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Saturday, February 26, 2011

देश को नेताओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता: श्रीश्री रविशंकर


जोधपुर : देश के मौजूदा हालात को देखते हुए आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणोता श्रीश्री रविशंकर ने अपील की है कि समाज को भी देश के लिए आगे आना होगा और अपनी धारणा बदलनी होगी। रविशंकर का मानना है कि देश को अब राजनेताओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। जोधपुर पहुंचे रविशंकर ने पत्रकारों से चर्चा में कहा, ‘मेरी राजनीति में आने की कोई मंशा नहीं है लेकिन समाज के किसी भी क्षेत्र में अन्याय हो रहा हो तो चुप भी नहीं बैठ सकता।’

रविशंकर ने कहा कि अब देशवासियों को यह धारणा बदलनी होगी कि भ्रष्टाचार के बिना हमारा काम चल ही नहीं सकता। रविशंकर देश में घूम-घूमकर लोगों को रिश्वत नहीं देने और नहीं लेने का संकल्प दिलवा रहे हैं। उन्होंने बेटियों को बचाने, भ्रष्टाचार-दुराचार-अनाचार हटाने और हिंसा विहीन समाज के लिए मुहिम छेड़ रखी है।

उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में 30 जनवरी को हुए एक कार्यक्रम में लाखों लोगों ने ऐसा ही संकल्प लिया है। उन्होंने कहा, ‘अब जनता से आवाज उठ रही है कि भ्रष्टाचार खत्म हो।’ उनका कहना था, ‘लोग मुझे गुरु कहते हैं लेकिन मैं खुद को अभी बच्चा मानता हूं।’

साथ ही, रविशंकर ने संपति की घोषणा मुहिम का स्वागत करते हुए कहा कि देश-विदेश में फैले उनके 12 ट्रस्टों में करीब 800 करोड़ रुपए की संपति है और पूरी तरह ऑडिट की हुई है। उनके ट्रस्ट में 15 फीसदी से भी कम पैसा डोनेशन से आता है। बाकी पैसा आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के कोर्सेज की फीस से जुटाया जाता है।

ये बात उल्लेखनीय है कि राजनेताओं के कारण भ्रष्टाचार के समुंद्र में डूबते जा रहे देश को बाहर निकालने का ज़िम्मा अब गुरूओं और बाबाओं ने उठाया है। अब देखना होगा कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ चलाई जा रही ये मुहिम कितनी कारगर साबित होती है और हमारे देश की स्थिति में कितना सुधार आता है।

Tuesday, November 2, 2010

दीपावली पर चांदी के सिक्कों की जमकर ख़रीदारी


जोधपुर की देसी टकसाल मैं तैयार किए जा रहे हैं ढेरों चांदी के सिक्के। यहां की टकसाल में बने सिक्के शुद्ध चांदी के होते हैं। शुद्धता की गारंटी के चलते ही इनकी मांग बाज़ार में बहुत ज़्यादा बढ़ गई है। जिसे देखते हुए इस बार दीपावली के मौक़े पर टकसाल में 1500 किलो चांदी के सिक्के तैयार किए गए हैं।

धनतेरस के मौके पर लोग जमकर ख़रीदारी करते हैं। ख़ासकर जिन चांदी के सिक्कों में मां लक्ष्मी की तस्वीर हो उनकी बाज़ार में ख़ूब डिमांड रहती है। कहते हैं कि इन चांदी के सिक्कों को घर में रखने से जीवन में समृद्धि आती है।

Saturday, July 10, 2010

बूंद बूंद तरसता जीवन, बारिश का नाम नहीं


जहां देश में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य पानी की अधिकता से परेशान है वहीं दूसरी तरफ देश में कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां बारिश नहीं होने की वजह से लोगों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा। राजस्थान के जोधपुर में हालात इतने खराब है कि पीने के पानी ने छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई छुड़वा दी है। पानी से बूंद बूंद तरसते ये बच्चे सुबह से रात तक पानी की बूंदों को समेट कर अपनी और अपने परिवार की प्यास बुझाने की कोशिश में भिड़े रहते हैं।गांव में तालाब के अन्दर एक कुआं है, जहां से गांव के बच्चे सुबह से लेकर शाम तक पानी के लिये खड़े रहते हैं। जिसकी वजह से उन्हें स्कूल जाने के लिए इन्हें वक्त ही नहीं मिलता।

इनके परिजनों का मानना है की जिन्दा रहेंगे, तो बाद में पढ़ाई भी कर लेंगे। गांव की एक महिला का कहना हैं कि बच्चों को ही पानी भरना पड़ता है, क्योंकि बड़े तो मजदूरी पर जाते हैं। एक मटके पानी के लिए बच्चों को कुएं में उतारना पड़ता है। इस काम में बच्चे डरते भी हैं, लेकिन इनकी मजबूरी है कि पानी के लिए खतरों पर खेल जाते हैं।

एक ग्रामीण का कहना है कि कभी कभार जब पानी का टेंकर गांव में आता है, तो वो वक्त गांव के लिए ख़ुशी और संघर्ष का होता है। ख़ुशी पानी आने की और संघर्ष पानी पाने का। पानी के टेंकर का पूरे गांव को इंतजार रहता है। हमेशा प्रेम से रहने वाले ये गांववासी पानी के लिए लड़ भी पड़ते है। बहरहाल पानी के टैंकर तो कभी-कभी ही आते हैं और वक्त का नजारा कुछ खास ही होता है। लेकिन आम तौर पर इस सूखे कुएं में बूंद-बूंद रिसता पानी ही इनके जीवन का आसरा है।


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