
नई दिल्ली : भाजपा के शीर्ष नेता द्वारा काला धन मामले में यूपीए की चेयरमैन सोनिया गांधी से माफ़ी का इज़हार करना उनके पार्टी के नेताओं को नागवार गुज़र रहा है। पार्टी स्तर पर गठित की गई उनकी समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि विदेशी बैंकों मे सोनिया गांधी और राजीव गांधी के खाते हैं। फिर सोनिया गांधी ने 15 फरवरी को आडवाणी को खत लिखा था कि उनका व उनके परिवार के किसी सदस्य का विदेशी बैंक में खाता नहीं है और भाजपा की ओर से ऐसे आरोप लगाए जाने से उन्हें बहुत कष्ट पहुंचा है।
इसके जवाब में आडवाणी ने 16 फरवरी को सोनिया गांधी को पत्र लिखकर माफ़ी का इज़हार किया था कि उन्हें सोनिया गांधी को दुख पहुंचाने का बेहद अफसोस है। हालांकि, आडवाणी के करीबी सूत्रों ने इसे पार्टी के शीर्ष नेता का बड़प्पन करार दिया है, मगर भाजपा में इस पर विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी के कई सांसदों व नेताओं ने दबी जुबान में उनके खेद जताए जाने को गैर-जरूरी करार दिया।
इन नेताओं के मुताबिक़, संसद सत्र से ठीक पहले आडवाणी के इस कदम से भ्रष्टाचार पर घिरी कांग्रेस का पलड़ा भारी हो गया है और पार्टी के अभियान पर पानी फिरने का खतरा है। संघ के वरिष्ठ सूत्रों ने भी आडवाणी के कदम पर हैरानी जताई है। एक अन्य नेता ने पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी इस मामले में गठित टास्क फोर्स पर थोप दी जिसकी रिपोर्ट में सोनिया व राजीव गांधी का नाम लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि भाजपा की ओर से काले धन की समस्या पर एक टास्क फोर्स का गठन किया गया था जिसने अपनी रिपोर्ट में सोनिया व पूर्व पीएम राजीव गांधी के विदेशों खातों की बात कही थी। इस रिपोर्ट को आडवाणी सहित एनडीए के तमाम आला नेताओं ने जारी किया था। सोनिया गांधी ने जब पत्र लिखकर इसका खंडन किया तो आडवाणी ने उन्हें जवाबी चिट्ठी लिखकर इस मामले में क्षमा प्रकट की थी।
भाजपा की वेबसाइट पर जारी किए गए पत्र में आडवाणी ने सोनिया लिखा है, ‘मुझे खुशी है कि आपने काले धन के मुद्दे का साफ शब्दों में खंडन किया है। अगर आपने यह खंडन पहले ही कर दिया होता तो टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में इसका ख्याल रखा होता। बहरहाल, मैं आपको हुई पीड़ा के लिए बेहद खेद व्यक्त करता हूं।’
उधर, एक अन्य वरिष्ठ सांसद ने आडवाणी के खेद जताने के बजाय टास्क फोर्स के कामकाज पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उनका कहना था कि टास्क फोर्स में शामिल किए गए सदस्यों को वित्तीय मामलों की धेले भर भी जानकारी नहीं थी। उन्होंने तो केवल अखबारों की कटिंग जमा करके अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी। पार्टी के ज्यादातर नेता शुक्रवार को मीडिया से कन्नी काटते रहे। इसके अलावा, बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सोनिया को लिखे पत्र की जानकारी सार्वजनिक तौर पर दी थी मगर इसपर किसी तरह की टिप्पणी से परहेज किया।