
नई दिल्ली : लीबिया में बद से बद्तर होते जा रहे हालातों के मद्देनज़र, सरकार द्वारा लीबिया में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। विदेश सचिव निरुपमा राव ने इस मामले में वरिष्ठ अधिकारों के साथ एक बैठक की और लीबिया में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की योजना की समीक्षा की।
ग़ौरतलब है कि लीबिया के तानाशाह नेता कर्नल मुअम्मर गद्दाफी द्वारा पूरे लीबिया को खाक में मिला देने की धमकी के बाद से भारतीय नागरिकों को वापस लाने की कोशिशों में तेज़ी आई है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक 360 यात्रियों की क्षमता वाले बोइंग 747 और 280 लोगों की क्षमता वाले एयरबस ए-330 त्रिपोली के लिए रवाना कर दिए गए हैं जो आज शाम तक 640 भारतीयों को लेकर दिल्ली लौट आएंगे। भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस जलश्व और आईएनएस मैसूर भी आज सुबह मुंबई से लीबिया के लिए रवाना हो गए हैं जहां उसे पहुंचने में 10-11 दिन लगेंगे। भारतीय सेना का आईएल-76 भी मदद के लिए भेजे जाने के लिए तैयार कर लिया गया है।
लीबिया के अधिकारियों की ओर से त्रिपाली में भारतीय उड़ानों को उतारने की अनुमति मिल जाने के बाद ये कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय ने बताया कि स्कोटिया प्रिंस जहाज को 2 मार्च को बेनगाजी भेजा जाएगा जहां से वो 1200 लोगों को एलेक्सज़ेन्ड्रिया लेकर आएगा। इसके बाद एयर इंडिया के विमान उन्हें भारत लाएंगे। 750 यात्रियों की क्षमता वाले जहाज को भी लोगों को बेनगाज़ी से एलेक्सज़ेन्ड्रिया लाने के लिए तैनात किया जाएगा। तोबरुक से 150 भारतीय नागरिकों को सड़क के जरिए मिस्र के सीमा पर स्थित सालुम तक लाया जाएगा। उनके साथ भारतीय राजदूत भी रहेंगे और फिर दो टुकड़ियों में बांटकर उन्हें 26 और 28 फरवरी को काहिरा तक लाया जाएगा जहां से उन्हे विमान से भारत के लिये रवाना होंगे।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि त्रिपोली, काहिरा और ट्यूनिसिया में भारतीय दूतावास लगातार वहां के हालात पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार भी भारतीयों को जल्द ही सुरक्षित भारत लाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। लीबिया में 18 हजार भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। इस बीच विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि लोगों को लीबिया से निकालने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जायगा। मंत्रालय ने लोगों को सावधान किया है कि वे धनराशि मांगने वाले अवांछनीय तत्वों से सावधान रहें और उनके बहकावे में नहीं आएं।

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