
बेंगलूरु : अब जल्द ही भारतीय वायु सेना आधुनिक तकनीक के नए विमानों को ख़रीद कर अपनी ताक़त में इज़ाफ़ा करने जा रही है। भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयरचीफ मार्शल पी. वी. नाईक ने घोषणा करते हुए कहा कि अगले दो सप्ताह के भीतर ही 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से 126 लड़ाकू विमान की खरीददारी के सबसे बड़े रक्षा सौदे पर मोलभाव का दौर शुरू हो जाएगा और उम्मीद है कि परिस्थिति सामान्य रही तो सितंबर तक सौदे पर हस्ताक्षर भी कर लिये जाएंगे।
येलहांका एयरपोर्ट पर संवाददाता सम्मेलन में वायुसेना प्रमुख ने बताया कि सौदे की सारी अड़चनें दूर हो चुकी हैं और अब ‘अनुबंध वार्ता समिति’ में बातचीत का दौर शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक-दो सप्ताह के भीतर यह बातचीत शुरू हो जाएगी और अगर किसी ‘असंतुष्ट कंपनी’ ने लंगड़ी नहीं मारी तो इस समझौते पर अगस्त-सिंतबर में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
ग़ौरतलब है कि इस सौदे पर दुनिया के आठ बड़े देशों की छह कंपनियों ने अपनी निगाहें टिका रखी हैं और वे अपने-अपने विमान लेकर बेंगलूरु के आकाश में अपनी कलाबाज़ियों का प्रदर्शन भी कर रही हैं। इन विमानों में अमेरिका के दो विमान एफ 18 सुपर हॉर्नेट, एफ-16 आईएन सुपर वाइपर, फ्रांस का राफेल, स्वीडन का ग्रिपेन, चार यूरोपीय देशों के कंसोर्टियम का यूरो फाइटर और रूस का मिग-35 शामिल हैं। मिग 35 को छोड़कर बाकी सभी प्रतिस्पर्धी अपने विमान लेकर भारत आए हुए हैं।
मोलभाव की वार्ता का दौर शुरू होने का मतलब यह है कि अब नॉकआउट होने की घड़ी आ गई है, जिसमें कुछ कंपनियों को सौदे की होड़ से बाहर होना पड़ेगा। इसके बाद सौदे में विघ्न डालने का दौर भी शुरू होने की आशंका है, जिसकी ओर वायुसेना प्रमुख ने खुलकर इशारा किया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी असंतुष्ट कंपनी ने लंगड़ी नहीं मारी, तो पांच-छह महीने के भीतर ही सौदे पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। कोई बाधा डाले जाने की सूरत में मामला सतर्कता आयुक्त आदि तक जा सकता है और सौदे की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इन सब अड़चनों को दूर करना होगा।

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