" न्यूज़लाइन एक्सक्लूसिव "
श्रीनगर में लग रही कर्फ्यू की आग ने आज घाटी के इतिहास को बदल कर रख दिया । ऐतिहासिक दरगाह हज़रत बल की मस्जिद में आज जुमे की नमाज़ अदा नहीं की जा सकी । जिस मस्जिद में एक से डेढ़ लाख नमाज़ी, नमाज़ के लिये जुटते हैं, आज वहां ख़ामोश सन्नाटा पसरा रहा ।
जम्मु कश्मीर के हज़ारों सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब हज़रत बल की दरगाह में जुमे की नमाज़ अदा नहीं की गई । आतंक और कर्फ्यू की मार झेल रही घाटी में आज का दिन काले शुक्रवार के रूप में दर्ज हुआ है ।
इतिहास गवाह है कि दरगाह हज़रत बल, पूरे विश्व के मुसलमानों के लिये एक ख़ास महत्व रखती है । इस दरगाह का महत्व इसलिये बढ़ जाता है क्योंकि मुसलमानों के आख़िरी पैग़मबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.व ) का बाल मुबारिक इस दरगाह शरीफ़ में मौजूद है ।
लेकिन आज पहली बार कर्फ्यू की वजह से मस्जिद में जुमे की नमाज़ अदा नहीं की जा सकी । वादी में पिछ्ले कई दिनों से जारी अशांति ने आज हज़रत बल दरगाह का भी चैन छीन लिया । आज की इस दर्दनाक घटना ने दरगाह हज़रत बल के नमाज़ियों के मुंह शर्म से झुका दिये ।
आज का दिन घाटी के हज़ारों सालों के इतिहास का सबसे काला दिन साबित हुआ है, क्योंकि करोड़ो लोगों की आस्था के केन्द्र हज़रत बल में आज जुमे की नमाज़ के वक़्त बिल्कुल वीरानी छाई रही ।
आखिरकार सवाल सिर्फ़ और सिर्फ़ यही उठता है कि जिस मज़हब की दुहाई देकर ये लोग आम मुसलमानों को अपने मज़हब से भटका रहे हैं, उसी मज़हब के 5 स्तम्भों में से एक, 'नमाज़' को आख़िर कैसे दरकिनार कर सकते हैं ।
मासूम लोगों, मासूम बच्चों, मासूम महिलाओं के ख़ून से रंगे इन संगठनों के हाथ, आख़िर कब जाकर इंसानियत के रंग में रंगेगें । और कब जाकर ये संगठन इंसानियत को मानेंगे और अपनायेंगे ।
रिपोर्ट : सुहेब रहमान
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