
नई दिल्ली : अब प्रदेश सरकार ने तिहाड़ जेल में बंद कैदियों को एक अनोखा काम सौंपने की योजना बनाई है। तिहाड़ में बंद ये क़ैदी अब आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार करेंगे, साथ ही इन उत्पादों को कैदियों के उपचार के लिये भी इस्तेमाल किया जाएगा। गुणों के विवरण के साथ इन्हें आकर्षक पैकिंग में बाजार में भी उतारा जाएगा। उम्मीद है कि जेल प्रशासन की इस महत्वाकांक्षी योजना पर सप्ताह भर में ही काम प्रारंभ हो जाएगा, लेकिन इसके अपेक्षित परिणाम सामने आने में करीब एक साल का समय लगेगा।
जानकारी के मुताबिक आगामी सप्ताह से तिहाड़ की जेल नं. 1, 3, 5, 6, 7 में औषधीय पौधे रोपे जाएंगे। इनमें चंदन, रूद्राक्ष, अमलतास, जटामासी, आंवला, बेलगिरि, बेलपत्र, सीता अशोक, भृंगराज, कपूर, सफेद मूसली, मुश्क दाना, हार- श्रृंगार, हरड़, बहेड़ा, गिलोय, लेमन तुलसी, लेमन ग्रास, अर्जुन की छाल एवं गुड़मार इत्यादि प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस्के लिये जिम्मेदार व पर्यावरण प्रेमी कैदियों का एक विशेष समूह बनाकर उनको इन सभी पौधों की देखरेख का कां सौंपा जाएगा।
ये एक अहम योजना है, जिसे जेल प्रशासन एवं दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में शुरू किया जाएगा। इसके बारे में संस्थान के मीडिया प्रमुख स्वामी विशालानंद ने जानकारी दी कि बहुत से पौधे साल भर के भीतर अपने गुणों का लाभ देने के लिए तैयार हो जाएंगे तो कुछ पौधों को दो से तीन साल का वक्त लगेगा। इनसे प्राप्त होने वाली जड़ी बूटियों, पत्तों, फलों और छाल आदि के प्रयोग से विभिन्न रोगों का उपचार किया जा सकेगा। मसलन, अमलतास के पत्ते कब्ज में, गुडमार के पत्ते मधुमेह में, गिलोय प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, हरड़ बहेड़ा पेट संबंधी रोगों तो आंवला ’विटामिन सी’ की कमी से होने वाले रोगों के उपचार में काफी मददगार साबित होता है।
तिहाड़ के महानिदेशक नीरज कुमार के मुताबिक हालांकि बाजार में उक्त आयुर्वेदिक उत्पाद इस समय भी उपलब्ध हैं लेकिन उन्हें पूरी तरह से प्रामाणिक और मिलावट रहित नहीं कहा जा सकता है। जबकि तिहाड़ के सभी उत्पाद पूर्णतया शुद्ध एवं प्रामाणिक होते हैं।
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