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Wednesday, April 6, 2011

लीबिया-ट्यूनीशिया सीमा पर पहुंची एंजेलिना


हॉलीवुड अदाकारा एंजेलिना जोली लीबिया में जारी हिंसा की वजह से ट्यूनीशिया में सीमा शिविरों में दिन गुजार रहे शरणार्थियों से मिलने पहुँचीं।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने ट्यूनीशिया की सरकारी समाचार एजेंसी टीएपी के हवाले से बताया कि इस सीमा पर स्थित चौचा शिविर में मौजूद विभिन्न देशों के शरणार्थियों ने जोली का गर्मजोशी से स्वागत किया। जोली ने अधिकारियों को उनके मानवीय कार्यो के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि संघर्ष से प्रभावित हुए लोगों की मुश्किलें दूर करने के लिए सभी पक्षों को हस्तक्षेप करना चाहिए।

इस अमेरिकी अभिनेत्री ने शरणार्थियों के यूएन उच्चायुक्त के लिए सद्भावना दूत के तौर पर इन शिविरों का दौरा किया। यूएनएचसीआर के बयान के मुताबिक जोली ने शरणार्थियों के लिए और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सहायता की माँग की।

Tuesday, March 15, 2011

लीबिया: गद्दाफी ने भारत से मांगा समर्थन


नई दिल्‍ली : दुनिया भर से विरोध की मार झेल रहे लीबिया के तानाशाह शासक मुअम्मर गद्दाफ़ी ने अब भारत से मदद की गुहार लगाई है। अपनी इस मांग को मनवाने के लिये गद्दाफ़ी ने अपनी तेल कंपनियों में भारत को साझीदारी देने की पेशकश की है और बदले में भारत से राजनीतिक समर्थन मांगा है। गद्दाफी ने लीबिया की राजधानी त्रिपोली में भारत के राजदूत से मुलाकात में यह पेशकश की है।

भारत के अलावा, उन्‍होंने चीन और रूस के राजदूतों से भी मुलाकात की। गद्दाफी ने तीनों राजदूतों को कहा कि लीबिया में विद्रोह शुरू होने के बाद से पश्चिमी तेल कंपनियां भाग रही हैं। लीबिया में तेल का उत्‍पादन कम हो रहा है। ऐसे में इन कपंनियों की हिस्‍सेदारी भारत, चीन व रूस ले सकते हैं। बदले में वे लीबिया सरकार को समर्थन दें।

ग़ौरतलब है कि अफ्रीकी देशों के तेल संसाधनों में हिस्‍सेदारी के लिए भारत को लगातार चीन से प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है। पर ज्‍यादा निवेश की मजबूरी के चलते वह इस मामले में पिछड़ रहा है।

लीबिया में भारत के राजदूत एम. मनिमेकलाई और गद्दाफी की मुलाकात की दिल्‍ली में सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है। पर सूत्रों ने बताया कि लीबियाई नेता ने भारतीय राजदूत को धन्‍यवाद देने के लिए बुलाया था। यह धन्‍यवाद अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से लीबिया पर आयद प्रतिबंध का विरोध करने के लिए दिया गया।

भारत अब तक लीबिया पर आर्थिक प्रतिबंध के खिलाफ रहा है। भारत के मुताबिक़, जनता को मुश्किल में डालने वाला कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। अगर किसी देश के शासक का विरोध किया जा रहा हो तो इसकी सज़ा उस देश की जनता को नहीं दी जानी चाहिये। भारत लीबिया को नो फ्लाई जोन घोषित करने या उसके खिलाफ सैन्‍य ताकत के इस्‍तेमाल का भी विरोध करता रहा है। जबकि ब्रिटेन और फ्रांस लीबिया को नो फ्लाई जोन बनाने की वकालत करते रहे हैं।

Saturday, March 5, 2011

लीबिया में संघर्ष, 49 मरे


काहिरा: लीबिया के पूर्वी इलाके में हुए बम धमाकों एवं विद्रोहियों के साथ मुअम्मर गद्दाफी समर्थक सुरक्षाबलों के संघर्ष में कम से कम 49 लोग मारे गए।

अज जावियाह में विद्रोहियों के साथ सुरक्षाबलों का यह भीषण संघर्ष राजधानी त्रिपोली से 50 किलोमीटर दूर चल रहा है। अज जाविया विद्रोहियों के कब्जे में है और कज्जाफी के वफादार सुरक्षाबलों की उनसे झड़प होने के चलते अज जाविया तथा पूर्वी बंदरगाह रास लौंफ समेत कई शहरों से बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबर है। अल जजीरा ने प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सुरक्षाबलों द्वारा अज जाविया को अपने नियंत्रण में लेने के प्रयास किए जाने के दौरान भीषण संघर्ष में कम से कम 30 नागरिक मारे गए।

उधर एक अन्य घटनाक्रम में विद्रोहियों के कब्जे वाले बेंगाजी में एक सैन्य आयुध डिपो में दो विस्फोटों में कम से 19 लोगों की मौत हो गई तथा दर्जनों अन्य घायल हो गए। फिलहाल इन विस्फोटों के कारणों का पता नहीं चला है लेकिन अस्पताल सूत्रों के मुताबिक ये विस्फोट क्षेत्र में गद्दाफी समर्थक सुरक्षाबलों के हवाई हमले से नहीं हुए। गद्दाफी के युद्धक विमानों ने पहले विद्रोहियों का कब्जे वाले सैन्य अड्डों पर बम बरसाए थे, लेकिन उनका निशाना चूक गया था।

गौरतलब है कि लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी के 41 साल के शासन के खिलाफ जन विद्रोह के बाद देश का पूर्वी हिस्सा खासकर बेंगाजी के आसपास का इलाका कज्जाफी के नियंत्रण से निकल गया। गद्दाफी के खिलाफ यह विद्रोह फरवरी में शुरू हुआ था

Sunday, February 27, 2011

लीबिया से स्वदेश लौट 528 भारतीय


नई दिल्ली : लीबिया में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण वहां फंसे हज़ारों भारतीय नागरिकों में से 500 से अधिक भारतीय नागरिकों को लेकर एयर इंडिया के दो विशेष विमान राजधानी दिल्ली पहुंच गए हैं। वहां जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण इन भारतीयों की जिंदगी खतरे में थी। भारतीय नागरिकों की अगवानी के लिए विदेश राज्य मंत्री ई.अहमद और विदेश सचिव निरूपमा राव हवाईअड्डे पर मौजूद थे। बोइंग 747 की पहली उ़डान 291 भारतीयों को लेकर शनिवार में लगभग आधी रात के समय यहां पहुंची। दूसरी उ़डान में एयरबस ए 330 में सवार होकर 237 भारतीय नागरिक लीबिया की राजधानी त्रिपोली से रविवार सुबह 4.10 बजे यहां पहुंचे।

एयर इंडिया की दो अन्य उ़डानें भी दिन में लीबिया के लिए प्रस्थान करने वाली हैं। ये दोनों उ़डानें भी वहां से 500 से अधिक भारतीय नागरिकों को लेकर वापस लौटेंगी। दिल्ली पहुंचे एक यात्री ने कहा, ""दिक्कत मुख्य रूप से त्रिपोली के बाहर है। हम लोग संकट में नहीं थे, लेकिन इस बात का भय तो था कि निकट भविष्य में यह संकट त्रिपोली में हम तक पहुंच सकता है।" नागरिक ने कहा, "हम निजी कम्पनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए दूरवर्ती शिविरों में रहने वालों को लेकर चिंतित हैं।"

एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "पहला विमान, बोइंग 747, 291 यात्रियों को त्रिपोली से लेकर यहां रात 11.55 बजे पहुंचा। इस विमान ने यहां से शाम 4.30 बजे लीबिया के लिए उ़डान भरा था।"" विमान को इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे (आईजीआईए) के अंतर्राष्टीय टर्मिनल के बगल में टर्मिनल 2 पर लाया गया। इस टर्मिनल को फिलहाल हज यात्रा जैसे विशेष उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

ई.अहमद ने घोषणा की कि लीबिया से लौटने वाले सभी भारतीयों को उनके मूल स्थान तक पहुंचाने के लिए सरकारी खर्च पर सभी बंदोबस्त किए गए हैं। अहमद ने कहा, "मंत्रालय ने यात्रियों के लिए सभी बंदोबस्त किए हैं... आपको एक पैसा भी खर्च नहीं करना है।" प्रवासी भारतीय मामलों के सचिव ए.दीदार सिंह भी अन्य कई अधिकारियों के साथ वहां मौजूद थे। अधिकारियों ने कहा कि लौटने वाले भारतीय नागरिकों के लिए विशेष बंदोबस्त किए गए हैं। उनके लिए भोजन के साथ ही टेलीफोन सेवा सुलभ कराई गई है, ताकि वे अपने परिजनों से सम्पर्क कर सकें। इस बीच भारतीय नौसेना के तीन पोतों ने भी 18,000 भारतीयों को वहां से निकालने में मदद देने हेतु लीबिया के लिए प्रस्थान कर चुका है।

वापस लौटे लोगों को अपने गृहनगर जाने के लिए ट्रेन और विमानों की टिकट तत्काल उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। साथ ही यात्रियों की मदद के लिए कम से कम 12 प्रदेशों के आयुक्त कार्यालयों के अधिकारी मौजूद थे।

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