
नई दिल्ली : वर्ल्ड कप प्रारंभ होने में महज़ 4 दिन बाक़ी हैं। इस कारण इन दिनों विज्ञापनों की भी होड़ लगी हुई है। ख़ासकर भारतीय खिलाडियों पर जमकर पैसों की बरसात हो रही है। शायद कुछ सीनियर खिलाडी तो इस सीज़न में कमाई का रिकार्ड क़ायम करने जा रहे हैं। कई कंपनियां क्रिकेट खिलाड़ियों को लेकर अपने-अपने प्रायोजकों का प्रचार-प्रसार कर रही हैं। वर्ल्ड कप भारतीय उपमहाद्वीप में हो रहा है तो इस कारण विज्ञापन दुनिया में भारतीय क्रिकेटरों की ज़्यादा मांग है। लेकिन इसके साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने कुछ क़ायदे क़ानून भी जारी किये हैं, और क्रिकेटरों को उनका पालन करने की शर्त पर ही विज्ञापनों में आने की अनुमति प्रदान की गई है।
इसी के तहत, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को एम्बुश मार्केटिंग के दोषी पाए जाने पर फटकार लगाई है। वर्ल्डकप से ठीक पहले भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का सोनी ब्रेविया टीवी का विज्ञापन विवादों में घिर गया था। आईसीसी ने इस बात की जांच करने के बाद धोनी को नोटिस भेज कर चेतावनी दी है। हालांकि इस मुद्दे पर आईसीसी का आधिकारिक बयान नहीं आया है।
भारतीय कप्तान धोनी एक विज्ञापन में टीम इंडिया की नीली जर्सी से मिलते-जुलते कपड़ों में दिखाई देते हैं। आईसीसी ने इस विज्ञापन का मामला एंबुश मार्केटिंग के बॉर्डरलाइन पर पाया।
आईसीसी ने वर्ल्डकप के प्रायोजकों को ध्यान में रखते हुए विज्ञापन संबंधी कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक सिर्फ प्रायोजक कंपनियां ही खिलाड़ियों को आधिकारिक कपड़ों में दिखा सकती हैं। एलजी इंडिया वर्ल्ड कप की आधिकारिक प्रायोजक है। ऐसे में उसके प्रतिद्वंद्वी सोनी का यह विज्ञापन एंबुश मार्केटिंग जैसा है।
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