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Sunday, February 13, 2011

बंगाल: नक्सलियों ने की माकपा नेता की हत्या


कोलकाता : हमारे देश में नक्सलवाद दिन दिन अपने पैर पसारता जा रहा है।नक्सलियों द्वारा बेख़ौफ़ क़त्ल की घटनाओं को अंजाम दिया जाने लगा है। देश केनक्सलवाद प्रभावित इलाक़े अब सुरक्षित नहीण रह गये हैं। इसी तरह आज पश्चिमबंगाल के मिदनापुर जिले में नक्सलियों ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी [माकपा] केएक नेता की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने इस घटना की जानकारी दी।

जिला पुलिस अधीक्षक प्रवीण त्रिपाठी के मुताबिक़ उन्हें झारग्राम उप प्रखंड के बेलियाबेरा गांव में एक जंगल केपास गोली लगा एक शव पड़ा होने की सूचना मिली। फिर उस शव को बरामद किया गया तो उसकी पहचान माकपाके स्थानीय नेता रामेश्वर बाग के रूप में हुई। त्रिपाठी ने कहा कि घटनास्थल से बरामद पोस्टर में नक्सलियों नेहत्या की जिम्मेदारी ली है। पोस्टर में लिखा हुआ है कि बाग को पुलिस के लिए मुखबिरी करने के कारण मौत कीसजा दी गई है।

पीड़ित के परिजनों ने आरोप लगाया है कि आठ से 10 हथियारबंद नक्सलियों के समूह ने शनिवार रात घर परधावा बोला और वे बाग को घर के बाहर खींच ले गए। बाद में बाग को उनके घर से कुछ दूरी पर गोली मार दी गई।

पुलिस ने बताया कि बाग, इलाके में माकपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे, लेकिन नक्सलियों के हमले के डर से वह पार्टीकी गतिविधियों में हिस्सा लेने से बचते थे।

Sunday, November 7, 2010

प. बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर रे नहीं रहे


कोलकाता: वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे का लंबी बीमारी के बाद 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। काफी समय से बीमार चल रहे रे को मार्च से डायलिसिस पर रखा गया था। शनिवार की शाम अपने दक्षिण कोलकाता स्थित निवास में उन्होंने अंतिम साँसें लीं।

रे ने बिधान चंद्र रॉय के मंत्रिमंडल के सदस्य के रुप में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। अपने समय के सबसे चर्चित राजनीतिज्ञों में से एक रे पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के नजदीकी दोस्त थे। रे 1972 में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने थे। केंद्रीय मंत्री के अलावा अप्रैल 1986 से दिसंबर 1989 के उस समय वे पंजाब के राज्यपाल रहे जब वहां आतंकवाद चरम पर था। इतना ही नहीं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के विश्वस्त कांग्रेसी नेता को अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में काम करने का भी मौका मिला। वामदल उन पर इंदिरा गांधी को इमरजेंसी लगाने की सलाह देने का आरोप लगाते रहे हैं।

Wednesday, October 6, 2010

अब नैनों बिना बुकिंग के उपलब्ध


नई दिल्ली: टाटा की सबसे सस्ती कार नैनों को खरीदने के लिए अब ना ही किसी बुकिंग की ज़रुरत है और आपको इंतजार भी नहीं करना पडेगा। अब आप जब चाहे तब नैनों कार को अपने घर लाकर उसमें घूमने का आनंद उठा सकते हैं। टाटा मोटर्स ने अपनी इस लखटकिया कार की उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र व कर्नाटक में खुली बिक्री शुरू कर दी है। कंपनी ने इस संबंध में मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि ग्राहक इन राज्यों में कंपनी के शोरूम से नैनो को सीधे खरीद सकते हैं। इस साल जुलाई में कंपनी ने नैनो के दाम 3-4 प्रतिशत बढ़ाने की घोषणा की। दिल्ली के शोरूम में यह बढ़ोत्तरी 3,700 रुपये से 6,894 रुपये के बीच रही। टाटा मोटर्स ने नैनो को आकर्षक ब्याज दरों पर ग्राहकों को उपलब्ध कराने के लिए 25 बैंकों के साथ गठजोड़ भी किया है। कंपनी के गुजरात स्थित साणंद प्लांट में फिलहाल सालाना ढाई लाख नैनो कारों का उत्पादन कर रही है। कंपनी ने दुनिया की इस सबसे सस्ती कार को वर्ष 2009 में पेश किया था।

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