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Monday, April 11, 2011

लीलावती अस्पताल पर आयकर का छापा



मुंबईः आयकर विभाग ने आज मुंबई के प्रतिष्ठित लीलावती अस्पताल की तलाशी ली। बांद्रा पश्चिम में स्थित इस अस्पताल में अक्सर अति विशिष्ट लोग इलाज कराने आते हैं। करीब सात अरब रुपए की कीमत वाला यह अस्पताल पारिवारिक विवाद का केंद्र बना हुआ है।

आयकर विभाग के अधिकारियों ने लीलावती अस्पताल के ट्रस्टियों और मालिक की ओर से की गई वित्तीय अनियमितता के आरोप में आज अस्पताल परिसर की तलाशी ली। अधिकारियों ने बताया कि उपनगरीय बांद्रा इलाके में स्थित इस चर्चित अस्पताल के बायो मेडिकल, खरीद और फ़ार्मा विभाग की तलाशी ली गई।

उच्चतम न्यायालय ने इस अस्पताल के ट्रस्टियों की कथित अनियमितता की जांच के लिये दायर याचिका पर पिछले सप्ताह केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को नोटिस जारी किया था। दिल्ली के रहने वाले याचिकाकर्ता हर्ष रघुवंशी ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि अस्पताल के ट्रस्टी प्रबोध मेहता, रश्मि मेहता, चेतन मेहता और भाविन मेहता ने बेइमानी से धन निकाला है और इन ट्रस्टियों ने अस्पताल से बेइमानी से पैसा निकालकर हवाला के जरिये मारिशस समेत विदेशी बैंकों में जमा किया।

Wednesday, January 26, 2011

गंभीर नहीं है सरकार काले धन पर:आडवाणी




भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने बुधवार को सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि आखिर सरकार विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वाले भारतीय नागरिकों के नाम कब जाहिर करेगी। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने उन देशों से भी जानकारी जुटाने के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई है, जो इसे साझा करने को इच्छुक हैं।

राष्ट्रध्वज फहराने के बाद अपने आवास पर आडवाणी ने कहा कि सरकार ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा था कि वह कुछ भी नहीं छिपाना चाहती है, लेकिन इसके साथ ही वह कुछ खुलासा भी नहीं करना चाहती है। आडवाणी वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी के कल के बयान का हवाला दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन को वापस लाने के मुद्दे पर एक अध्ययन समूह का गठन किया जाएगा।

आडवाणी के मुताबिक जर्मनी ने कहा है कि उसके पास ऐसे खाताधारियों की चार और सूचियाँ हैं जिसमें कुछ भारतीय नागरिकों के नाम भी है, लेकिन किसी ने इनके बारे में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने तीन वर्ष पहले उन्होंने विदेशों में पड़े भारतीय नागरिकों के काले धन को वापस लाने का मुद्दा उठाया था और सभी राजनीतिक दलों ने इस विचार का समर्थन किया था। इतना ही नहीं आडवाणी का कहना है कि इतनी बड़ी धनराशि विदेशों में पड़ी हुई है जिसका जनकल्याण के कार्य में सदुपयोग किया जा सकता है। लेकिन सरकार की सहायता के बिना यह संभव नहीं है।

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