Saturday, July 10, 2010

बूंद बूंद तरसता जीवन, बारिश का नाम नहीं


जहां देश में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य पानी की अधिकता से परेशान है वहीं दूसरी तरफ देश में कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां बारिश नहीं होने की वजह से लोगों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा। राजस्थान के जोधपुर में हालात इतने खराब है कि पीने के पानी ने छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई छुड़वा दी है। पानी से बूंद बूंद तरसते ये बच्चे सुबह से रात तक पानी की बूंदों को समेट कर अपनी और अपने परिवार की प्यास बुझाने की कोशिश में भिड़े रहते हैं।गांव में तालाब के अन्दर एक कुआं है, जहां से गांव के बच्चे सुबह से लेकर शाम तक पानी के लिये खड़े रहते हैं। जिसकी वजह से उन्हें स्कूल जाने के लिए इन्हें वक्त ही नहीं मिलता।

इनके परिजनों का मानना है की जिन्दा रहेंगे, तो बाद में पढ़ाई भी कर लेंगे। गांव की एक महिला का कहना हैं कि बच्चों को ही पानी भरना पड़ता है, क्योंकि बड़े तो मजदूरी पर जाते हैं। एक मटके पानी के लिए बच्चों को कुएं में उतारना पड़ता है। इस काम में बच्चे डरते भी हैं, लेकिन इनकी मजबूरी है कि पानी के लिए खतरों पर खेल जाते हैं।

एक ग्रामीण का कहना है कि कभी कभार जब पानी का टेंकर गांव में आता है, तो वो वक्त गांव के लिए ख़ुशी और संघर्ष का होता है। ख़ुशी पानी आने की और संघर्ष पानी पाने का। पानी के टेंकर का पूरे गांव को इंतजार रहता है। हमेशा प्रेम से रहने वाले ये गांववासी पानी के लिए लड़ भी पड़ते है। बहरहाल पानी के टैंकर तो कभी-कभी ही आते हैं और वक्त का नजारा कुछ खास ही होता है। लेकिन आम तौर पर इस सूखे कुएं में बूंद-बूंद रिसता पानी ही इनके जीवन का आसरा है।


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