Tuesday, March 1, 2011

गोधराकांड पर आया फ़ैसला: 11 को फाँसी, 20 को उम्रकैद


साबरमती : आख़िरकार वो दिन आ ही गया जब देश भर के लिये और ख़ास तौर पर गुजरात के लिये कलंक साबित हुए गोधरा कांड के दोषियों को सज़ा सुना दी गई। गोधरा कांड में दोषी पाए गए 31 लोगों में से 11 को फांसी की सजा और 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साबरमती विशेष न्यायालय ने ये फ़ैसला सुनाया। जबकि अभियोजन पक्ष ने सभी को फांसी देने की अपील की थी, लेकिन न्यायालय ने सुनवाई के बाद 11 लोगों को फांसी की सजा सुनाई। साजिश रचने और रेल पर पथरबाजी करनेवाले 20 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

विशेष न्यायाधीश पी.आर.पटेल ने उच्च सुरक्षा वाले साबरमती जेल परिसर में स्थित अदालत में मंगलवार को दोषियों को यह सजा सुनाई।

जिन दोषियों को मृत्युदंड दिया गया है, उनमें इस्माईल सुजेला उर्फ हाजी बिलाल, रजाक कुरकुर, रमजानी दिनयामिन बेरा, जब्बीर दिनयामिन बेरा, महबूब हसन उर्फ लतिको, सिराज बाला, इरफान कलंदर, इरफान पटादिया, हसन लालू, महबूब चंदा और सलीम जर्दा शामिल हैं।

विशेष न्यायाधीश पीआर पटेल ने इस मामले को ‘दुर्लभ में से भी दुर्लभतम’ की श्रेणी में रखते हुए 11 दोषियों को मौत की सजा सुनाई, जबकि दोषी ठहराए गए 20 अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा दी गई।

लोक अभियोजक जेएम पंचाल ने कहा कि गोधरा के पास साबरमती एक्सप्रेस के एस6 कोच में आग लगाने की साजिश में उनकी सक्रिय भूमिका देखते हुए अदालत ने 11 लोगों को मौत की सजा दी है। अदालत ने उम्रकैद की सजा पाने वाले दोषियों पर विभिन्न धाराओं के तहत जुर्माना भी लगाया है, जो उनकी कैद के साथ-साथ चलेगा।

अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह बहुत जघन्य अपराध था और इसलिए सभी 31 दोषियों को मौत की सजा दी जानी चाहिए। इसके पहले 22 फरवरी को अदालत ने 31 लोगों को इस मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस बात को स्वीकार किया था कि इस घटना के पीछे एक साजिश थी।

अदालत ने 31 आरोपियों को धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया था।

इन सभी को धारा 147, 148 (घातक हथियारों के साथ हमला करना), 323, 324, 325 और 326 (नुकसान पहुँचाना), और 153ए (धार्मिक आधार पर विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाना) के अलावा भारतीय रेलवे अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निरोधक अधिनियम और बंबई पुलिस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत भी दोषी ठहराया था।

गौरतलब है कि न्यायाधीश पटेल ने 27 फरवरी, 2002 को गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती एक्सप्रेस की बोगी संख्या एस-6 में आग लगाने और साजिश रचने के लिए मंगलवार को 31 लोगों को दोषी करार दिया था। इस घटना में 59 लोग जिंदा जल गए थे। इस घटना के बाद पूरे गुजरात राज्य में भयानक साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे, जिसमें 1100 से अधिक लोग मारे गए थे।

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