
नई दिल्ली : अब 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में देश की दो बड़ी कंपनियों ने एक दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। रिलायंस कम्यूनिकेशन्स और टाटा टेली ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। 2जी स्पेक्ट्रम की बंदरबांट पर रतन टाटा और अनिल अंबानी भिड़ गए हैं। दोनों एक दूसरे पर 2जी पॉलिसी का फायदा उठाने के आरोप लगा रहे हैं।
रिलायंस कम्यूनिकेशन्स (आरकॉम) के मुताबिक़ टाटा टेली द्वारा आरकॉम के डुअल टेक्नोलॉजी पर उठाए गए सवालों में कोई दम नहीं है। कंपनी ने कहा है कि टाटा टेली की इस दलील को दिल्ली हाईकोर्ट और टीडीसैट पहले ही खारिज कर चुके हैं।
रिलायंस कम्यूनिकेशन्स ने ये भी कहा कि रतन टाटा का अचानक टाटा टेली से खुद को दूर करना संदेहास्पद लग रहा है। इसके जवाब में टाटा ग्रुप ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि टाटा टेली एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है न कि किसी एक परिवार की मल्कियत इसलिए टाटा ग्रुप को श्री रतन टाटा ग्रुप कहना गलत होगा।
टाटा टेली ने अपने बयान में कहा, 'यह वाकई पहेली है कि रिलायंस कम्युनिकेशन और दो अन्य ऑपरेटरों ने नीति घोषित किए जाने से पहले लाइसेंस के लिए आवेदन किया और डीओटी की मंजूरी हासिल की।' टाटा ग्रुप की कंपनी ने कहा कि यह और ज्यादा रहस्यमय है कि जनवरी 2008 में आरकॉम को तुरंत ही सभी सर्किलों के लिए स्पेक्ट्रम मिल गया, जबकि टीटीएसएल को 83 दिनों बाद डीओटी की मंजूरी मिली और उसके तीन साल बाद भी उसे दिल्ली और 9 टेलीकॉम सकिर्लों के 39 अहम जिलों में स्पेक्ट्रम नहीं मिल सका है।
रिलायंस कम्यूनिकेशन्स का कहना है कि जीएसएम लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी को तुरंत ही सभी सर्किलों में स्पेक्ट्रम भी मिल गया था, जबकि टाटा टेली को 83 दिनों के बाद दूरसंचार विभाग की मंजूरी मिली थी, यही नहीं जीएसएम लाइसेंस लेने के 3 साल बाद भी टाटा टेली को दिल्ली में स्पेक्ट्रम नहीं मिला है।
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