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Saturday, February 26, 2011

लीबिया से भारतीयों की वापसी शुरू


नई दिल्ली : लीबिया में बद से बद्तर होते जा रहे हालातों के मद्देनज़र, सरकार द्वारा लीबिया में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। विदेश सचिव निरुपमा राव ने इस मामले में वरिष्ठ अधिकारों के साथ एक बैठक की और लीबिया में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की योजना की समीक्षा की।

ग़ौरतलब है कि लीबिया के तानाशाह नेता कर्नल मुअम्‍मर गद्दाफी द्वारा पूरे लीबिया को खाक में मिला देने की धमकी के बाद से भारतीय नागरिकों को वापस लाने की कोशिशों में तेज़ी आई है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक 360 यात्रियों की क्षमता वाले बोइंग 747 और 280 लोगों की क्षमता वाले एयरबस ए-330 त्रिपोली के लिए रवाना कर दिए गए हैं जो आज शाम तक 640 भारतीयों को लेकर दिल्‍ली लौट आएंगे। भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस जलश्‍व और आईएनएस मैसूर भी आज सुबह मुंबई से लीबिया के लिए रवाना हो गए हैं जहां उसे पहुंचने में 10-11 दिन लगेंगे। भारतीय सेना का आईएल-76 भी मदद के लिए भेजे जाने के लिए तैयार कर लिया गया है।

लीबिया के अधिकारियों की ओर से त्रिपाली में भारतीय उड़ानों को उतारने की अनुमति मिल जाने के बाद ये कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय ने बताया कि स्कोटिया प्रिंस जहाज को 2 मार्च को बेनगाजी भेजा जाएगा जहां से वो 1200 लोगों को एलेक्सज़ेन्ड्रिया लेकर आएगा। इसके बाद एयर इंडिया के विमान उन्हें भारत लाएंगे। 750 यात्रियों की क्षमता वाले जहाज को भी लोगों को बेनगाज़ी से एलेक्सज़ेन्ड्रिया लाने के लिए तैनात किया जाएगा। तोबरुक से 150 भारतीय नागरिकों को सड़क के जरिए मिस्र के सीमा पर स्थित सालुम तक लाया जाएगा। उनके साथ भारतीय राजदूत भी रहेंगे और फिर दो टुकड़ि‍यों में बांटकर उन्हें 26 और 28 फरवरी को काहिरा तक लाया जाएगा जहां से उन्हे विमान से भारत के लिये रवाना होंगे।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि त्रिपोली, काहिरा और ट्यूनिसिया में भारतीय दूतावास लगातार वहां के हालात पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार भी भारतीयों को जल्द ही सुरक्षित भारत लाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। लीबिया में 18 हजार भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। इस बीच विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि लोगों को लीबिया से निकालने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जायगा। मंत्रालय ने लोगों को सावधान किया है कि वे धनराशि मांगने वाले अवांछनीय तत्वों से सावधान रहें और उनके बहकावे में नहीं आएं।

Saturday, February 12, 2011

मिस्र में "मुबारक" बदलाव



काहिरा: आखिरकार शुक्रवार को मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने घुटने टेकते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के साथ ही मुबारक अपने पूरे परिवार के साथ काहिरा छोड़कर जा चुके हैं। इस तरह मिस्र में मुबारक का 30 साल के शासन का अंत हो गया।

मिस्र के उप राष्ट्रपति उमर सुलेमान ने पुष्टि की है कि मुबारक अब राष्ट्रपति नहीं हैं। उन्होंने सरकारी टेलीविज़न पर घोषणा की है कि फ़िलहाल चुनाव होने तक सरकार का संचालन मिलिट्री काउंसिल करेगी। मिस्र की बागडोर सेना के हाथों में आने के बाद जहाँ मिस्र के भीतर जश्न मनाया जाने लगा वहीं दुनिया के अनेक देशों ने मुबारक के इस्तीफ़े का स्वागत किया।

अमेरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि मुबारक का इस्तीफ़ा मिस्र में बदलाव का अंत नहीं बल्कि एक शुरुआत है। अब सेना को देश में आपातकाल ख़त्म कर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने चाहिए।

उधर स्विट्जरलैंड सरकार ने मुबारक तथा उनके परिवार की सारी संपत्ति जब्त कर ली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लार्स नूचेल के मुताबिक यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मिस्र की किसी भी सरकारी संपत्ति की हेराफेरी का खतरा नहीं लेना चाहती। सरकार ने उनकी किसी भी संपत्ति खासकर रियल एस्टेट की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। गौरतलब है कि 2009 के अंत तक स्विस नेशनल बैंक में मिस्र का 3.6 अरब स्विस फ्रैंक्स (3.5 अरब डॉलर) जमा था।

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