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Tuesday, April 12, 2011

उदार बनेगी नई टेलीकॉम पॉलिसी:सिब्बल


नई दिल्ली : दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने नई टेलीकॉम पॉलिसी को और उदार बनाने की बात कही है, उन्होंने कहा कि विलय एवं अधिग्रहण से जुड़े मौजूदा कड़े नियमों को नई टेलीकॉम पॉलिसी में नरम बनाया जाएगा।गौरतलब है कि यह पॉलिसी साल के अंत तक पेश की जानी है। इस कदम का लक्ष्य 14 खिलाड़ियों वाले टेलीकॉम बाजार में बहुप्रतीक्षित कंसॉलिडेशन लाना है। सिब्बल ने कहा, 'लेकिन प्रतिस्पर्धियों की तादाद हर सर्किल में छह से नीचे जाने की इजाजत नहीं देनी चाहिए।'

सिब्बल ने कहा कि टेलीकॉम लाइसेंस 20 साल के बजाय हर दस साल के लिए रिन्यू किए जाने चाहिए और कंपनियों को इन लाइसेंस के एक्सपायर होने से कम से कम 30 महीने पहले नए परमिट के लिए आवेदान दाखिल कराने चाहिए। पिछली घोषणा दोहराते हुए सिब्बल ने कहा कि नई पॉलिसी में टेलीकॉम लाइसेंस के आवंटन को मोबाइल स्पेक्ट्रम से अलग किया जाना चाहिए।

भारतीय टेलीकॉम उद्योग में सभी विवादों की जड़ में स्पेक्ट्रम ही था। उन्होंने कहा कि सरकार बाहरी एजेंसियों से उद्योग की ओर से स्पेक्ट्रम यूसेज का नियमित ऑडिट कराएगी और ऑपरेटरों के बीच रेडियो फ्रीक्वेंसी का बंटवारा जैसे अन्य प्रस्ताव भी नई पॉलिसी का हिस्सा होंगे। सरकार ने उस बाहरी एजेंसी पर फैसला नहीं किया है, जो ऑडिट का काम करेगी और सिब्बल का कहना है कि यह कोई निजी खिलाड़ी, भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) या दूरसंचार नियामक ट्राई हो सकता है।

दूरसंचार मंत्री ने जोर दिया कि सरकार टेलीकॉम कंपनियों को बाजार की ओर से तय होने वाली मैकेनिज्म के आधार पर स्पेक्ट्रम के लिए भुगतान करने को कहेगा, जो इस बात का संकेत है कि मंत्रालय नियामक ट्राई की उन हालिया सिफारिशों को अमली जामा पहनाएगा, जिनमें कहा गया था कि जीएसएम दूरसंचार कंपनियों को पिछली तारीख से अतिरिक्त एयरवेव के लिए भुगतान करना होगा, जो उनके पास है। 11 फरवरी को सिफारिशें जारी करने के तुरंत बाद जीएसएम ऑपरेटरों ने इस बात का सुझाव देने के लिए ट्राई की आलोचना की थी कि मोबाइल फोन कंपनियों ने हर अतिरिक्त एयरवेव यूनिट के लिए 4,572 करोड़ रुपए की एकमुश्त राशि वसूली जाए।

फिलहाल, मोबाइल परमिट स्टार्ट-अप एयरवेव के साथ समूह में आते हैं। मंत्री ने एयरवेव से जुड़े सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए सुधारों की एक पूरी श्रृंखला का प्रस्ताव किया, जिसमें नेशनल स्पेक्ट्रम एक्ट शामिल है, जो इस संसाधन के आवंटन का जिम्मा संभालेगा। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज पाटिल इस अधिनियम का मसौदा तैयार करेंगे।

Sunday, April 3, 2011

विदेशी बैंक की कटेगरी में आये ये भारतीय बैंक



भारत के कुछ बैकों को जल्दी ही विदेशी बैंकों के तौर पर जाना जाएगा।
इस लिस्ट में आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यस बैंक, इंडसइंड बैंक, फेडरल बैंक, आईएनजी वैश्य और डवलपमेंट क्रेडिट बैंक जैसे नाम शामिल हैं।

दरअसल निजी क्षेत्र के जिन अन्य बैंकों में 50 फीसदी से ज्यादा विदेशी निवेश है, उन्हें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नई नीति के तहत विदेशी कंपनी माना जाएगा।

2009 में नई एफडीआई पॉलिसी सामने आने के बाद से ही इन बैंकों के दर्जे पर बहस चल रही है क्योंकि इन बैंकों में 50 फीसदी से ज्यादा विदेशी इक्विटी होल्डिंग है। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि इन बैंकों को विदेशी बैंकों की कटेगरी में ही रखा जाएगा। हालांकि इन बैंकों के विदेशी बैंकों की कटेगरी में आने के बावजूद इन बैंकों की कार्यप्रणाली में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।


Saturday, April 2, 2011

विश्व कप: डेढ़ लाख तक बिके टिकट


मुंबई: विश्व कप फाइनल के चलते लोगों में टिकटों को लेकर काफी मारा-मारी रही। स्टेडियम काउंटर पर तो टिकट थे ही नहीं, लेकिन बाहर टिकटों को काफी ऊंचे दामों पर आसानी से बेचा-खरीदा गया। इतना ही नही सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी काफी ऊंचे दामों पर टिकट बेचे गए।

ऐसी ही एक साइट पर टिकट 1.50 लाख रुपए में बेचे गए। बिचौलिए भी इस तरह की कालाबाजारी करने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने 20 हजार रुपए की टिकट लगभग एक लाख रुपए में बेची। इतना ही नहीं स्टेडियम के आसपास टिकटों की कालाबाजारी करते कुछ लोग तो 15-20 गुना अधिक कीमत पर टिकट बेच रहे हैं।

माना जा रहा है कि आम जनता के लिए केवल 3000 हजार टिकट ही रखे गए थे, और उन्हें भी ऑन लाइन "लॉटरी सिस्टम" के जरिए बेचा गया।

Monday, March 28, 2011

अब ब्लैकबेरी फोन बनेंगे देश में


नई दिल्ली: ब्लैकबेरी स्मार्टफोन निर्माता रिसर्च इन मोशन [रिम] नोकिया, सैमसंग, एलजी जैसे अन्य ग्लोबल ब्रांडों के बाद अब भारत में भी कारखाना लगाने की तैयारी कर रही है।

इस तरह के प्लांट पर 25 करोड़ डॉलर [करीब 1125 करोड़ रुपये] तक के निवेश की जरूरत होगी। अगर ऐसा हुआ तो एशिया क्षेत्र में यह कंपनी का पहला मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट होगा। साथ ही रिम देश में ऐसे समय संयंत्र लगाने पर विचार कर रही है, जब उसके ब्लैकबेरी परिचालन को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता जताई जा रही है। कंपनी ने संकेत दिया है कि आसपास के देशों में बढ़ती संभावनाओं के मद्देनजर वह भारत को निर्यात हब के रूप में विकसित कर सकती है।

देश में संयंत्र लगाने की योजना के बारे में रिम के प्रवक्ता का कहना है कि कनाडा में रिम के मुख्य सूचना अधिकारी रॉबिन बेनफेट जल्दी ही ब्लैकबेरी के बड़े ग्राहकों से मुलाकात के लिए यहां आएंगे। इतना ही नहीं रॉबिन प्लांट के लिए जगह की तलाश करने चेन्नई, मुंबई और दिल्ली भी जाएंगे।

गौरतलब है कि 18 देशों में उपस्थिति ब्लैकबेरी तेजी से विकास कर रही है। साथ ही रिम दुनिया भर की शीर्ष पांच मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों में शुमार है।

Friday, March 25, 2011

अब भारत में आयेंगी सस्ती लग्जरी कारें



जर्मन कार कंपनी मर्सिडीज अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ने के लिये अब सस्ती लग्जरी कारों को भारत में उतारने की योजना बना रही है। कंपनी के इस कदम से भारतीय लग्जरी कार बाजार में जबर्दस्त जंग होने की संभावना है।

कंपनी भारत में अब ए और बी क्लास की गाड़ियां उतारने की तैयारी में है। जिनकी खासियत यह है कि वो यहां बिक रही सी-क्लास कारों से सस्ती होंगी। अगले साल बाज़ार में आने वाली इन कारों को अभी तैयार किया जा रहा हैं। मर्सिडीज इस समय भारत में सी, ई और एस-क्लास की कारें बेच रही है। इसके अलावा कंपनी जीएल और एम क्लास की एसयूवी भी बेच रही है। कंपनी बीएमडब्लू को टक्कर देने के लिए एक सस्ता एसयूवी भी बना रही है। बीएमडब्लू ने एक सस्ता एसयूवी बाज़ीर में उतार रखा है जिसकी कीमत 22 लाख रुपए है।

गौरतलब है कि कंपनी भारत के लिए खासतौर पर राइट हैंड ड्राइव कारें बनाएगी। भारत के युवा वर्ग को ध्यान में रखकर ही इन कारों बनाया जा रहा है।

Tuesday, March 22, 2011

अलग होते ही आमने-सामने हीरो और होंड़ा


नई दिल्ली: हीरो और होंड़ा अलग होते ही एक-दूसरे को पीछे छोड़ने के दावे करने लगे हैं। जहां पहले भारतीय दोपहिया वाहन निर्माता हीरो समूह ने दुनियाभर में अपनी मोटरसाइकिलों का परचम फहराने की घोषणा की थी। वहीं अब जापानी कंपनी होंडा ने अगले दस साल में घरेलू बाजार में नंबर वन बनने का दावा किया है।

होंडा की भारतीय अनुषंगी होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया [एचएमएसआइ] ने कहा है कि बिक्री के मामले में नंबर वन का ओहदा पाने के लिए कंपनी ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है। कंपनी के अध्यक्ष और सीईओ शिंजी ओयामा के मुताबिक इस लक्ष्य को हांसिल करने के लिए कंपनी पहली बार 100 सीसी की बाइक पेश करेगी। मौजूदा समय में कंपनी की दो तिहाई बिक्री शहरी क्षेत्रों में हो रही है, जबकि एक तिहाई ग्रामीण क्षेत्रों में। कंपनी ने राजस्थान में अपने दूसरे संयंत्र के लिए करीब डेढ़ हजार लोगों को नियुक्त करने के लिए भी कहा है।

पिछले वर्ष कंपनी ने भारत की नंबर एक मोटरसाइकिल कंपनी हीरो होंडा में अपनी पूरी 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बीएम.मुंजाल की अगुआई वाले हीरो समूह को बेच दी। हीरो होंडा ने पिछले वित्त वर्ष करीब 40 लाख वाहनों की बिक्री की। ओयामा के मुताबिक, दोनों कंपनियों के अलग होने के बाद होंडा ने अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने पर काम शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि हीरो होंडा 100 सीसी खंड में छह मॉडलों की बिक्री करती है। इस खंड में भारतीय कंपनी की 70 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, भारतीय बाजार में होंडा की सबसे कम 110 सीसी की ट्विस्टर बाइक ही है।

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