
देहरादून : युग गुरू बाबा रामदेव की स्वाभिमान यात्रा के कारण कांग्रेस और बाबा के बीच पैदा हुई तकरार रूकने का नाम नहीं ले रही है और दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। अब, उत्तराखंड कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मांग की है कि योग गुरु बाबा रामदेव के देश एवं विदेश में स्थित प्रतिष्ठानों और उनके क्रियाकलापों की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए।
कांग्रेस के विधायक दिनेश अग्रवाल, किशोर उपाध्याय, जोत सिंह गुनसोला तथा केदार सिंह रावत आदि नेताओं ने कल विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पिछले कई बरसों से स्वामी रामदेव राजनीतिक दलों और राजनेताओं खासकर कांग्रेस पार्टी तथा उसके उच्च नेताओं के खिलाफ निराधार एवं अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।
उन्होंने बाबा रामदेव पर अकूत सम्पत्ति बंटोरने का आरोप लगाते हुए कहा कि योग गुरु ने बहुत थोड़े समय में अचानक इतनी संपन्नता और वैभव कैसे हासिल कर लिया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनके विभिन्न प्रतिष्ठानों के बारे में भी लोगों को तमाम आशंकाएं हैं तथा उनकी आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में है। इसके अलावा उनके यहां मजदूरों के शोषण के मामले में भी चर्चा में आये हैं तथा उनके ट्रस्टों के आसपास रहने वाले गांववासियों और किसानों में भी इनकी गतिविधियों को लेकर काफी असंतोष है।
कांग्रेसी नेताओं ने योग गुरु के क्रियाकलापों ओर उनकी गतिविधियों को संत अवधारणा के खिलाफ होने का आरोप लगाते हुए कहा कि संत-महात्माओं से लोग मार्गदर्शन की अपेक्षा रखते हैं, जब वही संदेह के घेरे में आ जाएं तो इसका समाज तथा देश की छवि पर बुरा असर पड़ता है।
कांग्रेस विधायकों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर स्वामी रामदेव के प्रतिष्ठानों और उनके क्रियाकलापों तथा बाबा की अकूत संपत्ति की केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
इन नेताओं ने योग गुरु को भी पत्र लिखा है कि आप एक साधु हैं तथा लोगों के मन में आपके प्रति अपार श्रद्धा है तथा आपको देवभूमि उत्तराखंड को अपनी कर्मस्थली बनाने का गौरव मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि लेकिन दुखद है कि पिछले कई सालों से आपकी गतिविधियों एवं क्रियाकलापों से हम लोगों की ही नहीं आम आदमी के मन को भी ठेस पहुंच रही है।
विधायकों ने योग गुरु से कहा कि समाज में संतजनों का सम्मान तथा उनके प्रति श्रद्धा एवं विश्वास बना रहे इसलिए उन्हें स्वयं अपने प्रति लोगों के मन में फैल रही तमाम आशंकाओं को दूर करने के लिए स्वयं राज्य सरकार और केन्द्र सरकार से अपने प्रतिष्ठानों की सीबीआई से जांच कराने की मांग करनी चाहिए।

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