
जयपुर: मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस और अजमेर दरगाह ब्लास्ट का मुख्य आरोपी असीमानंद सरकारी गवाह बन के लिए तैयार हो गया है। एटीएस के बढ़ते दबाव के कारण असीमानंद को इसके लिए मजबूर होना पड़ा।
अजमेर सेंट्रल जेल में बंद असीमानंद ने एक गोपनीय पत्र जेल से अदालत को भिजवाया है। 15 फरवरी को जब असीमानंद जेल से पेशी पर लाया गया तो सीजेएम ने उससे पत्र के बारे में पूछा तब असीमानंद ने अदालत से इस पत्र को गोपनीय रखने का आग्रह किया। माना जा रहा है कि असीमानंद दरगाह ब्लास्ट में सरकारी गवाह बनना चाहता है। इसी वजह से उसने जेल से सीधे अदालत को पत्र भेज दिया।
हालांकि एटीएस अधिकारी इस बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है, लेकिन विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक एटीएस के वरिष्ठ अधिकारी इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और गृहमंत्री शांति धारीवाल को जानकारी दे चुके है। एटीएस अधिकारियों का कहना है कि असीमानंद के सरकारी गवाह बनने से जांच में कई नए तथ्य समाने आएंगे और इन मामलों में शामिल अन्य आरोपियों के बारे में भी जानकारी मिलेगी। साथ ही राजनीति से जुडे़ कुछ बड़े लोगों के नाम इसमें सामने आ सकते है।
इधर एटीएस इस बार भी असीमानंद, हर्षद सोलंकी और मुकेश वसानी के खिलाफ चालान पेश नहीं कर सकी। अब अदालत ने एक मार्च तक चालान पेश करने का समय दिया है। स्वामी असीमानंद के बयान के आधार पर एटीएस द्वारा पकड़े गए भरत शाह को 18 फरवरी को अदालत में पेश किया जाएगा। दरगाह ब्लास्ट मामले में ही पहले गिरफ्तार किए जा चुके चन्द्रशेखर, लोकेश और देवेन्द्र के मामले में सुनवाई 19 फरवरी को होगी। दरगाह ब्लास्ट मामले में ही आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेश कुमार के बारे में एटीएस ने कुछ नए तथ्य जुटाए हैं। जिनकी पुष्टि में एटीएस के वरिष्ठ अधिकारी जुटे है।
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