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Saturday, July 10, 2010

पीएम सुरक्षा के दौरान बच्चे की मौत, कानपुर सांसद करेंगे जांच

कानपुर में पीएम के काफिले के दौरान हुई एक बच्चे की मौत को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए कानपुर के सांसद श्रीप्रकाश जयसवाल को भेजा है। गौरतलब है कि मरने वाले बच्चे की मां ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने पीएम के कानपुर दौरे के वक्त वीआईपी वाहनों को गुजरने के लिए रोके जाने वाले ट्रैफिक को अपने बेटे अमन की मौत का जिम्मेदार बताया था।

उनका कहना था कि वीआईपी वाहनों को गुजरने के लिए रोके जाने वाले रास्ते से ही 8 साल के घायल अमन को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन ट्रैफिक रोके जाने के कारण अमन को समय से अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी। श्यामनगर की रहने वाली ऊषा शर्मा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिख कर गुहार लगाई थी कि भविष्य में किसी वीआईपी की यात्रा के दौरान ऐसे ट्रैफिक न रोका जाए, जिससे कोई घायल अस्पताल न पहुंच सके। उन्होंने बच्चे अमन की मौत पर 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की है। ऊषा शर्मा और उनके पति तसदुद हुसैन का इकलौता बेटा अमन सिविल लाइन इलाके के एक स्कूल में कक्षा 2 का छात्र था। 3 जुलाई को वह घर में खेलते हुए गिर गया था, जिसके कारण उसके सिर में गंभीर चोट लग गई थी। जब ऊषा अपने पति के साथ बच्चे को अस्पताल ले जा रहे थे तो प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों ने उनके अनुरोध के बाद भी रास्ते से नहीं गुजरने दिया। लंबे रास्ते से अस्पताल पहुंचने की वजह से अमन ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

Friday, July 9, 2010

प्रधानमंत्री की सुरक्षा ने ली बच्‍चे की जान


कानपुर: प्रधानमंत्री के तीन जुलाई के कानपुर दौरे के बाद आज एक महिला ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा और फ़्लीट के चलते उनके आठ साल के बच्‍चे को अस्‍पताल ले जाने में हुई देरी जानलेवा साबित हुई। महिला ने पत्र लिख कर गुहार लगाई है कि आगे किसी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। उत्‍तर प्रदेश के एडीजी बृज लाल ने महिला के आरोप को गलत बताया है। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले में कोई भी टिप्‍पणी करने से इंकार कर दिया है।
मिली जानकारी के मुताबिक तीन जुलाई को आठ साल का अमन कार में अपने माता-पिता के साथ था। घर पर एक हादसे में उसके सिर में गंभीर चोटें आई थीं। उसे रीजेंसी अस्‍पताल ले जाया जा रहा था। पर आईआईटी में प्रधानमंत्री के दौरे की वजह से सड़क आम यात्रियों के लिए बंद कर दी गई थी। अमन की मां का आरोप है कि उन्‍हें दूसरे रास्‍ते से अस्‍पताल जाना पड़ा। नतीजतन उन्‍हें अस्‍पताल पहुंचने में एक घंटा लग गया, जबकि वे पांच मिनट में पहुंच सकते थे।

अमन की मां ने कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी है। इसमें कहा गया है कि वह सुनिश्चित करें कि दोबारा किसी के साथ ऐसा नहीं हो।अमन के पिता टी. हुसैन के मुताबिक, ‘एसएसपी थे या कमिश्‍नर, हमें नहीं पता। पर उन्‍होंने हमें जाने नहीं दिया। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। मैंने कहा भी कि मेरा बेटा बुरी तरह जख्‍मी है। उसे फौरन डाक्‍टरी मदद चाहिए। उसके सिर से काफी खून बह रहा है और वह अचेत है। उसे ऑक्‍सीजन की जरूरत है। इसके बावजूद उन्‍होंने हमें नहीं जाने दिया।’
प्रधानमंत्री की सुरक्षा देखने वाले एसपीजी ने अमन की मौत पर अफसोस जाहिर किया है। साथ ही, यह भी कहा है कि बच्‍चे की मौत कार को डाइवर्ट किए जाने से काफी पहले हो चुकी थी। उत्‍तर प्रदेश के एडीजी बृजलाल ने भी कहा है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात किसी भी अधिकारी के पास इस तरह की घटना की कोई सूचना नहीं है। मां की गुहार
अमन की मां उषा शर्मा ने पत्र में लिखा है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे अधिकारियों ने मेरे पति की गुहार पर जरा भी ध्‍यान नहीं दिया। मेरे बेटे के मुंह और नाक से लगातार खून निकल रहा था। इलाज के अभाव में कोकाकोला चौराहा पर ही मेरे इकलौते बेटे ने दम तोड़ दिया।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि प्रधानमंत्री का जीवन पूरे देश के लिए अतिमहत्वपूर्ण है, लेकिन किसी देशवासी का जीवन भी उसके परिवार के लिए कम महात्वपूर्ण नहीं है।
श्रीमती शर्मा ने पत्र में सोनिया गांधी से निवेदन किया है कि मेरा तो चमन लुट गया लेकिन वीआईपी सुरक्षा में फिर किसी का बेटा बलि नहीं चढ़े, किसी का सुहाग न उजड़े, इसलिए वह पुलिस प्रशासन को निर्देश जारी कराए कि वीआईपी दौरे के समय बीमार एवं इमरजेंसी स्थिति में किसी भी देशवासी को रोका न जाए। पुलिस प्रशासन खुद अपनी गाड़ी से उसे अस्पताल पहुंचाए और ऐसी परिस्थितियों के लिए वीआईपी की तरह ही जनता के लिए भी एम्बुलेंस की व्यवस्था की जाए।
अमन की मां ऊषा शर्मा ने पत्र में प्रधानमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपए का मुआवजा मांगते हुए कहा है कि इस पैसे को उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं लेगा। वह इस धन राशि का प्रयोग अनाथ बच्चों व किसी प्रकार की घटनाओं से पीड़ित लोगों के कल्याण हेतु करेंगी।
शर्मा ने ऐसा ही एक पत्र प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी भेजा है। इकलौते बेटे की मौत के बाद मां उषा शर्मा का बुरा हाल है वह किसी से भी बात नहीं कर रही हैं। घर में मातम छाया हुआ है। मुहल्ले के और आस-पास के सभी लोग देश की कानून-व्यावस्था को कोस रहे हैं।


रिपोर्ट : गौरव मिश्रा
न्यूज़लाइन नेटवर्क

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