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Monday, May 2, 2011

हाई कोर्ट ने दी पायलटों को चेतावनी

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज एयर इंडिया के हड़ताली पायलटों से कहा कि वे काम पर लौटने के बारे में फैसला करें और यह हड़ताल अगले दिन जारी नहीं रहनी चाहिए।

न्यायमूर्ति बीडी अहमद और बीना बीरबल की एक खंडपीठ ने कहा, ‘आप हड़ताल समाप्त करें, हम प्रबंधन पर आपकी मांगों पर विचार करने के लिए दबाव डालेंगे।’ पिछले मंगलवार से कामकाज ठप करने वाले पायलटों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने से जुड़ी एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए पीठ ने यह बात कही। पीठ ने आज दोपहर से पायलटों को काम पर लौटने को कहा।

अदालत ने यह भी कहा, ‘यह हड़ताल अगले दिन जारी नहीं रहनी चाहिए।’ अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता एनके कौल और केटीएस तुलसी को कमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन की ओर से पेश होने तथा उनके तीन पदाधिकारियों को अपने मुवक्किल से निर्देश लेने को कहा।

पीठ ने उन्हें हड़ताल खत्म करने के अपने फैसले से अदालत को दोपहर दो बजकर 15 मिनट तक सूचित करने को कहा, जब अदालत अवमानना अर्जी पर सुनवाई फिर से शुरू करेगी।

एयर इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अरविंद जाधव ने कल कंपनी के सभी कर्मचारियों को एसएमएस भेजकर उन्हें पायलटों को हड़ताल समाप्त करने और बातचीत की मेज पर आने के लिए राजी करने को कहा। जाधव ने कर्मचारियों से कहा कि पायलट जिन मुद्दों को लेकर हड़ताल पर हैं वे पुराने मुद्दे हैं और मौजूदा प्रशासन को उनके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

मुंबई में एयर इंडिया के पायलटों ने गेटवे ऑफ इंडिया के पास कैंडल मार्च निकाला और एयर इंडिया चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जाधव की तुरंत बर्खास्तगी की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन उन्हें बातचीत के लिए नहीं बुलाकर अपने छिपे हुए एजेंडे को ही आगे बढ़ा रहे हैं और कंपनी को बंद कर उसका निजीकरण करना चाहता है।

पूर्ववर्ती इंडियन एयरलाइंस के करीब 800 पायलट हड़ताल पर हैं। कुल मिलाकर 1,200 पायलटों में से 400 उस समय की एयर इंडिया की इंडियन पायलट गिल्ड से जुड़े हैं जो कि ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ही संचालित करते थे। पूर्ववर्ती इंडियन एयरलाइंस से जुड़े पायलट जोकि विलय के बाद एयर इंडिया का हिस्सा बन गए हैं और आईसीपीए से जुड़े हैं। वे एयर इंडिया के अपने साथियों के समान वेतन की मांग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह मंगलवार को हड़ताल शुरू हुई थी तब से एयर इंडिया प्रबंधन नौ पायलटों को बर्खास्त कर चुका है। इसमें आईसीपीए के अध्यक्ष ए.एस. भिंडर और महासचिव रिषभ कपूर भी शामिल हैं।

Tuesday, February 15, 2011

'आरकॉम' व 'टाटा टेलीसर्विसेज' ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप


नई दिल्ली : अब 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में देश की दो बड़ी कंपनियों ने एक दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। रिलायंस कम्यूनिकेशन्स और टाटा टेली ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। 2जी स्पेक्ट्रम की बंदरबांट पर रतन टाटा और अनिल अंबानी भिड़ गए हैं। दोनों एक दूसरे पर 2जी पॉलिसी का फायदा उठाने के आरोप लगा रहे हैं।

रिलायंस कम्यूनिकेशन्स (आरकॉम) के मुताबिक़ टाटा टेली द्वारा आरकॉम के डुअल टेक्नोलॉजी पर उठाए गए सवालों में कोई दम नहीं है। कंपनी ने कहा है कि टाटा टेली की इस दलील को दिल्ली हाईकोर्ट और टीडीसैट पहले ही खारिज कर चुके हैं।

रिलायंस कम्यूनिकेशन्स ने ये भी कहा कि रतन टाटा का अचानक टाटा टेली से खुद को दूर करना संदेहास्पद लग रहा है। इसके जवाब में टाटा ग्रुप ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि टाटा टेली एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है न कि किसी एक परिवार की मल्कियत इसलिए टाटा ग्रुप को श्री रतन टाटा ग्रुप कहना गलत होगा।

टाटा टेली ने अपने बयान में कहा, 'यह वाकई पहेली है कि रिलायंस कम्युनिकेशन और दो अन्य ऑपरेटरों ने नीति घोषित किए जाने से पहले लाइसेंस के लिए आवेदन किया और डीओटी की मंजूरी हासिल की।' टाटा ग्रुप की कंपनी ने कहा कि यह और ज्यादा रहस्यमय है कि जनवरी 2008 में आरकॉम को तुरंत ही सभी सर्किलों के लिए स्पेक्ट्रम मिल गया, जबकि टीटीएसएल को 83 दिनों बाद डीओटी की मंजूरी मिली और उसके तीन साल बाद भी उसे दिल्ली और 9 टेलीकॉम सकिर्लों के 39 अहम जिलों में स्पेक्ट्रम नहीं मिल सका है।

रिलायंस कम्यूनिकेशन्स का कहना है कि जीएसएम लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी को तुरंत ही सभी सर्किलों में स्पेक्ट्रम भी मिल गया था, जबकि टाटा टेली को 83 दिनों के बाद दूरसंचार विभाग की मंजूरी मिली थी, यही नहीं जीएसएम लाइसेंस लेने के 3 साल बाद भी टाटा टेली को दिल्ली में स्पेक्ट्रम नहीं मिला है।

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