
प्राइवेट कंपनियों की कंपीटीशन और गिरती कॉल दरों की वजह से सरकारी टेलीकॉम कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल बहुत ही बुरे हालात से गुजर रही हैं। अब इन कंपनियों के लिये एक नई समस्या आ खड़ी हुई है, यह नई मुसीबत है नंबर पोर्टेबिलिटी की।
दरअसल ग्राहकों को मिली इस सुविधा का इस्तेमाल इन दोनों के खिलाफ कुछ ज्यादा ही हो रहा है। 20 जनवरी को शुरु हुई यह सुविधा बीएसएनएल को ज्यादा ठेस पहुंचा रही है। फरवरी के अंत में बीएसएनएल के पास साढ़े आठ करोड़ ग्राहक थे लेकिन 20 जनवरी से 2 मार्च तक बीएसएनएल के 323000 ग्राहकों ने उसकी सेवा बदलने का आवेदन किया है। हालाकि 131000 ने उसकी जीएसएम सेवा से जुड़ने की भी इच्छा जताई है जिससे उसे कुछ संतोष भी हुआ है। यानी उसे कुल 192000 ग्राहकों का नुकसान हुआ है। वहीं दूसरी सरकारी टेलीकॉम कंपनी एमटीएनएल को भी करारा झटका लगा है दिल्ली मुंबई में सेवा देने वाली इस कंपनी के 15,898 ग्राहकों ने इससे हाथ खींच लिए हैं।
जानकारों के मुताबिक दोनों सरकारी कंपनियों को अपनी सेवा सुधारने का मौका आ गया है। उनके पास बहुत बड़ा नेटवर्क है लेकिन उन्हें जरुरत है कुशल सेवा की।

