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Friday, June 18, 2010

इसलामोफ़ोबिया, अब बरदाश्त नहीं


जिनेवा: आखिर क्यों आये दिन पश्चिम देश कभी बुरके पर तो कभी दाढ़ी पर प्रतिबंध लगाते रहते हैं. क्यों सभी मुसलमानों को आतंकी की तरह देखा जाता है. इसलामी सम्मेलन संगठन (ओआइसी) और उसके सहयोगियों ने इसलामी व्यवहार की आलोचना और आतंकवाद को इसलाम के मजहबी ताने-बाने से जोड़ने की कोशिश को इसलामोफ़ोबिया करार दिया. उन्होंने एक स्वर में कहा कि इससे पूरा मुसलिम समुदाय एक साथ बेवजह दंडित होता है. इसलामी देशों ने संयुक्त राष्ट्र से मांग की है कि वह पश्चिमी देशों और पश्चिमी मीडिया में इसलाम को लेकर तेजी से फ़ैलाये जा रहे हौवे के खिलाफ़ कड़े कदम उठायें |

57 इसलामी देशों के इसलामी सम्मेलन संगठन (ओआइसी) की ओर से पाकिस्तान ने कहा कि परिषद को धार्मिक स्वतंत्रता और नस्लवाद संबंधी ऐसे मामलों में स्वतंत्र जांच करानी चाहिए और पश्चिमी समाजों में तो यह खास तौर पर होना चाहिए. पाकिस्तान ने ओआइसी की ओर से एक प्रस्ताव भी परिषद के समक्ष रखा है. इसके तहत परिषद से मांग की गयी है कि वह धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में विशेष जांच के लिए जनसंचार संस्थानों के साथ गहराई से मिलकर काम करे. यह सुनिश्चित करे कि धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने तथा इसके प्रति सहिष्णुता का माहौल बनाया जा सके |

पाकिस्तान और मिस्र् समेत प्रमुख इसलामी राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से कहा कि पश्चिमी देशों में मुसलिम जनता के साथ नस्लवादी और भेदभावपूर्ण रवैये सा व्यवहार किया जा रहा है, जिसका निश्चित रूप से विरोध किया जाना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार मिस्र् से आये एक प्रतिनिधि ने कहा : अरब मूल के लोगों को आज नये किस्म के नस्लवाद, नस्ली भेदभाव, अछूतपन के साथ असहिष्णुता तथा संकीर्ण निशानदेही का अनुभव करना पड़ रहा है |

ओआइसी क्या है: इसलामी सम्मेलन संगठन 57 मुसलिम देशों का समूह है | इसमें मध्य पूर्व, अफ्रीका, मध्य ऐशया, कोकोश,बाल्कान, दक्षिण पूर्व ऐशया, दक्षिण ऐशया और दक्षिण अमेरिका (गुयाना और सूरीनाम) के देश शामिल हैं. इसका मुख्यालय जेद्दा, सऊदी अरब में है. इसकी स्थापना 25 दिसंबर 1969 को की गयी थी. इसका उद्देश्य इसलामी राष्ट्रों के सामाजिक,ओर्थक और राजनैतिक हितों की रक्षा करना है. साथ ही एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना जहां इसलामी देश अपनी बात रख सकें. फ्रेंच, अंगरेजी और अरबी इसकी ओधकारिक भाषा है |

: न्यूज़लाइन स्पेशल रिपोर्ट

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