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Sunday, July 24, 2011

अब तंबाकू से निखरेगी सुंदरता



तंबाकू का नाम आते ही सिगरेट, खैनी, गुटखा की चिंताजनक तस्वीर उभरती हैं, लेकिन जल्द ही भारत में इसका इस्तेमाल सुंदरता बढ़ाने और बुढ़ापे को दूर भगाने में किया जायेगा और तो और अगर देश में चल रहा कृषि अनुसंधान रंग लाया तो तंबाकू के तेल को खाद्य तेल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

सुंदरता के लिए तंबाकू के इस औषधीय उपयोग की तकनीक का पेटेंट तो आंध्रप्रदेश के राजामुंदी के केंद्रीय तंबाकू अनुसंधान संस्थान ने हासिल कर लिया है। अब इसके उद्यमियों को व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए हस्तांतरित करने की प्रक्रिया बाकी है। तंबाकू की मौजूदा किस्म का सिगरेट, खैनी या गुटखे के लिए इस्तेमाल होने का खतरा होता है, इसलिए अब एक नई किस्म तैयार हो रही है जिसका उपयोग सिर्फ औषधीय या तेल के लिए हो सकेगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत काम करने वाले इस संस्थान के निदेशक वैज्ञानिक डॉ. वी. कृष्णमूर्ति ने बताया-इससे किसी भी रूप में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थ नहीं बनाया जा सकेगा।

इतना ही नहीं तंबाकू की पत्तियों से निकाले जाने वाले सोलनसोल का इस्तेमाल टीबी के उपचार, घावों को भरने के लिए लिपिड तत्वों की कमी को दूर करने और सुंदरता बढ़ाने के लिए हो सकता है। तंबाकू से निकलने वाले शुद्ध निकोटीन को भी विटामिन के तौर पर उपयोग किया जा सकता है। तंबाकू के बीजों से निकलने वाले तेल को खाद्य तेल के रूप में इस्तेमाल करने के वास्ते सीटीआरआई ने हैदराबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन के साथ मिल कर शोध करना शुरू किया है।

Tuesday, April 5, 2011

अब दिल के लिए खतरा बना ज्यादा काम


लंदन: अगर आप भी आफिस में देर तक काम करने वालो में से एक है तो इस खबर पर ध्यान दें। एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि कार्यालयों में निर्धारित से अधिक समय तक काम करने से कर्मियों के स्वास्थ्य पर बहुत ज्यादा असर पड़ सकता है और उन्हें दिल का दौरा पड़ने संभावना और अधिक हो जाती है।

यूनिवर्सिटी कालेज लंदन में किए गए एक नए अध्ययन के मुताबिक, सात या आठ घंटे काम करने वालों के मुकाबले जो व्यक्ति 11 घंटे से अधिक समय तक काम करते हैं उनमें दिल का दौरा पड़ने की संभावना दो तिहाई बढ़ जाती है। अपने अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 39 से 62 साल उम्र के बीच के 7,095 सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया और 11 साल से अधिक समय तक इन पर किये गये शोध में 192 व्यक्तियों को दिल का दौरा पड़ा।

अध्ययन में इस बात का पता चला कि जो व्यक्ति 'नौ से पाच बजे' तक की नौकरी करते हैं उनके मुकाबले एक दिन में 11 घंटे से ज्यादा काम करने वालों में दिल का दौरा पड़ने की संभावना 67 प्रतिशत अधिक होती है। काम के घंटे पर किए गए इस अध्ययन में दिल की बीमारी के कारणों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह और ध्रूमपान के अलावा अतिरिक्त घंटे तक काम करने का पहलू भी चिकित्सकों को इलाज करने में लाभ पहुंचा सकता है।

'ऐनल्स आफ इंटरनल मेडिसीन' नामक पत्रिका में प्रकाशित इस नए अध्ययन में प्रोफेसर मिका किविमकी ने ब्रिटिश मीडिया को बताया कि लंबे समय तक काम करने से दिल का दौरा का पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। उनका कहना है कि हमारे नए अध्ययन से चिकित्सकों को इलाज करने में मदद मिलेगी।

Tuesday, February 8, 2011

रितिक के सिक्स पैक एब्स पर होगा अध्ययन



मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता रितिक रोशन के सिक्स पैक एब्स पर अब अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के अध्ययन का विषय बन गये है। विलमिंगटन स्थित यूनिवर्सिटी में फिल्म अध्ययन विभाग की सहायक प्रोफेसर नंदना बोस ने भारतीय सिनेमा पर आधारित अपनी किताब में रितिक की बॉडी को लेकर विशेष अध्याय तैयार किया है।

बोस के मुताबिक उन्होंने यह अध्याय रितिक के साथ फिल्म बना चुके निर्देशकों से बातचीत करने के बाद तैयार किया है। इस अध्याय का विशेष पहलू यह है कि रितिक ने अपनी पहली फिल्म से लेकर आखिरी फिल्म तक कैसे अपने शरीर पर काम किया? इसके अलावा इस किताब में अभिनेता की फिल्म जोधा अकबर, कृष, धूम-2 के लुक को लेकर भी चर्चा की गई है। अब जल्द ही यह किताब यूनिवर्सिटी के सभी छात्रों के लिए उपलब्ध होगी।

गौरतलब है कि रितिक ने फिल्म काइट्स के अंग्रेजी संस्करण के जरिए अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।

Tuesday, November 2, 2010

अब खतरे से खाली नहीं, नोएडा की ऊंची इमारतों में रहना



नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट ने खुलासा किया है कि दिल्ली से सटे नोएडा में बन रही ऊंची- ऊंची इमारतों में रहना कितना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बताया कि नोएडा की एक तिहाई इमारतों को भूकंपरोधी नहीं बनाया गया है। इसका पता लगाने के लिए एक सर्वे कराया गया था। जिसमें सामने आया है कि अगर रिक्टर स्केल पर 7 से ज़्यादा का भूकंप आता है, तो नोएडा में जान माल का भारी खतरा हो सकता है।

नोएडा अथॉरिटी की ओर से कराई गई एक रिसर्च में पता लगा है कि यहां के 30 फीसदी मकान भूकंप के लिहाज से सुरक्षित नहीं है। आपको बता दें कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा को भूकंप के लिहाज से हाई रिस्क जोन में रखा गया है। बावजूद इसके बड़ी संख्या में बिल्डर भूकंप के खतरे के हिसाब से इमारतें तैयार नहीं कर रहे हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट की जांच में यह भी साफ हुआ है कि अगर इन इलाकों में भूंकप आता है, तो जान माल का भारी नुकसान हो सकता है। नोएडा अथॉरिटी को खुद पता है कि बिल्डर कितनी बड़ी गड़बड़ी कर रहे हैं। इसके बाद भी अभी तक ऐसे बिल्डरों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में घर खरीदनेवालों को खुद ही इसकी पड़ताल करनी चाहिए कि बिल्डर ने भूकंपरोधी सर्टिफिकेट हासिल किया है या नहीं।

Monday, November 1, 2010

हेरोईन, कोकीन से ज्यादा घातक है शराब

लंदन: ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के बाद पाया है कि शराब कोकीन और तंबाकू से तीन गुना ज्यादा घातक होती है। उन्होंने घातकता साबित करने के लिए एक पैमाना बनाया और उसमें शराब को सबसे ज्यादा अंक मिले। जिससे साबित हो गया है हेरोइन और कोकीन अल्कोहल से कम घातक है|

नशे पर अध्ययन करने वाले इस समूह में ब्रिटेन की ड्रग्स के अध्ययन के लिए बनी वैज्ञानिक कमेटी के सदस्यों के अलावा यूरोप की अन्य विशेषज्ञ समिति के सदस्य शामिल हैं। उन्होंने नतीजा निकाला है, कि शराब व्यक्ति और समाज के लिए सबसे ज्यादा घातक है। उन्होंने हेरोइन को दूसरे स्थान और कोकीन को तीसरे स्थान पर रखा है।

ब्रिटेन की वैज्ञानिक समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर डेविड नट के अनुसार इस अध्ययन से साफ है कि शराब काफी नुकसानदेह है और इसके खिलाफ चलाई जाने वाली मुहीम जनता के हित में होती हैं। कई देशों में शराब और तंबाकू बेचने पर कोई नियंत्रण नहीं है, जबकि गांजा, हेरोइन और कोकीन बेचना अपराध है। नट ने कहा कि यह आश्चर्य है कि जो वस्तुएं ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं, उनके बेचने पर कोई पाबंदी नहीं है। नट की टीम ने कौन से नशा ज्यादा घातक है, तय करने के लिए मल्टीक्राइटेरिया डिसीजन एनेलिसिस(एमसीडीए) प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। उन्होंने ऐसे नौ बिंदु तय किए, जिनके आधार पर नशा व्यक्ति को नुकसान पहुंचाता है और सात ऐसे बिंदु तय किए जिनसे समाज को नुकसान होता है।

व्यक्तिगत नुकसान के लिए तय मानकों में नशे से मौत, स्वास्थ्य को नुकसान, आर्थिक नुकसान आदि शामिल हैं। जबकि समाज को नुकसान में नशे के बाद किए गए अपराध, पर्यावरण को नुकसान, परिवार में विवाद आदि बिंदु हैं। इतना ही नहीं शराब से लीवर, किडनी आदि के कैंसर का खतरा रहता है। आंकड़ों के अनुसार ब्रिटेन में प्रति 1,00,000 व्यक्तियों में 18.7 लोगों की शराब के कारण हर साल मौत हो रही है। 1991 में यह आंकड़ा केवल 9.1 था, जो अब बढ़कर दुगना हो गया है। महिलाओं में भी प्रति 1,00,000 महिलाओं में से शराब के कारण 9.6 महिलाओं की मौत हो रही है।

Saturday, October 23, 2010

हल्दी बनाती है कैंसर के इलाज को प्रभावी

पिछले छह सालों से भारतीय अमेरिकी अनुसंधान कर्ता और अध्ययन के अगुवा एरी श्रीवात्सन और कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के जॉनसन कैंसर सेंटर में कार्यरत प्रो. डॉ. मैरीलिन चांग हल्दी में पाए जाने वाले करकुमीन के गुणों का अध्ययन कर रहे हैं।

इस अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं का कहना है कि गुणकारी हल्दी में पाए जाने वाले करकुमीन को जब सिसप्लाटिन दवा में मिलाया जाता है तो इससे सिर और गले के कैंसर का इलाज ज्यादा असरकारक हो जाता है। दक्षिण और पश्चिम एशिया में हल्दी का काफी इस्तेमाल होता है और यह अपने चिकित्सीय गुणों के लिए जाना जाता है। पहले के अध्ययनों में पाया जा चुका है कि यह कुछ खास तरह के कैंसर को रोकने में प्रभावी होता है।

श्रीवात्सन ने कहा कि भारत में महिलाएँ सालों से हल्दी का इस्तेमाल करती रही हैं। उम्र के बढते प्रभाव को कम करने के लिए वे उसे अपनी त्वचा पर लगाती हैं। घावों को भरने में ही इसका इस्तेमाल किया जाता है। स्वांग ने कहा कि सिर और गले के कैंसर और खासतौर पर बाद की अवस्था में पड़ताल किए गए कैंसर खतरनाक होते हैं। इसमें बड़े स्तर की सर्जरी और कीमोथरेपी की जरूरत होती है।

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