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Wednesday, March 23, 2011

गद्दाफ़ी ने भरी हुंकार, कहा ’जीत हमारी ही होगी’


त्रिपोली : गठबंधन सेनाओं के हवाई हमलों से जूझ रहे लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी ने देश में हमले शुरू होने के बाद से पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर संघर्ष में जीत का दावा किया। साथ ही उन्होंने कहा कि वह अपने देश में शहीद के रूप में मरना पसंद करेंगे। लीबियाई टेलिविजन ने गद्दाफी के इस भाषण का सीधा प्रसारण किया। पिछले एक सप्ताह में गद्दाफी का यह पहला सार्वजनिक संबोधन था। टेलिविजन चैनल ने गद्दाफी को बालकनी से अपने समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते दिखाया।

लीबिया में गठबंधन सेना की कार्रवाई शुरू होने के बाद तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी पहली बार सरकारी टेलीविजन पर नजर आए। गद्दाफी ने एक बार फिर हुंकार भरते हुए कहा कि आखिरकार जीत उनकी ही होगी। गद्दाफी ने राजधानी त्रिपोली के पास अपनी छावनी में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ये बाते कहीं।

उन्होंने गठबंधन सेना की ओर से लीबियाई सेना पर पश्चिमी देशों की सेनाओं की ओर से किए जाने वाले हमलों को अन्यायपूर्ण करार देते हुए उसकी निंदा की और कहा, ' कम समय तक चलने वाले संघर्ष में हम उन्हें पराजित कर देंगे और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में भी हम उन्हें पराजित कर देंगे। '

गद्दाफी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिमी सेना से हो रही लड़ाई में जीत हमारी ही होगी। उन्होंने कहा कि वह हवाई हमले से नहीं डरते। हम सरेंडर नहीं करेंगे। इस ऐतिहासिक लड़ाई में हम ही जीतेंगे। उन्होंने सभी इस्लामी देशों से इस जंग में हिस्सा लेने की बात कही। उन्होंने पश्चिमी देशों की कड़ी आलोचना भी की।

उल्लेखनीय है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि गद्दाफी को हटाए जाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि हवाई हमले आम नागरिकों को सुरक्षा के लिए किए जा रहे हैं।

लीबिया: 14 तेल कंपनियों पर प्रतिबंध



वाशिगटन: लीबिया सरकार के नियंत्रण वाली 14 तेल कंपनियों को अमेरिका ने प्रतिबंधित कर दिया है। लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी के आय का स्रोत मानकर इन कंपनियों पर यह कार्रवाई की गई।

अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय [ओएफएसी] के निदेशक एडम जे जुबिन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1973 के मद्देनजर सभी सरकारों को इस लीबियाई कंपनी की संपत्तिया जब्त कर लेनी चाहिए, ताकि गद्दाफी कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों में न कर सकें।

जुबिन के मुताबिक लीबियन नेशनल ऑयल कार्पोरेशन गद्दाफी प्रशासन के लिए आय का बुनियादी स्रोत रही है।

लीबियन नेशनल ऑयल कार्पोरेशन के तहत शोधन, उत्पादन और ब्रिकी के क्षेत्र में 14 कंपनिया संचालित की जा रही हैं। इन सभी पर अमेरिकी सरकार ने प्रतिबंध लगाया है। जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें 'अरबियन गल्फ ऑयल कंपनी', 'अजाविया ऑयल रिफाइनिंग कंपनी', 'ब्रेगा पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनी' और 'मेडिटरेनियन ऑयल सर्विसेज' प्रमुख हैं।

Monday, March 21, 2011

पश्चिमी देशों के हमले जारी, गद्दाफी का परिसर तबाह


त्रिपोली : लीबिया पर पश्चिमी देशों के सुरक्षाबलों द्वारा किये जा रहे मिसाइल हमलों में राजधानी त्रिपोली में लीबियाई शासक कर्नल मुअम्मर गद्दाफी का एक परिसर नष्ट हो गया। गठबंधन सेना के अधिकारियों का कहना है कि यह इमारत कमांड सेंटर थी। वेबसाइट 'डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट बीबीसी डॉट को डॉट यूके' के अनुसार पत्रकारों को इस तीन या चार मंजिला इमारत का मलबा दिखाया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस हमले में कोई हताहत हुआ या नहीं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा लीबिया को उड़ान वर्जित क्षेत्र घोषित किए जाने से सम्बद्ध प्रस्ताव पारित होने के बाद से अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने उस पर हमले शुरू कर दिए।

ग़ौरतलब है कि कर्नल गद्दाफी के खिलाफ पिछले महीने भर से लीबिया में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि लीबियाई सशस्त्रबलों और हवाई सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए इन हमलों का निशाना कर्नल गद्दाफी नहीं थे।

रविवार रात त्रिपोली में विमान भेदी तोपों से गोलाबारी की गई और कई धमाके सुने गए। बाब अल-अजिजिया में कर्नल गद्दाफी के सैन्य ठिकाने और परिसर से धुएं के बादल उठते देखे गए। इससे पहले अमेरिकी रक्षा विभाग में नौसेना के वाइस एडमिरल विलियम गोर्टनी ने बताया कि शनिवार से शुरू हुई इस सैन्य कार्रवाई से लीबिया की हवाई ताकत को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि विद्रोहियों की ओर बढ़ रही जमीनी फौजों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि कर्नल गद्दाफी या उनके आवास को निशाना नहीं बनाया गया।

अमेरिकी अधिकारियों ने लीबिया सरकार द्वारा किए गए संघर्ष विराम के दावे पर संदेह व्यक्त किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टॉम डोनीलोन ने कहा, "संघर्ष विराम या तो लागू ही नहीं किया गया या फिर उसका तत्काल उल्लंघन कर दिया गया।"

उधर, अमेरिकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा है कि अमेरिका लीबिया पर इस कार्रवाई का हिस्सा बना रहेगा, लेकिन वह ज्यादा प्रमुख भूमिका नहीं निभाएगा।

इस बीच लीबिया को उड़ान वर्जित क्षेत्र घोषित करने के लिए फौजों का जमावड़ा लगना जारी है। कतर इसके लिए चार विमान भेजने वाला है। इसके साथ ही लीबिया पर कार्रवाई करने वाला कतर पहला अरब देश बन जाएगा।

उधर, फ्रांस का विमान वाहक पोता चार्ल्स द गाल भी भूमध्यसागर के तोलॉन बंदरगाह के लिए रवाना हो चुका है। डेनमार्क और नॉर्वे भी अपने विमान भेज रहे हैं। स्पेन ने तीन लड़ाकू विमान और एक विमान में ईंधन भरनेवाला विमान लीबिया रवाना किया है। इटली के लड़ाकू विमान भी तैनाती के लिए तैयार हैं। कनाडा ने सिसली में छह विमान लगा दिए हैं और उन्हें कार्रवाई के लिए तैयार किया जा रहा है।

इस बीच लीबिया को उड़ान वर्जित क्षेत्र घोषित किए जाने का समर्थन करने वाले अमर मूसा ने लीबिया पर हो रही बमबारी का विरोध किया है। उल्लेखनीय है कि लीबिया पर गत शनिवार को फ्रांसीसी हवाई हमलों के साथ ही फौजी कार्रवाई शुरू हो गई। अब तक अमेरिकी और ब्रिटिश युद्ध पोतों से 100 से ज्यादा मिसाइलें दागी जा चुकी हैं।

Sunday, March 20, 2011

लंबे युद्ध के लिए तैयार है लीबिया : गद्दाफी


काहिरा/त्रिपोली : लीबिया के तानाशाह शासक मुअम्मार गद्दाफी ने अंतरराष्ट्रीय सेनाओं द्वारा लीबिया पर किये गए हमलों के ख़िलाफ़ बोलते हुए कहा कि वह एक लंबे युद्ध के लिए तैयार है। उन्होंने संकल्प जताया कि वह इस युद्ध में पश्चिमी देशों को मात देंगे।

ग़ौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय सेनाएं लीबिया को उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किए जाने के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू कराने के लिए लीबिया पर हवाई हमले कर रही है। इन हमलों में अब तक 48 लीबियाई नागरिकों की जान जा चुकी है।

सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक ध्वनि संदेश में गद्दाफी ने कहा कि हम एक लंबे और गौरवपूर्ण युद्ध की तैयारी कर रहे है। उन्होंने कहा कि हम उन्हें हराएंगे। हम अपनी जमीन पर लड़ रहे है और अपने सम्मान के लिए लड़ रहे है। उन्होंने पश्चिमी देशों को राक्षस और अपराधी बताया। उन्होंने कहा कि आप वैसे ही हारेगे जैसे हिटलर हारा था। सभी आतातायी खत्म हुए है।

लीबिया पर अंतरराष्ट्रीय फौज का हमला, 48 मरे


सत्ता पर क़ाबिज़ रहने के लिये अपनी ज़िद पर अड़े लीबिया के राष्ट्रपति गद्दाफ़ी पर अंतरराष्ट्रीय फौज ने कार्रवाई की शुरूआत कर दी है। लीबिया की वायु सीमा को भेद कर ब्रिटेन की मिसाइलें भी गद्दाफी की रियासत पर टूट पड़ी हैं। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने रॉकेट दागे हैं। लीबिया टीवी के मुताबिक़ इन हमलों में 48 लोगों की जान गई है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पास किए गए प्रस्ताव को लागू करने के लिए लीबिया में कार्रवाई की शुरूआत कर दी गई है। लेकिन इस लड़ाई में आम जनता को शिकार होना पड़ रहा है। अमेरिकी सैनिक कार्रवाई के साथ ब्रिटिश पनडुब्बियों से छूटे टॉमहॉक मिसाइलों ने लीबिया के ठिकानों को निशाना बनाया है। अब तक 100 से ज्यादा मिसाइलें दागी जा चुकी हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लीबिया के खिलाफ 'सीमित कार्रवाई' करने का एलान किया है. चीन ने लीबिया पर भारी हमले पर अफसोस व्यक्त किया है और कहा है कि चीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हिंसा के इस्तेमाल के खिलाफ है. जापान ने लीबिया के खिलाफ कार्रवाई का स्वागत किया है तो अफ्रीकी यूनियन ने हमला तुरंत रोकने को कहा है.

एक अमेरिकी फौजी अधिकारी के मुताबिक जहाजों और पनडुब्बियों से एक साथ किए जा रहे हमले में तटवर्ती इलाके के कम से कम 20 ठिकानों को निशाना बनाया गया है। लीबियाई शासक कर्नल गद्दाफी को विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई करने से रोकने की कोशिश की जा रही है। अमेरिका के इनकार करने के बाद ब्रिटेन के साथ मिल कर फ्रांस इस हमले का नेतृत्व कर रहा है। शनिवार को हमलों की शुरुआत फ्रांस के विमानों ने ही की।

लंदन में प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा, "आज की रात ब्रिटिश सेना लीबिया पर कार्रवाई कर रही है. ये लोग अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा है जो संयुक्त राष्ट्र की इच्छा का पालन करने और लीबिया के लोगों को बचाने के लिए एक साथ आए हैं." कैमरन ने ये भी कहा, "कर्नल गद्दाफी की अपने ही लोगों के खिलाफ क्रूरता हम सबने देखी है और वो जिस युद्धविराम की बात कर रहे थे वो कभी लागू ही नहीं हुआ बल्कि लीबियाई नागरिकों के खिलाफ और ज्यादा क्रूरता दिखाई गई."

ब्रिटिश सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल जॉन लॉरीमेर ने कहा कि मिसाइलों से हमला शुरुआती कदम है, "ब्रिटेन और सहयोगी ताकतें तब तक कार्रवाई करती रहेंगी जब तक कर्नल गद्दाफी और उनकी सेना को ये समझ नहीं आ जाता कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उन्हें अपने ही लोगों को मारते देखता नहीं रह सकता."

ब्रिटेन ने हमले में हिस्सा लेने के लिए अपने टॉरनाडो और टायफून लड़ाकू विमानों का बेड़ा लीबिया के पास तैनात कर दिया है. लीबिया पर सैनिक कार्रवाई को ऑपरेशन एल्लामी नाम दिया गया है. साइप्रस के एक्रोतिरी में ब्रिटेन का एक वायुसेना बेस है, हमले के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. भूमध्यसागर में ब्रिटेन के दो लड़ाकू जहाज एचएमएस कंबरलैंड और एचएमएस वेस्टमिनिस्टर पहले से ही मौजूद हैं. 2003 के इराक हमले के साए से बाहर निकलने के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने लीबिया पर हमले को जरूरी, उचित और कानूनी कहा. कैमरन ने ये भी कहा, "ये कानूनी रूप से सही है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अरब लीग और कई दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसका समर्थन किया है."

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गुरुवार को प्रस्ताव पास कर लीबिया में नागरिकों को बचाने और युद्धविराम लागू कराने के लिए हर तरह के उपाय करने की अनुमति दे दी. पिछले हफ्ते अरब लीग के विदेश मंत्रियों ने पश्चिमी देशों से लीबिया पर नो फ्लाई जोन लागू करने की मांग की. इसके जवाब में पश्चिमी देशों ने अरब जगत से सैनिक कार्रवाई के लिए समर्थन देने को कहा. इसके बाद शनिवार को पेरिस में सैनिक कार्रवाई पर विचार करने के लिए बुलाई गई बैठक में जॉर्डन, मोरक्को, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा ने हिस्सा लिया. कतर और बेल्जियम, नीदरलैंड्स, डेनमार्क, नॉर्वे समेत कई यूरोपीय देशों ने लीबिया पर हमले में शामिल होने की बात कही है।

Tuesday, March 15, 2011

लीबिया: गद्दाफी ने भारत से मांगा समर्थन


नई दिल्‍ली : दुनिया भर से विरोध की मार झेल रहे लीबिया के तानाशाह शासक मुअम्मर गद्दाफ़ी ने अब भारत से मदद की गुहार लगाई है। अपनी इस मांग को मनवाने के लिये गद्दाफ़ी ने अपनी तेल कंपनियों में भारत को साझीदारी देने की पेशकश की है और बदले में भारत से राजनीतिक समर्थन मांगा है। गद्दाफी ने लीबिया की राजधानी त्रिपोली में भारत के राजदूत से मुलाकात में यह पेशकश की है।

भारत के अलावा, उन्‍होंने चीन और रूस के राजदूतों से भी मुलाकात की। गद्दाफी ने तीनों राजदूतों को कहा कि लीबिया में विद्रोह शुरू होने के बाद से पश्चिमी तेल कंपनियां भाग रही हैं। लीबिया में तेल का उत्‍पादन कम हो रहा है। ऐसे में इन कपंनियों की हिस्‍सेदारी भारत, चीन व रूस ले सकते हैं। बदले में वे लीबिया सरकार को समर्थन दें।

ग़ौरतलब है कि अफ्रीकी देशों के तेल संसाधनों में हिस्‍सेदारी के लिए भारत को लगातार चीन से प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है। पर ज्‍यादा निवेश की मजबूरी के चलते वह इस मामले में पिछड़ रहा है।

लीबिया में भारत के राजदूत एम. मनिमेकलाई और गद्दाफी की मुलाकात की दिल्‍ली में सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है। पर सूत्रों ने बताया कि लीबियाई नेता ने भारतीय राजदूत को धन्‍यवाद देने के लिए बुलाया था। यह धन्‍यवाद अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से लीबिया पर आयद प्रतिबंध का विरोध करने के लिए दिया गया।

भारत अब तक लीबिया पर आर्थिक प्रतिबंध के खिलाफ रहा है। भारत के मुताबिक़, जनता को मुश्किल में डालने वाला कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। अगर किसी देश के शासक का विरोध किया जा रहा हो तो इसकी सज़ा उस देश की जनता को नहीं दी जानी चाहिये। भारत लीबिया को नो फ्लाई जोन घोषित करने या उसके खिलाफ सैन्‍य ताकत के इस्‍तेमाल का भी विरोध करता रहा है। जबकि ब्रिटेन और फ्रांस लीबिया को नो फ्लाई जोन बनाने की वकालत करते रहे हैं।

Saturday, March 5, 2011

लीबिया में संघर्ष, 49 मरे


काहिरा: लीबिया के पूर्वी इलाके में हुए बम धमाकों एवं विद्रोहियों के साथ मुअम्मर गद्दाफी समर्थक सुरक्षाबलों के संघर्ष में कम से कम 49 लोग मारे गए।

अज जावियाह में विद्रोहियों के साथ सुरक्षाबलों का यह भीषण संघर्ष राजधानी त्रिपोली से 50 किलोमीटर दूर चल रहा है। अज जाविया विद्रोहियों के कब्जे में है और कज्जाफी के वफादार सुरक्षाबलों की उनसे झड़प होने के चलते अज जाविया तथा पूर्वी बंदरगाह रास लौंफ समेत कई शहरों से बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबर है। अल जजीरा ने प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सुरक्षाबलों द्वारा अज जाविया को अपने नियंत्रण में लेने के प्रयास किए जाने के दौरान भीषण संघर्ष में कम से कम 30 नागरिक मारे गए।

उधर एक अन्य घटनाक्रम में विद्रोहियों के कब्जे वाले बेंगाजी में एक सैन्य आयुध डिपो में दो विस्फोटों में कम से 19 लोगों की मौत हो गई तथा दर्जनों अन्य घायल हो गए। फिलहाल इन विस्फोटों के कारणों का पता नहीं चला है लेकिन अस्पताल सूत्रों के मुताबिक ये विस्फोट क्षेत्र में गद्दाफी समर्थक सुरक्षाबलों के हवाई हमले से नहीं हुए। गद्दाफी के युद्धक विमानों ने पहले विद्रोहियों का कब्जे वाले सैन्य अड्डों पर बम बरसाए थे, लेकिन उनका निशाना चूक गया था।

गौरतलब है कि लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी के 41 साल के शासन के खिलाफ जन विद्रोह के बाद देश का पूर्वी हिस्सा खासकर बेंगाजी के आसपास का इलाका कज्जाफी के नियंत्रण से निकल गया। गद्दाफी के खिलाफ यह विद्रोह फरवरी में शुरू हुआ था

Friday, March 4, 2011

लीबिया मुद्दे पर अमेरिका को ईरान की धमकी


त्रिपोली : लीबिया में जारी संकट अब गंभीर समस्या में तबदील होता जा रहा है। अमेरिका, इस मुद्दे में हस्तक्षेप कर लीबिया के शासक तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी को घेरने की तैयारी में जुटा है। जहां एक ओर दुनिया के कई मुल्क, गद्दाफ़ी का विरोध कर अमेरिका की ज़ुबान बोल रहे हैं। तो वहीं हमेशा से अमेरिका की मुख़ालफ़त करने वाले ईरान ने धमकी के रूप में अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका या नाटो सेनाओं ने लीबिया में सैन्य कार्रवाई की तो उनके सैनिकों की वहां कब्रगाह बना दी जाएगी। लीबिया के मुद्दे पर विश्व अब दो हिस्सों में बंटता नज़र आ रहा है।

41 साल से लीबिया के शासन पर क़ाबिज़ तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी ने भी धमकी दे डाली है कि यदि विदेशी सेनाओं के लीबिया में हस्तक्षेप किया तो हजारों लीबियाई नागरिक मारे जाएंगे और देश में खून की नदियां बहेंगी। गद्दाफी ने अपने समर्थकों और विदेशी मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश को बचाने के लिए अंतिम व्यक्ति तक से लड़ाई लड़ेंगे।

लीबिया का संकट धीरे-धीरे बड़े युद्ध में भी बदलने के आसार दिख रहे हैं। अमेरिका के विरोधी देश, धीरे-धीरे या तो गद्दाफी के पक्ष में हैं या फिर वे चुप हैं। ईरान ने खुलकर धमकी दी है कि यदि नाटो सेनाओं ने लीबिया पर सैन्य कार्रवाई की तो वहां उसके सैनिकों की कब्रगाह बन जाएगी। ईरान के राष्ट्रपति मुहम्मद अहमजनेजाद ने धमकी दी कि यदि अमेरिका और उसके मित्र देशों ने उत्तरी अफ्रीका या फिर मध्य पूर्वी देशों में किसी पर भी हमला बोलने की कोशिश की, तो उन्हें करारा जवाब मिलेगा।

अमेरिका ने अपने दो युद्ध पोत लीबिया के लिए पहले ही रवाना कर दिए हैं, जो लीबिया के नजदीक पहुंच रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन कह चुके हैं कि वे लीबिया को नो फ्लाइंग जोन घोषित करना चाहते हैं। इस बारे में संयुक्त राष्ट्र को अंतिम निर्णय लेना है।

Wednesday, March 2, 2011

लीबिया में गृह युद्ध की स्थिति, विरोधियों पर बरसे बम


त्रिपोली : लीबिया में सरकार और विरोधियों के बीच चल रहा संघर्ष लगभग गृह युद्ध में तब्दील हो गया है। राजधानी त्रिपोली के चारों ओर विरोधियों ने क़ब्ज़ा कर लिया है। वहीं, तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी विरोधियों से निपटने के लिये अब हवाई हमलों का सहारा ले रहे हैं। जहां पूरी दुनिया से कर्नल गद्दाफी पर पद छोड़ने का दबाव बढ़ता जा रहा है। तो वहीं, इन सब बातों को दरकिनार करते हुए आज तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी ने अपने ही नागरिकों पर हवाई हमले किए।

जानकारी के अनुसार लीबिया के पूर्वी दिशा में स्थित शहर अजदाबिया पर गद्दाफी के खिलाफ उठ खड़ी हुई जनता ने कब्जा जमा रखा है। आज सुबह दो युद्धक विमानों ने इस शहर पर हवाई हमले किए। गद्दाफी की समर्थक फौजें भी शहर पर कब्जा करने के लिए आगे बढ़ रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आज दो विमानों ने शहर पर बमबारी की। गद्दाफी समर्थक फौजों ने इस शहर के पास में स्थित बड़ी ऑइल रिफाइनरी पर भी कब्जा कर लिया है। अब वे शहर पर कब्जा करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। सिरते ऑयल कंपनी के मैनेजर के मुताबिक़, अजबादिया के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित रिफायनरी पर गद्दाफी समर्थकों ने कब्जा कर लिया है।

Saturday, February 26, 2011

लीबिया से भारतीयों की वापसी शुरू


नई दिल्ली : लीबिया में बद से बद्तर होते जा रहे हालातों के मद्देनज़र, सरकार द्वारा लीबिया में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। विदेश सचिव निरुपमा राव ने इस मामले में वरिष्ठ अधिकारों के साथ एक बैठक की और लीबिया में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की योजना की समीक्षा की।

ग़ौरतलब है कि लीबिया के तानाशाह नेता कर्नल मुअम्‍मर गद्दाफी द्वारा पूरे लीबिया को खाक में मिला देने की धमकी के बाद से भारतीय नागरिकों को वापस लाने की कोशिशों में तेज़ी आई है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक 360 यात्रियों की क्षमता वाले बोइंग 747 और 280 लोगों की क्षमता वाले एयरबस ए-330 त्रिपोली के लिए रवाना कर दिए गए हैं जो आज शाम तक 640 भारतीयों को लेकर दिल्‍ली लौट आएंगे। भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस जलश्‍व और आईएनएस मैसूर भी आज सुबह मुंबई से लीबिया के लिए रवाना हो गए हैं जहां उसे पहुंचने में 10-11 दिन लगेंगे। भारतीय सेना का आईएल-76 भी मदद के लिए भेजे जाने के लिए तैयार कर लिया गया है।

लीबिया के अधिकारियों की ओर से त्रिपाली में भारतीय उड़ानों को उतारने की अनुमति मिल जाने के बाद ये कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय ने बताया कि स्कोटिया प्रिंस जहाज को 2 मार्च को बेनगाजी भेजा जाएगा जहां से वो 1200 लोगों को एलेक्सज़ेन्ड्रिया लेकर आएगा। इसके बाद एयर इंडिया के विमान उन्हें भारत लाएंगे। 750 यात्रियों की क्षमता वाले जहाज को भी लोगों को बेनगाज़ी से एलेक्सज़ेन्ड्रिया लाने के लिए तैनात किया जाएगा। तोबरुक से 150 भारतीय नागरिकों को सड़क के जरिए मिस्र के सीमा पर स्थित सालुम तक लाया जाएगा। उनके साथ भारतीय राजदूत भी रहेंगे और फिर दो टुकड़ि‍यों में बांटकर उन्हें 26 और 28 फरवरी को काहिरा तक लाया जाएगा जहां से उन्हे विमान से भारत के लिये रवाना होंगे।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि त्रिपोली, काहिरा और ट्यूनिसिया में भारतीय दूतावास लगातार वहां के हालात पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार भी भारतीयों को जल्द ही सुरक्षित भारत लाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। लीबिया में 18 हजार भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। इस बीच विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि लोगों को लीबिया से निकालने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जायगा। मंत्रालय ने लोगों को सावधान किया है कि वे धनराशि मांगने वाले अवांछनीय तत्वों से सावधान रहें और उनके बहकावे में नहीं आएं।

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