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Monday, May 9, 2011

2 लाख 76 हजार डॉलर में बिकी डायना की पोशाक


लॉस एंजिल्स: अमेरिका के लॉस एंजिल्स शहर में हुई एक नीलामी में ब्रिटेन की प्रिंसेस डायना की पोशाक की एक जोड़ी को एक प्रख्यात संग्रहालय ने 02 लाख 76 हजार डॉलर मूल्य में खरीदा है।

जूलियन नीलामी गृह के डेरेन जूलियन ने रविवार को बताया कि इन दोनों पोशाकों को 1997 में डायना की मौत के बाद से ही अनुकूल वातावरण में रखा गया था और इसे एक प्रख्यात संग्रहालय ने क्रमश: 144 हजार डॉलर और 132 हजार डॉलर मूल्य में खरीदा। उन्होंने बताया कि इस नीलामी में विश्वभर से संग्रहकर्ताओं ने शिरकत की थी और अब पोशाकों की यह जोड़ी एक संग्रहालय में जा रही है जहां आम लोग भी इन्हें देख पाएंगे। हालांकि उन्होंने संग्राहलय के अधिकारियों की इजाजत के बगैर उसका नाम बताने से इंकार कर दिया।

उल्लेखनीय है कि राजकुमारी डायना की 144 हजार डॉलर में नीलाम हुई पोशाक एक काला क्रेप से बना शाम को पहने जाना वाला गाउन है जिसे 1992 में विदेश दौरे पर जाते समय उन्होंने पहना था। दूसरी पोशाक एक सिल्क शिफान से बनी एक स्ट्रेपलैस ड्रेस है जिसे उन्होंने कान्स फिल्मोत्सव के दौरान 1987 में पहली बार और 1989 में एक नाट्य मंचन का आनंद लेते समय दूसरी बार पहना था।

गौरतलब है कि डायना का विवाह 29 जुलाई 1981 को ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स से हुआ था और फ्रांस की राजधानी पेरिस में 31 अगस्त 1997 को एक कार दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी।

Sunday, February 6, 2011

अमेरिका:बापू के स्मृति चिह्नों की नीलामी




नई दिल्ली: अमेरिका में इस महीने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के लगभग 11 स्मृति चिह्नों की नीलामी की जाएगी। बापू के हस्ताक्षर वाले नोट, पत्र और खादी का एक कपड़ा नीलामी होने वाले स्मृति चिह्नों में शामिल है। इस नीलामी से 15 लाख रुपए से ज्यादा प्राप्त होने की उम्मीद है।

यह नीलामी आने वाली 13 फरवरी को कैलिफोर्निया के बोनहैम्स नीलामी घर में होगी। बोनहैम्स का कहना है कि लॉस एंजिल्स के अहिंसा आंदालनों के इतिहास में रुचि लेने वाले एक संग्रहकर्ता की ओर से कई दशकों में इन स्मृति चिह्नों को इकट्ठा किया गया है। बोनहैम्स में ‘फाइन बुक्स एंड मैनूस्क्रिप्ट्स’ की अमेरिकी निदेशक कैथरीन विलियमसन ने बताया कि व्यक्ति विशेष के प्रति अपने सम्मान या किसी खास ऐतिहासिक क्षण में अपनी असीम रुचि के कारण हस्तलिपि संग्रह करने वाले पत्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक स्मृति चिह्न चाहते हैं। उनका कहना है कि दुनिया के ज्यादातर बेहतरीन पुस्तकालय निजी संग्रहकर्ताओं की ओर से स्थापित किए गए हैं जिनकी संग्रह करने संबंधी कार्यों ने कई दुर्लभ चीजों को लोगों के जेहन से भूलने नहीं दिया।

इतना ही नहीं संग्रहकर्ता का शुरुआती ध्यान पत्र और दस्तावेज ही रहा है। उसके संग्रह के आभूषणों में से एक गाँधी का दो पन्नों वाला ‘ऑटोग्राफ लेटर’ है जिसमें उन्होंने कैथोलिक और दुनिया के अन्य धर्मों की बाबत अपने विचार व्यक्त किए हैं।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले गाँधी के निजी इस्तेमाल की वस्तुएँ नीलाम किए जाने पर काफी विवाद हुआ था और सरकार को विदेशों में हुई नीलामी रोकने में विफलता हाथ लगी थी। लेकिन बोनहैम्स नीलामी घर का कहना है कि इस नीलामी की बाबत भारत सरकार ने अब तक उससे कोई संपर्क नहीं किया है।

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