
नई दिल्ली : घोटालों के कारण आलोचनाओं का शिकार हो रही केंद्रीय सरकार के सामने अब एक नई चुनौती आ खडी हुई है। पिछले काफ़ी समय विपक्ष द्वारा जेपीसी जांच की मांग की जा रही है, जिसे लेकर सरकार ने हमेशा ही टाल-मटोल वाला रवैय्या अपनाए रखा है। शीतकालीन सत्र के दौरान जेपीसी जांच की मांग कर रहे विपक्ष ने संसद को चलने नहीं दिया। अब महज़ दो हफ्ते बाद संसद का बजट सत्र शुरू होना है। इसी कारण केंद्र सरकार ने आज वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर विपक्ष की जेपीसी की मांग के कारण बने गतिरोध को खत्म करने के लिये एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। जो कि बिना किसी हल के ख़त्म हो गई।
विपक्ष अब भी जेपीसी की मांग पर कायम है। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि जेपीसी से कम पर कोई बात ही नहीं हो सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता ने कहा कि सोनिया गांधी किसी भी घोटाले पर कुछ नहीं बोल रही हैं। आदर्श हाउसिंग घोटाला, 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला हुआ लेकिन सोनिया गांधी ने कोई भी बयान नहीं दिया है।
ग़ौरतलब है कि शीतकालीन सत्र विपक्ष की जेपीसी की मांग की भेंट चढ़ गया था। अब जब बजट सत्र को सही रूप से चलाने के लिये सरकार ने फिर प्रयास शुरू किया है। जेपीसी की मांग पर अड़िग भाजपा ने कहा कि इस मसले पर चर्चा की जरूरत नहीं है और सरकार सीधे जेपीसी का गठन करे। हालांकि वाम दलों ने कहा है कि वह जेपीसी की मांग पर चर्चा के लिए तैयार है, बशर्ते सरकार इसके गठन का वादा करे।
जबकि जेपीसी की मांग को लेकर चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए कांग्रेस का कहना है कि पार्टी एक प्रस्ताव पर विचार विमर्श के लिए तैयार है। सरकार संसद में एक प्रस्ताव पारित करना चाहती है जिसमें मतदान के जरिये ये पता लगाने की कोशिश की जायेगी कि कितने सदस्य जेपीसी के पक्ष में और कितने सदस्य जेपीसी के विपक्ष में है।






