
वाशिंगटन/तेहरान : मिस्र के बाद ईरान में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के ऊपर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बयान ने शायद इस मुद्दे को हवा दी है। ईरान के प्रेस टीवी द्वारा वाशिंगटन से जारी एक रपट के मुताबिक़ ओबामा, ईरान में और विरोध प्रदर्शन देखना चाहते हैं।
ओबामा ने व्हाइट हाउस में मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, "हमारी आशा एवं आकांक्षा यह है कि हम लगातार यह देखना चाहते हैं कि ईरान की जनता के पास अधिक आजादी और अपेक्षाकृत अधिक प्रतिनिधित्व वाली सरकार के लिए अपनी उत्कंठा जाहिर करने का साहस है।"
प्रेस टीवी ने कहा है कि ओबामा की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब इसके पहले सोमवार को, 2009 के राष्ट्रपति चुनाव में पराजित हुए उम्मीदवारों- मीर हुसैन मौसावी और मेहदी करौबी के समर्थक ईरान की राजधानी तेहरान में विरोध प्रदर्शन के लिए जमा हो गए थे और उन प्रदर्शनकारियों ने जमकर उतपात मचाया था।
मौसावी और करौबी ने मिस्र एवं ट्यूनिशिया में हुए विद्रोहों के समर्थन में सोमवार को रैली का आयोजन किया था। दोनों विपक्षी नेता फिलहाल नज़रबंद हैं और विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने में अक्षम हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष अली लारिजानी ने इन विरोध प्रदर्शनों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका का हाथ है। उन्होंने आगे कहा कि वाशिंगटन, मध्य पूर्व में चल रहे आजादी के आंदोलनों को ईरान के समर्थन से खफा है।
लारिजानी ने कहा, "मुख्य मकसद विरोध प्रदर्शनों को खड़ा करने का था, ताकि वे दावा कर सकें कि क्षेत्र में अमेरिका समर्थित तानाशाहों के यहां संकट फैल रहा है और ईरान जो कि क्षेत्र में लोकतंत्र का अगुआ रहा है, उसके यहां भी अंदरूनी समस्याएं हैं।"
ज्ञात हो कि ईरानी सांसदों ने मौसावी और करौबी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की है और अनधिकृत रैलियों के लिए उनकी निंदा की है। इन रैलियों में दो व्यक्तियों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं।
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