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Thursday, July 28, 2011

ख़्वाजा के दर पहुंची हिना रब्बानी खार


अजमेर: पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने गुरूवार को ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में अपनी पहली हाज़िरी दी जहां उन्होंने भारत-पाक के दोस्ताना संबंधों में मज़बूती के लिये दुआ की।

पाक विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार दोपहर सढ़े तीन बजे एक विशेष हेलिकाप्टर से अजमेर पहुंची। खराब मौसम की वजह से हिना को जयपुर में ही ढ़ाई घंटे रूकना पड़ा। इस बीच दरगाह मे आस्ताना खिदमत की वजह से बंद हो गया तो हिना को सीधे हेलिपैड से सर्किट हाऊस ले जाया गया। दोपहर बाद जब हिना दरगाह पहुंची तो ज़िला प्रशासन ने दरगाह परिसर पूरी तरह खाली करा दिया और आस्ताने में ज़ाय्रीनों की आवक भी रोक दी गई। मल्टीकलर काटन के लांग फ़्राक और सिर पर लहरिया दुपट्टा ढके हिना पाकिस्तान से साथ आये चौदह सदस्यों के साथ बीस मिनट तक आस्ताने में रहीं। हिना ने ख्वाजा के पवित्र मज़ार पर हरे रंग की चादर पेश कर दोनों मुल्कों के बेहतर संबंधों के लिये दुआ मांगी। सैयद नातिक चिश्ती ने हिना और उनके साथ आये पाक दल को ज़ियारत कराने के बाद दस्तारबंदी की।

ज़ियारत के बाद हिना रब्ब्वानी मीडिया से बात करने के लिये रूकीं लेकिन धक्का-मुक्की की वजह से वह नाराज़ हो गई और सिर्फ़ इतना ही कह पाई कि उन्होंने हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच दोस्ताना और अच्छे ताल्लुकात के लिये दुआ मांगी है।

अजमेर से मुज़फ़्फ़र अली की रिपोर्ट

Thursday, July 21, 2011

ख्वाजा की दरगाह में दम घुटने से बच्ची की मौत




अजमेर: सुफी संत ख्वाजा मोहनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में भीड़ में दबकर ग्यारह वर्षीय एक बच्ची की मौत हो गई। दरगाह में बच्ची के भीड़ से दबकर मरने से दरगाह परिसर में हलचल मच गई। ख्वाजा की दरगाह में भीड़ से दबकर मरने का यह पहला हादसा है।

उत्तर प्रदेश के गोड़ा जिले से नजीर अहमद अपनी पत्नी व बच्ची मोना को लेकर अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज की जियारत के लिये आये थे। गुरुवार के दिन जब वह अपने परिवार को लेकर दरगाह में ख्वाजा के पास अपने अकीदत के फूल पेश करने के लिये पहुंचे तो दरगाह में भारी भीड़ व धक्का मुक्की में बच्ची मोना का दम घुटने लगा। मोना रोई लेकिन भीड़ में उसकी तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया उसके बाद वह बेहोश हो गई फिर परिवार व अन्य जावरीन दरगाह से बाहर निकले। मोना ने इस बीच कब दम तोड़ दिया किसी को भी पता नहीं चला।

गुरुवार को ख्वाजा के दरगाह में जाने के लिये बेहद छोटे दरवाजे हैं और लगभग बीस गुणा तीस वर्गफिट की दरगाह में एक चौथाई हिस्सा ही जावरीन के जियारत के लिये है जिसमें हज़ारो जावरीन खचाखच भरे रहते है। दरगाह में कहने को एयर कंडीशन बने है लेकिन भारी भीड़ के चलते जावरीन को राहत नहीं मिलती। खादिमो की संख्या अंजुमन के नायाब सदर हाजी सय्यद कमालुद्दीन चिश्ती के मुताबिक दरगाह में बच्ची की मौत का कारण बच्ची की दमे की बिमारी है जिसकी दुआ के लिये मोना को अजमेर लाया गया था। परिजनों ने भी बच्ची का पोस्ट मार्टम कराने से साफ इंकार कर दिया और बच्ची के शव को लेकर अजमेर से चले गये। दरगाह के नाजिम अबदुल मजीद का मानना है कि दरगाह को बड़ा किया जाने की जरुरत है।

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