया कि लुटेरा करीब 10 हजार यूरो लूट ले गया।

Friday, January 21, 2011

ड्रैगन की समझदारी और हमारी लाचारी

ख़ालिद हसन, (न्यूज़लाईन विशेष)
ड्रैगन एक बार फ़िर आग उगल रहा है, और वो भी विश्व की महाशक्ति अमेरिका के सामने। और हम लाचर हैं, सरकार और विपक्ष में तिरंगा फ़हराने को लेकर तनातनी चल रही है। चीन के राष्ट्रपति हु जिंताओ अपनी संप्रभुता के मुद्दे पर अमेरिका को उसकी धरती पर धमका रहे हैं, और हमारी सरकार और विपक्ष देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता पर एक दूसरे की खिंचाई कर रहे हैं।

चीन के राष्ट्रपति हु जिंताओ इस समय अमेरिका के चार दिन के राजकीय दौरे पर हैं, खबर है कि हु ने ओबामा को चीन के तथाकथित अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप ना करने की हिदायत दी है, और वो भी तिब्बत और ताईवान के मुद्दे पर। दरअसल कल ही अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चीनी राष्ट्र्पति हु जिंताओ को तिब्बत के मसले पर दलाई लामा के प्रतिनिधियों से वार्ता करने का सुझाव दिया था, लेकिन आज ड्रैगन ने साफ़ कर दिया कि यह उसका अंदरूनी मसला है, और वह (अमेरिका) तिब्बत से दूर रहे नहीं तो इसका असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। इससे चीन की बेहतर कूट्नीतिक सक्षमता का पता चलता है।

चीनी राष्ट्रपति का यह बयान हमारे लिये सीख देने वाला है और वह भी ऎसे वक़्त में जब हम गणतंत्र दिवस पर अपने ही देश में तिरंगा फ़हराने को लेकर विवाद में हैं। ज़्यादा वक़्त नहीं बीता है जब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत की यात्रा की थी, और हम आतंकवाद से लेकर कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सिर्फ़ अमेरिका के सामने गिड़गिड़ाते नज़र आये। हद तो तब हो गई जब हमारे मेहमान बन कर पधारे ओबामा ने पाकिस्तान की तारीफ़ों के पुल बांधे।

अब बात हमारे और चीन के संबंधों की, अमेरिका को उसकी धरती पर धमकाने वाला चीन कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के लिये अलग से नत्थी वीज़ा दे रहा है और हम चुप बैठे है। यही नहीं चीन अरुणाचल प्रदेश पर भी अपना दावा कर रहा है। ये अलग बात है कि चीन एशियाई महाशक्ति है, लेकिन हम यह क्यूं भूल जाते हैं कि हम भी किसी से कम नहीं। आखिरकार क्यूं हम कूटनीतिक रूप से अक्षम है?

Tuesday, November 9, 2010

ओबामा के खिलाफ इंडोनेशिया में छात्रों का प्रदर्शन


इंडोनेशिया के कई छात्र समूहों ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की इंडोनेशिया यात्रा के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सरकार से मांग की है कि वह अमेरिका की विदेश नीति के सामने न झुकें। ओबामा भारत की चार दिवसीय यात्रा समाप्त कर आज इंडोनेशिया के लिये रवाना हो गए है।

युनिवर्सिटी ऑफ इंडोनेशिया (यूआई) के एक छात्र समूह ने विश्वविद्यालय परिसर में ओबामा की इंडोनेशिया यात्रा के खिलाफ प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने न सिर्फ अमेरिकी झंडे जलाए बल्कि सरकार से देश की गरिमा बनाए रखने की मांग भी की। जानकारी के मुताबिक यह विश्वविद्यालय उन स्थानों की सूची में शामिल है, जहां ओबामा के जाने का कार्यक्रम है।

उधर खुद को स्टूडेंट मूवमेंट फॉर फ्रीडम बताने वाले एक अन्य समूह ने शुक्रवार को राजधानी जकार्ता में अमेरिकी दूतावास के सामने प्रदर्शन किया था। उसने अमेरिका को नया औपनिवेशक ताकत बताकर ओबामा की यात्रा का विरोध किया था।

Monday, November 8, 2010

भारत नहीं छीन रहा, अमेरिका की नौकरियां:मनमोहन


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ साझा प्रेस कॉंफ्रेंस में कहा कि भारत अमेरिका में किसी की नौकरियां छीनने के धंधे में नहीं है। आउटसोर्सिंग से अमेरिका में न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ी है बल्कि उत्पादकता भी। उन्होंने कहा कि भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी लोगों की नौकिरयां नहीं छीन रहा है। इसके विपरीत आउटसोर्सिंग से वहां उत्पादन क्षमता और उत्पादकता बढ़ रही है।

दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुए इस कॉंफ्रेंस में राष्ट्रपति ओबामा ने माना है कि भारत विश्व मंच पर एक अलग पहचान बनाई है वह महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रुप में उभर चुका है। जब उन्होंने कहा कि दोनों देशों में भागीदारी और बढ़ेगी तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत के प्रति अमेरिकी पहल और प्रतिबद्धता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि 9-10 प्रतिशत विकास दर बनाए रखने के लिए भारत को इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अगले पांच वर्षों में एक खरब डॉलर निवेश की जरुरत है।

ओबामा यात्रा के विरोध में नक्‍सलियों ने किये विस्‍फोट


पटना/रांची: अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के विरोध में नक्‍सलियों ने बिहार और झारखण्‍ड में कई जगहों पर हमला बोल दिया। नक्‍सलियों ने जहां बिहार में रेल पटरी पर विस्‍फोट किया वहीं झारखंड में एक रेलवे स्‍टेशन पर और दो सरकारी इमारतों में बम विस्‍फोट किया। इतना ही नहीं नक्‍सलियों ने ओबामा की यात्रा के विरोध में बंद की घोषणा भी की है।

पुलिस के मुताबिक नक्‍सलियों ने मुजफ्फरपुर जिले में हाजीपुर-मुजफ्फरपुर सेक्‍शन पर कुरहनी रेलवे स्‍टेशन के समीप सोमवार तड़के विस्‍फोट कर रेल पटरी उड़ा दिया। इस विस्‍फोट की वजह से एक मालगाड़ी के 10 डिब्‍बे पटरी से उतर गए। 24 घंटे के भारत बंद को लेकर रविवार देर रात गया जिले के रफीगंज थाने में दुधौल गांव के निकट जीटी रोड पर नक्सलियों ने चार ट्रकों को आग के हवाले कर दिया। नक्सलियों ने औरंगाबाद जिले (रफीगंज थाने के चंदौल गांव और मदनपुर थाने के उचौली गांव) में एक निजी मोबाइल कंपनी के दो टावरों को भी विस्‍फोट कर उड़ा दिया है।


वहीं नक्‍सलियों ने रविवार देर रात रांची से करीब 170 किलोमीटर दूर पलामू जिले के सतभनी रेलवे स्‍टेशन पर विस्‍फोट करने के साथ ही एक रेल अधिकारी का अपहरण भी कर लिया है। नक्‍सलियों ने पलामू जिले के विश्रामपुर ब्‍लॉक के राझरा गांव और नवा ब्‍लॉक के बसना गांव के पंचायत भवनों को भी डायनामाइट के विस्‍फोट से उड़ा दिया।

भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (सीपीआई-माओवादी) ने ओबामा के भारत दौरे के विरोध में 24 घंटे के बंद की घोषणा की है। यह बंद रविवार मध्‍य रात्रि से सोमवार मध्‍य रात्रि तक रहेगा। बंद को देखते हुए राज्‍य में सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए हैं। रेलवे ने एहतियाती कदम उठाते हुए पांच ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है वहीं चार ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया है।


ओबामा-मनमोहन की बैठक पर दुनिया की निगाहें


हैदराबाद हाउस में चल रही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की बैठक पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

हैदराबाद हाउस में चल रही इस बैठक में दोनों नेता द्विपक्षीय समेत कई अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा कर आपसी सहमति बनाएंगे। साथ ही इस बैठक में दोनों नेता कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर भी दस्तख्त करेंगे। अब दुनिया भर के लोग बेसब्री से इस बात का इंतजार है कि कौन कौन से महत्वपूर्ण समझौतों पर दस्तख्त होंगे।

दोनों देशों के बीच भारत में गैस रिजर्व के खोज में सहयोग, वेदर फोरकास्ट, स्वास्थ्य और उर्जा के क्षेत्र में सहयोग संबंधित कई समझौते पर सहमति बन चुकी है और दोनों नेता इस बैठक में इन समझौते के मसौदों को हरी झंडी देंगे। साथ ही दोनों नेताओं के बीच भारत- अमेरिका न्यूक्लियर डील पर अमल, आउटसोर्सिंग और एच1 बी वीजा की फीस में इजाफे जैसे मुद्दे पर भी चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक साझा बयान में न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में भारत की सदस्यता पर अमेरिकी समर्थन का ऐलान भी मुमकिन है।

Sunday, November 7, 2010

अमेरिका ही नहीं, दुनिया के लिए भी महत्वपूर्ण है पकिस्तान: ओबामा



मुंबई: एक छात्रा के पाकिस्तान पर पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका के लिए मायने रखता है और अमेरिका हमेशा ही पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते चाहता है।

छात्रा का ओबामा से सवाल था कि पाकिस्तान अमेरिका के लिए इतना महत्वपूर्ण मित्र क्यों है कि आज तक पाकिस्तान को अमेरिका ने आतंकी राष्ट्र घोषित नहीं किया है?

इस पर ओबामा ने कहा कि मैं इस सवाल की उम्मीद कर रहा था। पाकिस्तान सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि दुनिया के लिए बहुत मायने रखता है। मैं मानता हूं कि पाकिस्तान में कुछ कट्टरपंथी लोग हैं जिन्होंने माहौल को खराब कर रखा है। लेकिन पाकिस्तानी सरकार भी उन कट्टरपंथियों से लड़ रही हैं। पाकिस्तान में कुछ जगह हालात बहुत मुश्किल हैं और पाकिस्तान की समस्या को दुनिया समझती है। हम पाकिस्तान के दोस्त हैं और उसके साथ इमानदार रहना चाहता है।

उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा ही अपनी विदेश नीति में पाकिस्तान को महत्व दिया है। हम एक स्थिर, शांत और स्मृद्ध पाकिस्तान चाहते हैं। पाकिस्तान में अस्थिरता, कट्टरता और आतंकवाद दुनिया के लिए कैंसर के समान है। मैं यह भी मानता हूं कि पाकिस्तान ने उतनी तरक्की नहीं कि जितनी की करनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा ही बहुत मुश्किल संबंध रहे हैं और दोनों ही देशों के जटिल रिश्तों का इतिहास गवाह है। दोनों ही देशों ने आतंक और हिंसा का सामना किया है। आप लोगों को शायद अजीब लगे लेकिन मुझे यकीन है कि पाकिस्तान की तरक्की से सबसे ज्यादा फर्क भारत को पड़ेगा। पाकिस्तान की तरक्की सबसे ज्यादा भारत के लिए जरूरी है। यदि पाकिस्तान अस्थिर रहता है तो उसका सबसे ज्यादा नुकसान भारत को ही उठाना पड़ेगा। एशिया में स्थिरता के लिए पाकिस्तान का स्थिर होना बहुत जरूरी है।

ओबामा चाहते हैं कि पाकिस्तान और भारत के बीच मतभेद खत्म होकर बातचीत शुरु हो। पाकिस्तान और भारत एक दूसरे के साथ शांति से रहे। अमेरिका भारत और पाकिस्तान पर समझौता करने के लिए दवाब नहीं बना सकता। समझौते की शर्ते तय करना अमेरिका का काम नहीं है।

जेहाद, हिंसा की इस्लाम में कोई जगह नहीं: ओबामा


मुंबई: अमरीका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने आज मुंबई में सैंट जेवियर्स कॉलेज में छात्रों के इस्लाम पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जेहाद और हिंसा के लिए इस्लाम में कोई जगह नहीं है।

उनका कहना है कि वो खुद इस्लाम धर्म की बहुत इज्जत करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि आज दुनियाभर में अलग-अलग धर्मों, जातियों, नस्लों के लोग एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं और दुनिया को तरक्की पर ले जा रहे हैं। दुनिया में कोई भी धर्म हिंसा फैलाना नहीं चाहता। उन्होंने युवाओं से कहा कि इस समय दुनिया का भविष्य युवाओं के हाथ में ही है। युवा ही दुनिया को तरक्की पर ले जा सकते हैं।

ओबामा ने भारतीयों की उद्यमता की भी दिल खोलकर तारीफ की। ओबामा ने कहा भारतीयों में अमरीकियों की तरह उद्यमता भरी हुई है। भारत में एक अच्छा उदाहरण यह है कि यहां का निजी क्षेत्र सार्वजनिक क्षेत्र के मुकाबले बहुत तेजी से तरक्की कर रहा है। आज के जीवन में नैतिक सिद्धांतों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में ओबामा ने कहा कि यदि नैतिक मूल्यों को आधार बनाकर काम करना है तो सबसे अच्छा तरीका है कि पहले खुद का विकास करों फिर समाज सेवा।

नन्हे-मुन्नों के साथ थिरके ओबामा दंपत्ति


मुम्बई: शनिवार को मुम्बई पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आज मुम्बई के एक स्कूल में महाराष्ट्र का पारम्परिक कोली नृत्य किया। साथ ही ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ने बच्चों के साथ दीपावली भी मनाई।

आज ओबामा दंपत्ति मुम्बई के होलीनेम स्कूल पहुंचे जहां बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किया। कोली नृत्य पर नाच रहे नन्हे-मुन्नों को देख पहले मिशेल थिरकीं। इसके बाद ओबामा भी खुद को झूमने से नहीं रोक पाये। बस फिर क्या था ओबामा ने भी बच्चों और मिशेल का पारंपरिक नृत्य में भरपूर साथ दिया। उसके बाद ओबामा ने कुछ देर तक बच्चों से बात की और उन्हें ऑटोग्राफ भी दिए। जहां मिशेल बच्चों के साथ बेहद खुश नजर आ रही थीं। वहीं बच्चे भी ओबामा और मिशेल के साथ थिरकने से खूब उत्साहित दिखे।

तय कार्यक्रम के अनुसार आज ओबामा और मिशेल मुम्बई से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। और दिन में 3.30 बजे वे दिल्ली पहुंच जाएंगे। उनकी अगवानी के लिए हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर मौजूद होंगे। क्योंकी अमेरिकी राष्ट्रपति का दिल्ली में बहुत व्यस्त कार्यक्रम है। इसलिये दिल्ली पहुंचने के कुछ देर बाद ही वह ऐतिहासिक हूमायूं का मकबरा देखने जाएंगे। जहां से शाम को वह अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इसके बाद वह प्रधानमंत्री के आवास पर एक निजी रात्रिभोज में शामिल होंगे।

सोमवार को वह राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद ओबामा प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे। फिर दोनों एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करेंगे। अपने सम्मान में आयोजित भोज से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति भारतीय संसद को भी संबोधित करेंगे। इसके बाद वह इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के लिए रवाना होंगे।

Saturday, November 6, 2010

कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली पहुँचेंगे ओबामा

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा कल मुंबई से राष्ट्रीय राजधानी पहुँचेंगे और मंगलवार को वहां से रवाना होने से पहले उनका काफी व्यस्त कार्यक्रम है जिसमें वो हुमायूँ के मकबरे तथा राजघाट जाने और प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह से मुलाकात करने के बाद संसद का संबोधन करेंगे।

ओबामा के स्वागत की तैयारी कर रही दिल्ली में जमीन से लेकर हवा तक सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। यात्रा के सुरक्षा पहलुओं को लेकर यहाँ अधिकारियों ने अपने अमेरिकी समकक्षों से चर्चा की है। अधिकारियों ने बताया कि सैकड़ों मुस्तैद सुरक्षाकर्मी छतों से उन रास्तों पर नजर रखेंगे, जहाँ से अमेरिकी राष्ट्रपति गुजरेंगे। इसके साथ ही हवाई निगरानी भी रखी जाएगी।

एक अधिकारी के मुताबिक आईटीसी मौर्या शेरेटन होटल को जनता के लिए बंद कर दिया गया है और इमारत में भारतीय तथा अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियाँ तैनात हैं। उन्होंने कहा कि हमने होटल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। ओबामा के मार्ग पर सुरक्षाकर्मी छतों से नजर रखेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए हमने पूर्ण सुरक्षा इंतजाम किए हैं

Wednesday, November 3, 2010

बंद रहेंगी ताज होटल जाने वाली सड़कें


मुंबई: देश की वित्तीय राजधानी में मशहूर ताजमहल होटल को जाने वाली सभी सड़कें दो दिन बंद रहेंगी क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने प्रवास के दौरान होटल में ही रूकेंगे।

संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) रजनीश सेठ ने बताया कि ओबामा छह और सात नवंबर को शहर में रहेंगे। उनके लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध किए हैं। वह एक विश्व नेता है और उनके बारे में खतरे की अवधारणा बहुत अधिक है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए पूरा ताज होटल बुक कर दिया है और उनकी सुरक्षा के मद्देनज़र होटल की तरफ जाने वाली सड़के दो दिन बंद रहेंगी।

इतना ही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की मुंबई यात्रा के दौरान अमेरिकी प्रशासन 20 करोड़ डॉलर (करीब 900 करोड़ रुपए) प्रतिदिन के हिसाब से खर्च करेगा। ओबामा के साथ गुप्तचर सेवा एजेंट, अमेरिकी सरकार के अधिकारियों और पत्रकारों सहित करीब तीन हजार लोग आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी हेलिकॉप्टर, एक पोत और उच्च सुरक्षा उपकरण एक सप्ताह पहले से यहाँ डेरा जमाए हुए हैं।

व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एशिया मामलों के वरिष्ठ निदेशक जेफ बदेर ने बताया कि ऐतिहासिक ईस्ट रूम में गत वर्ष व्यक्तिगत तौर पर दिवाली मनाने वाले अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बने बराक ओबामा की ख्वाहिश थी कि वह भारतीयों के साथ प्रकाश का यह पर्व मनाएँ।

ट्यूबलाइटों और बल्बों से बनी ओबामा की प्रतिमा



वडोदरा: गुजरात के एक कलाकार ने ट्यूबलाइट और बल्बों के टुकड़ों का इस्तेमाल करके अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके परिवार के सदस्यों की मोजेक ग्लास की प्रतिमाएँ बनाई हैं। ओबामा की छह नवंबर से शुरू हो रही भारत यात्रा के दौरान ये प्रतिमाएँ उन्हें भेंट की जाएगी।

महाराज सयाजीराव विश्वविद्यालय में फाइन आर्ट्स के छात्र रहे राजेश बारिया ने बताया कि ओबामा परिवार के सदस्यों की प्रतिमाओं के लिए उन्होंने 80 ट्यूबलाइटों और 150 बल्बों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि देश के एक मशहूर औद्योगिक घराने ने प्रतिमाएं बनाने का जिम्मा सौंपा था ताकि प्रतिमाएँ अमेरिकी राष्ट्रपति को भेंट की जा सकें। उन्होंने कंपनी का नाम बताने से परहेज किया। उनके मुताबिक प्रतिमा बनाने के लिए ओबामा की वेबसाइट से तस्वीरों का चयन किया गया है।

Saturday, October 30, 2010

भारत यात्रा के लिये बेताब हैं ओबामा दंपत्ति


अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का कहना है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल भारत यात्रा को लेकर बहुत उत्सुक हैं। हिलेरी ने ओबामा के मन की यह बात यहाँ वियतनाम में जाहिर की।

पूर्वी एशियाई देशों की शिखर बैठक के सिलसिले में आई हिलेरी से जब ओबामा की भारत यात्रा के एजेंडे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं आपसे इतना ही कह सकती हूँ कि ओबामा और मिसेज ओबामा अपने भारत यात्रा को लेकर बेहद उत्सुक हैं। उल्लेखनीय है कि अमेर‍िकी राष्ट्रपति 6 नवम्बर को तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुँचे रहे हैं।

Tuesday, October 26, 2010

ओबामा के लिये मौर्या, ताज में विशेष तैयारियां

राष्ट्रपति ओबामा भी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के पसंदीदा होटल मौर्या में ठहरेंगे। ओबामा अपनी पत्नी मिशेल के साथ इस होटल के प्रेसीडेंशियल सुइट में रुकेंगे। इस सुइट में डाइनिंग रुम के अलावा सोना स्टीम बाथ की भी व्यवस्था है। आईटीसी समूह का यह होटल मौर्या अपने शानदार व्यंजनों के लिए जाना जाता है। इस बार भी यहां के बावर्ची ओबामा के लिए एक खास डिश बनाएंगे और उसका नाम ओबामा पर होगा। दरअसल राष्ट्रपति ने खुद ही इसकी इच्छा जाहिर की है क्योंकि इसके पहले बिल क्लिंटन के नाम पर ऐसा डिश बन चुका है।

वहीं ओबामा ने मुंबई में ठहरनें के लिये ताज होटल को चुना है। उनके लिये इस होटल के खास कमरे ‘टाटा सुइट ‘ को चुना गया है और वहां इसके लिए जरुरी तैयारियां भी शुरु हो गई है। टाटा सुइट 5000 वर्गफुट में फैला हुआ है और इसके एक रात का किराया सात लाख रुपए है। इस कमरे में शयन कक्ष , ड़ाइनिंग हॉल, ड्राइंग रुम, के अलावा कई बाथरुम भी हैं। इसमें वाईफाई सहित तमाम तरह की सुविधाएं हैं। इसमें अपनी तरह की अदभुत कलाकृतियां भी हैं जिन्हें हमले के बाद फिर से तैयार किया गया है। यही नहीं इसकी खिड़की से अरब सागर और गेटवे ऑफ इंडिया भी दिखता है।

अगर किसी वजह से ओबामा टाटा सुइट में नहीं ठहर पाए तो वे राजपूत सुइट में ठहरेंगे। ’राजपूत’ सुइट भी उतना ही आलीशान है जितना की ’टाटा सुइट’। होटल ताज में 285 कमरे और 42 सुइट हैं जिनका एक रात का किराया 85,000 रुपए से सवा लाख रुपए तक है।

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