
भागलपुर : बिहार की एक कोर्ट में आज एक अजीबो-गरीब घटना घटी जिस कारण वहां पे मौजूद सभी लोग आश्चर्यचकित रह गये। भारत के किसी कोर्ट में किसी आरोपी (वो भी पुलिसवाला) के ख़िलाफ़ शायद ही कभी इतनी तेज़ी से कार्रवाई हुई होगी। बिहार के एक प्रभारी को कोर्ट में मोबाइल की घंटी का बजना आज इतना महंगा पड़ गया कि इस कारण उन्हें जाना जेल पड़ा। जानकारी के मुताबिक यह घटना आज दोपहर बाद के समय की है जब बांका कोर्ट में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी भरत तिवारी के कोर्ट में कार्रवाई चल रही थी।
उस दौरान कोर्ट में आनंदपुर सहायक थाना के थाना प्रभारी ललन राम भी मौजूद थे जिनके मोबाइल की घंटी बज उठी। पहली बार तो इस ग़लती पर सीजीएम ने चेतावनी देते हुए ललन राम को छोड़ दिया लेकिन कुछ देर बाद दुबारा उनकी मोबाइल की घंटी बजी और थाना प्रभारी ने आंव देखा ना तांव और हदों की सीमा लांघ दी। ललन राम ने कोर्ट और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की परवाह किये बग़ैर कोर्ट में ही मोबाइल पर बातें करना चालू कर दिया।
सीजेएम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उक्त थानेदार को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप में तत्काल गिरफ्तार करने का आदेश दिया जिस पर फौरन कार्रवाई करते हुए कोर्ट आरक्षी ने थानेदार ललन राम को गिरफ्तार कर हवालात में डाल दिया। गिरफ्तारी के बाद सीजेएम भरत तिवारी ने ललन राम के खिलाफ बांका के आरक्षी अधीक्षक को कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
इस बाबत पूर्वी जोन के डीआईजी शैलेश कुमार सिंह का कहना है कि ऐसे अनुशासनहीन पुलिस पदाधिकारी पर अवश्य कार्रवाई होना चाहिए। साथ ही उनहोंने ये भी कहा कि अगर जज साहब बांका के एसपी को कार्रवाई करने का आदेश देते हैं तो तुरंत जज साहब के आदेश का पालन किया जाएगा।

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