
नई दिल्ली : जहां एक ओर आज की युवा पीढ़ी इंटरनेट का इस्तेमाल कर क़ामयाबी की राह पकड रही है तो वहीं इसका ग़लत इस्तेमाल भी किया जा रहा है। इंटरनेट को आतंकी गतिविधियों के लिये भी प्रयोग में लाया जा रहा है। केंद्रीय गृहसचिव जीके पिल्लई ने आज इस बात से अवगत कराते हुए कहा कि आतंकी अपने संगठन में युवकों को शामिल करने और देश में खुफिया गतिविधियों को अंजाम देने के लिए इंटरनेट को सबसे आसान जरिए के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
नास्काम द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में उपस्थित पिल्लई ने कहा कि इंटरनेट के जरिए मुंबई जैसे आतंकी हमलों की राह आसान हो रही है और इंटरनेट आतंकियों की भर्ती के लिए सबसे प्रभावी जरिया बन गया है।
पिल्लई ने बताया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की समीक्षा करने और इसका उन्नयन करने की प्रक्रिया में जुटी हुई है, ताकि डाटा सुरक्षा बढ़ाई जा सके।
गृहसचिव ने कहा कि सरकार ने एक आपदा प्रबंधन योजना बनाई है और एक राष्ट्रीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल सीईआरटी-इन का गठन किया है। गृह सचिव ने देश में साइबर सुरक्षा प्रमाणन प्रणाली को बेहतर बनाने का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि ऐसे में जब हम देश में दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े उपकरणों का आयात करने की सोच रहे हैं, हमारे पास प्रमाणन के लिए प्रयोगशाला नहीं है और फिलहाल हमारे पास सिर्फ एक प्रयोगशाला कोलकाता में है। हमें भारत में और अधिक प्रयोगशालाओं की जरूरत है।
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