Showing posts with label Ratan Tata. Show all posts
Showing posts with label Ratan Tata. Show all posts

Tuesday, February 15, 2011

'आरकॉम' व 'टाटा टेलीसर्विसेज' ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप


नई दिल्ली : अब 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में देश की दो बड़ी कंपनियों ने एक दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। रिलायंस कम्यूनिकेशन्स और टाटा टेली ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। 2जी स्पेक्ट्रम की बंदरबांट पर रतन टाटा और अनिल अंबानी भिड़ गए हैं। दोनों एक दूसरे पर 2जी पॉलिसी का फायदा उठाने के आरोप लगा रहे हैं।

रिलायंस कम्यूनिकेशन्स (आरकॉम) के मुताबिक़ टाटा टेली द्वारा आरकॉम के डुअल टेक्नोलॉजी पर उठाए गए सवालों में कोई दम नहीं है। कंपनी ने कहा है कि टाटा टेली की इस दलील को दिल्ली हाईकोर्ट और टीडीसैट पहले ही खारिज कर चुके हैं।

रिलायंस कम्यूनिकेशन्स ने ये भी कहा कि रतन टाटा का अचानक टाटा टेली से खुद को दूर करना संदेहास्पद लग रहा है। इसके जवाब में टाटा ग्रुप ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि टाटा टेली एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है न कि किसी एक परिवार की मल्कियत इसलिए टाटा ग्रुप को श्री रतन टाटा ग्रुप कहना गलत होगा।

टाटा टेली ने अपने बयान में कहा, 'यह वाकई पहेली है कि रिलायंस कम्युनिकेशन और दो अन्य ऑपरेटरों ने नीति घोषित किए जाने से पहले लाइसेंस के लिए आवेदन किया और डीओटी की मंजूरी हासिल की।' टाटा ग्रुप की कंपनी ने कहा कि यह और ज्यादा रहस्यमय है कि जनवरी 2008 में आरकॉम को तुरंत ही सभी सर्किलों के लिए स्पेक्ट्रम मिल गया, जबकि टीटीएसएल को 83 दिनों बाद डीओटी की मंजूरी मिली और उसके तीन साल बाद भी उसे दिल्ली और 9 टेलीकॉम सकिर्लों के 39 अहम जिलों में स्पेक्ट्रम नहीं मिल सका है।

रिलायंस कम्यूनिकेशन्स का कहना है कि जीएसएम लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी को तुरंत ही सभी सर्किलों में स्पेक्ट्रम भी मिल गया था, जबकि टाटा टेली को 83 दिनों के बाद दूरसंचार विभाग की मंजूरी मिली थी, यही नहीं जीएसएम लाइसेंस लेने के 3 साल बाद भी टाटा टेली को दिल्ली में स्पेक्ट्रम नहीं मिला है।

Thursday, January 13, 2011

गुजरात की सफलता में नैनो का हाथ



गांधी नगर: टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा का नैनो को बंगाल से उठाकर सानंद में स्थापित करने का फैसला गुजरात राज्य की सफलता में मील का पत्थर साबित हुआ है। रतन टाटा ने 2007 के वाइब्रैंट गुजरात समिट में भाग तो लिया था लेकिन वे उससे खुश नहीं थे। उसके बाद अक्टूबर 2008 में नैनो प्लांट को बंगाल से उठाकर सानंद लाया गया जिसके पीछे कॉरपोरेट लॉबीइस्ट नीरा राडिया का हाथ था।

नैनो का सानंद आना नरेन्द्र मोदी और गुजरात के लिए भी एक लैंडमार्क था। साथ ही रतन टाटा के इस एक निर्णय से मोदी की छवि बदल गई।

बिजनेस एनालिस्ट सुनील पारेख के मुताबिक, सबसे सस्ती कार होने के कारण नैनो को दुनिया भर में पब्लिसिटी मिली और हर किसी ने जानना चाहा कि यह कहां बनती है। तब गुजरात राज्य का नाम सस्ती कारें बनाने वाले डेस्टीनेशन के रुप में उभरा।

हालांकि नैनो की बिक्री बेशक उस रफ्तार से नहीं हो रही है जिससे होनी चाहिये। लेकिन इसने नरेन्द्र मोदी के राजनीतिक कद को काफी बढ़ा दिया है, जिसका फायदा उन्हें अगले चुनाव में भी मिलेगा।

Tuesday, November 23, 2010

एक चार्ज में 900 किलोमीटर चलेगी यह अनोखी कार



भारत की जानी मानी ऑटो कंपनी टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जैगुआर ने एक इलेक्ट्रिक कार डेवलप की है, जिसका नाम 'सी-एक्स75’ है। यह स्पेशल कार कंपनी की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में पेश की जा रही है। इस कार की खासियत है कि इसे एक बार चार्ज करने के बाद 900 किलोमीटर का सफर तय किया जा सकता है।

गुआर कार्स के डिजाइन डायरेक्टर इयान कैलम का कहना है कि इस कॉन्सेप्ट कार में वे सब सुविधाएं मौजूद हैं जो जैगुआर ब्रांड की कारों में होती हैं। इस कार को लॉस एंजलिस वाहन मेले में शनिवार को पेश किया जाएगा। लेकिन इस कार के ‘शो-केस’ से पहले ही इसकी जोर शोर से चर्चा हो रही है। हालांकि कंपनी ने अपनी तरफ से ये साफ कर दिया है कि यह सिर्फ कॉन्सेप्ट कार है और फिलहाल कंपनी इसका कमर्शियल प्रॉडक्शन नहीं करने वाली है। बावजूद इसके ‘सी-एक्स75’ में लोग काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

कैलम ने यह भी कहा कि खुद रतन टाटा भी इस कार को लेकर काफी उत्साहित हैं, और उन्हे इसका डिजाइन खूब पसंद आया है।

ADS

चिट्ठाजगत तुरंत छापो

चिट्ठाजगत

The Alex hotel New York