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Sunday, November 14, 2010

2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में संचार मंत्री ने दिया इस्तीफा



नई दिल्ली: 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फंसे केंद्रीय संचार मंत्री ए राजा ने आखिरकार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। आज सुबह ही इस मुद्दे पर एक अहम बैठक हुई, जिसके बाद ऐसे संकेत मिलने लगे थे राजा की विदाई तय है। इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी और अहमद पटेल शामिल हुए।

हालांकि सुबह में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने 2-जी स्पेक्ट्रम के कथित घोटाले और उससे जुड़े दूरसंचार मंत्री ए राजा के बारे में आज कोई भी टिप्प्णी करने से इनकार करते हुए कहा कि इस संबंध में जो भी कहना है, संसद में कहा जाएगा। मुखर्जी ने कहा, कि संसद सत्र चल रहा है और दूससंचार मंत्री ए राजा के बारे में जो कुछ भी कहना है संसद में ही कहा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक बैठक में फैसला लिया गया कि सोमवार को प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर संसद में बयान देंगे।

विपक्ष 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में राजा की कथित भूमिका के मद्देनजर उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग कर रहा था। इसके चलते पिछले हफ्ते संसद में कोई कामकाज भी नहीं हो सका। बीजेपी और वाम दलों समेत विपक्ष ने धमकी दी थी कि अगर राजा को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से नहीं हटाया गया, तो विपक्ष संसद नहीं चलने देगा।

नक्सली इलाकों में चल रही अनोखी आउटसोर्सिंग


नक्सल प्रभावित कई दूरस्थ इलाकों में एक अलग तरह की आउटसोर्सिंग का तेजी से प्रसार हो रहा है। ऐसे इलाकों में जान के खतरे के डर के चलते लंबे समय तक स्कूलों से अनुपस्थित रहने वाले शिक्षक अब अपनी ओर से कक्षाओं में पढ़ाने के लिए स्थानीय युवकों को किराए पर नियुक्त कर रहे हैं। ये शिक्षक ऐसे युवकों को अपना आधा वेतन देते हैं।

यह स्थिति दोनों के लिए करीब करीब फायदेमंद होती है। शिक्षकों का काम हो जाता है और स्थानीय, अर्धशिक्षित बेरोजगार युवकों को काम मिल जाता है। लेकिन इसमें छात्रों की शिक्षा दाँव पर लग जाती है। क्योंकि शिक्षकों को घर पर रहते हुए भी आधा वेतन मिल जाता है और अर्धशिक्षित होने के बावजूद युवक स्कूलों में छात्रों को पढ़ाते हैं तथा आधा वेतन भी पा जाते हैं। एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि यह चिंताजनक बात है। हम कल्पना कर सकते हैं, ऐसे स्कूलों में शिक्षा का स्तर क्या होगा। हम उम्मीद करते है कि जैसे जैसे सुरक्षा बल ज्यादा से ज्यादा नक्सली बहुल इलाकों पर नियंत्रण करेंगे, वैसे-वैसे स्थिति में सुधार होगा।

छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा में यह चलन बढ़ता जा रहा है क्योंकि यहां के दूरस्थ इलाकों में माओवादियों की मौजूदगी और सुरक्षा के अभाव के कारण स्कूल के निरीक्षक कभी कभार ही असलियत का पता करने जा पाते हैं।

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