Tuesday, February 15, 2011

निठारी हत्याकांड़: कोली की मौत की सज़ा बरक़रार


नई दिल्ली : देश भर में चर्चा का विषय बने निठारी हत्याकांड़ के आरोपी को दी गई मौत की सज़ा को बरक़रार रखते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने इस फ़ैसले पर अपनी मोहर लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने 14 वर्षीय रिंपा हलदर की हत्या करने के मामले को भयावह और बर्बर क़रार देते हुए आरोपी सुरिंदर कोली के ख़िलाफ़ ये फ़ैसला सुनाया।

निचली अदालत ने नोएडा के पास निठारी में लड़कियों के बलात्कार और उनकी हत्या के तीन मामलों में भी कोली को फासी की सजा सुनाई थी। अब न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू और न्यायमूर्ति ज्ञानसुधा मिश्रा की पीठ ने 39 वर्षीय कोली को सुनाई गई मौत की सजा पर अपनी मुहर लगा दी।

कोली के खिलाफ कुल 16 मामले दर्ज किए गए थे। कोली के मालिक मनिंदर सिंह पंढेर को रिंपा हलदर मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी लेकिन बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे बरी कर दिया था। लेकिन 54 वर्षीय पंढेर पर अन्य मामलों में मुकदमे चल रहे हैं।

पीठ ने कहा कि हमारे विचार से यह मामला दुर्लभ से दुर्लभतम की श्रेणी में आता है और इस मामले में आरोपी के लिये दया की कोई गुंजाइश ही नहीं है। कोली के इकबालिया बयान पर अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष स्वेच्छा से अपराध कबूला गया है और इसमें कोई कमी नहीं है। कोली ने अपने बयान में इस बात का जिक्र किया था कि वह किस तरह लड़कियों को बहलाता था और उन्हें बाद में मार देता था।

सबसे पहले गाजियाबाद की सीबीआई विशेष अदालत ने कोली को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था और आज सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी। पीठ ने 16 मामलों में से पहले में उसकी अपील को खारिज कर दिया। वहीं, शीर्ष अदालत ने पंढेर को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई की अपील पर अपना फैसला लंबित रखा।

कोली को गाजियाबाद की अदालत ने 13 फरवरी 2009 को पंढेर के साथ मौत की सजा सुनाई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 11 सितंबर 2009 को कोली की मौत की सजा को बरकरार रखा लेकिन पंढेर को आरोपमुक्त कर दिया। इसके बाद मृत रिंपा के पिता अनिल हलदर ने पंढेर को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ चुनौती दी थी और उसे भी मौत की सजा दिए जाने की माग की थी।

अदालत ने कहा कि सीबीआई की अपील पर फैसला करने से पहले वह अन्य मामलों में नतीजों का इंतजार करेगी, जिनमें पंढेर अपने नौकर कोली के साथ आरोपी है।

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