
नई दिल्ली : घोटालों के कारण विपक्ष के निशाने पर आ चुकी केंद्र सरकार के लिये मुसीबतों का पहाड़ बनता जा रहा है। हाल ही में प्रकाश में आए ’एस बैंड घोटाले’ ने सरकार के लिये घोटालों की आग में घी डालने का काम किया है। जैसे-जैसे घोटालों की संख्या बढ़ती जा रही है वैसे ही सरकार पर विपक्ष के हमले तेज़ होते जा रहे हैं। घोटालों का जिन्न सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा है और सरकार की छवि धूमिल होती जा रही है।
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद ’इसरो’ से जुड़े एस बैंड स्पेक्ट्रम आवंटन में सरकार को दो लाख करोड़ रुपए के राजस्व के नुकसान का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इसरो विभाग सीधे प्रधानमंत्री के तहत आता है, वहां पर इतना बड़ा घोटाला होना बेहद गंभीर मामला है। इसलिए प्रधानमंत्री तत्काल ही स्थिति स्पष्ट करें और इस आवंटन को रद्द करें।
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में केंद्रीय मंत्री ए राजा की बलि देने के बाद भी सरकार संसद नहीं चला पा रही है। शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ जाने के बाद अब बजट सत्र भी संकट में आ गया हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के तहत आने वाले विभाग में एक और घोटाला सामने आने से सरकार के सामने मुसीबतें का अंबार लग गया है। इस घोटाले ने विपक्ष को और ज्यादा हमलावर बना दिया है। अब विपक्ष द्वारा इसरो और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए समझौते की जांच कराने की भी मांग की जा रही है। भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने प्रधानमंत्री से सवाल पूछा है कि इस स्पेक्ट्रम को एक निजी कंपनी को बिना नीलामी के किस आधार पर दिया गया?
ग़ौरतलब है कि इसरो ने इस दुर्लभ स्पेक्ट्रम में से 70 मेगा हर्टज देवास मल्टीमीडिया नाम की कंपनी को 20 साल के लिए दिया है। इस कंपनी के चेयरमैन इसरो के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार एमजी चंद्रशेखर है। इस स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिये एमटीएनएल व बीएसएनएल से लगभग साढ़े बारह हजार करोड़ रुपए लिये गये, जबकि देवास मल्टीमीडिया को मात्र एक हजार करोड़ में आवंटित किया गया। कैग ने सरकार को थोड़ी राहत देते हुए कहा कि मीडिया में जो बाते आ रही है, वह उसके आडिट का निष्कर्ष नहीं है। अभी यह काम जारी है।
वामपंथी दलों ने भी इस मामले पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस आवंटन में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि अंतरिक्ष विभाग को सीधे प्रधानमंत्री के तहत आता है। इसे तो वह किसी और पर डाल भी नहीं सकते हैं। इससे सीधे देश की सुरक्षा पर असर पड़ेगा। चारों वामपंथी दल इस मुद्दे को भी अपनी जेपीसी मांग के साथ जोड़ेगे। चाहे सरकार इसके लिए अलग से जेपीसी बनाए या फिर बाकी तीन के लिए जो मांग कर रहे हैं, उसके साथ ही कराए।
कांग्रेस ने इस पर रक्षात्मक रवैया अपनाते हुए कहा कि कैग रिपोर्ट की एक प्रक्रिया होती है। उसे सदन में रखा जाता है, उसके बाद पीएसी को जाती है और वहां से जांच होकर सदन के सामने आती है। कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने उम्मीद जताई है कि यह मामला भी पीएसी के पास जा सकता है।
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