नक्सलियों से निपटने के लिए सेना के प्रयोग पर गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच मतभेद अभी तक जारी हैं। गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति में इस मसले पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका।प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के बारे में हालांकि आधिकारिक रूप से कुछ भी नहीं कहा गया है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों के खिलाफ सेना के प्रयोग की संवेदनशीलता को देखते हुए अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया। संकेत मिले हैं कि प्रधानमंत्री ने रक्षा और गृह मंत्रालयों को आपसी समझ में बेहतराई विकसित करने को कहा है।
सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय नक्सल प्रभावित राज्यों में सुरक्षा बलों की एकीकृत कमान के गठन के अलावा मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों की मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में नियुक्ति का पक्षधर है। साथ ही मंत्रालय ये भी चाहता है कि स्पेशल कमांडोज एवं राष्ट्रीय रायफल्स की तैनाती सहित बारूदी सुरंगों को हटाने में सेना की मदद ली जाए। वह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस व अर्धसैनिक बलों के आवागमन के लिए वायुसेना के हेलीकाप्टरों के इस्तेमाल और मानव रहित टोही विमानों की सेवाएं भी चाहता है।
" न्यूज़लाइन नेशनल ब्यूरो "
No comments:
Post a Comment