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Friday, March 11, 2011

जेपीसी की पहली बैठक 24 मार्च को


नई दिल्ली : विपक्ष के साथ कड़े टकराव के बाद 2जी स्पेक्ट्रम मामले में जेपीसी जांच के लिये रज़ामन्द हुई केंद्र सरकार अब इस ओर पहला क़दम उठाने जा रही है। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की पहली बैठक 24 मार्च को होगी। जेपीसी के अध्यक्ष पीसी चाको ने बताया कि बैठक में समिति के रोडमैप को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसमें यह भी तय किया जाएगा कि किन लोगों को बुलाया जाएगा और कौन-से दस्तावेज मांगे जाएंगे।

तीस सदस्यीय जेपीसी संसद के अगले सत्र में अपनी रिपोर्ट देगी। उधर, इस घोटाले संबंधी कैग की रिपोर्ट पर लोक लेखा समिति (पीएसी) तेजी से जांच में लगी हुई है और लगातार बैठकें हो रही हैं। पीएसी अब प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को बुलाने की तैयारी में है।

इस घोटाले में सरकार को 1 लाख 76 हज़ार करोड़ रूपयों की राजस्व हानि पहुंची थी। एश ओ आराम की ज़िंदगी गुज़ारने वाले इस घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा अपनी काली करतूतों के कारण तिहाड़ जेल में सलाख़ों के पीछे की ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं।

Tuesday, February 8, 2011

एस बैंड घोटाला: प्रधानमंत्री को घेरने की तैयारी में विपक्षी दल


नई दिल्ली : घोटालों के कारण विपक्ष के निशाने पर आ चुकी केंद्र सरकार के लिये मुसीबतों का पहाड़ बनता जा रहा है। हाल ही में प्रकाश में आए ’एस बैंड घोटाले’ ने सरकार के लिये घोटालों की आग में घी डालने का काम किया है। जैसे-जैसे घोटालों की संख्या बढ़ती जा रही है वैसे ही सरकार पर विपक्ष के हमले तेज़ होते जा रहे हैं। घोटालों का जिन्न सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा है और सरकार की छवि धूमिल होती जा रही है।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद ’इसरो’ से जुड़े एस बैंड स्पेक्ट्रम आवंटन में सरकार को दो लाख करोड़ रुपए के राजस्व के नुकसान का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इसरो विभाग सीधे प्रधानमंत्री के तहत आता है, वहां पर इतना बड़ा घोटाला होना बेहद गंभीर मामला है। इसलिए प्रधानमंत्री तत्काल ही स्थिति स्पष्ट करें और इस आवंटन को रद्द करें।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में केंद्रीय मंत्री ए राजा की बलि देने के बाद भी सरकार संसद नहीं चला पा रही है। शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ जाने के बाद अब बजट सत्र भी संकट में आ गया हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के तहत आने वाले विभाग में एक और घोटाला सामने आने से सरकार के सामने मुसीबतें का अंबार लग गया है। इस घोटाले ने विपक्ष को और ज्यादा हमलावर बना दिया है। अब विपक्ष द्वारा इसरो और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए समझौते की जांच कराने की भी मांग की जा रही है। भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने प्रधानमंत्री से सवाल पूछा है कि इस स्पेक्ट्रम को एक निजी कंपनी को बिना नीलामी के किस आधार पर दिया गया?

ग़ौरतलब है कि इसरो ने इस दुर्लभ स्पेक्ट्रम में से 70 मेगा हर्टज देवास मल्टीमीडिया नाम की कंपनी को 20 साल के लिए दिया है। इस कंपनी के चेयरमैन इसरो के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार एमजी चंद्रशेखर है। इस स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिये एमटीएनएल व बीएसएनएल से लगभग साढ़े बारह हजार करोड़ रुपए लिये गये, जबकि देवास मल्टीमीडिया को मात्र एक हजार करोड़ में आवंटित किया गया। कैग ने सरकार को थोड़ी राहत देते हुए कहा कि मीडिया में जो बाते आ रही है, वह उसके आडिट का निष्कर्ष नहीं है। अभी यह काम जारी है।

वामपंथी दलों ने भी इस मामले पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस आवंटन में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि अंतरिक्ष विभाग को सीधे प्रधानमंत्री के तहत आता है। इसे तो वह किसी और पर डाल भी नहीं सकते हैं। इससे सीधे देश की सुरक्षा पर असर पड़ेगा। चारों वामपंथी दल इस मुद्दे को भी अपनी जेपीसी मांग के साथ जोड़ेगे। चाहे सरकार इसके लिए अलग से जेपीसी बनाए या फिर बाकी तीन के लिए जो मांग कर रहे हैं, उसके साथ ही कराए।

कांग्रेस ने इस पर रक्षात्मक रवैया अपनाते हुए कहा कि कैग रिपोर्ट की एक प्रक्रिया होती है। उसे सदन में रखा जाता है, उसके बाद पीएसी को जाती है और वहां से जांच होकर सदन के सामने आती है। कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने उम्मीद जताई है कि यह मामला भी पीएसी के पास जा सकता है।

Monday, December 27, 2010

पीएम ने कहा पीएसी के सामने पेशी को तैयार

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिहं लोक लेखा समिति (पीएसी) के सामने पेशी को तैयार हैं उन्होंने 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही लोक लेखा समिति (पीएसी) को आज पत्र लिखकर उसके समक्ष पेश होने की इच्छा जताई। सूत्रों ने विस्तृत ब्यौरा दिए बिना बताया कि कांग्रेस अधिवेशन में की गई घोषणा के बाद प्रधानमंत्री ने समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को पत्र लिखकर यह पेशकश की।

मनमोहन सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह लोगों से कुछ नहीं छिपाना चाहते और अपनी प्रमाणिकता के सबूत के तौर पर उनका इरादा पीएसी के अध्यक्ष को लिखकर कहना है कि अगर समिति उन्हें पेश होने के लिए कहती है तो वह पेश होने को खुशी से तैयार हैं।

सिंह ने कहा था कि विपक्ष यह गलत प्रचार कर रहा है कि सरकार इसलिए संयुक्त संसदीय समिति से जांच नहीं कराना चाहती ताकि प्रधानमंत्री को उसके समक्ष पेश होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि लोगों से छिपाने के लिए कुछ नहीं है।

सिंह ने पत्र ऐसे दिन लिखा है जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [कैग] पीएसी के समक्ष पेश हो रहे हैं। कैग की रिपोर्ट पर ही पिछले दिनों संसद में गतिरोध बना रहा और पूरे शीतकालीन सत्र में कामकाज बाधित हुआ।

कैग की रिपोर्ट से भाजपा और वाम दलों सहित विपक्ष को एक हथियार मिल गया है और वह संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराए जाने की मांग पर जोर दे रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा घोटाला है।

कांग्रेस के महाधिवेशन में पीएसी के समक्ष पेश होने की इच्छा प्रकट कर चुके प्रधानमंत्री ने पीएसी के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को लिखे पत्र में समिति के समक्ष उपस्थित होने की इच्छा प्रकट की। कांग्रेस महाधिवेशन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री ने कहा था कि अभी तक कोई भी प्रधानमंत्री पीएसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ लेकिन मैं पीएसी के समक्ष उपस्थित होने को तैयार हूं।

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