
मुंबई: बढ़ती महंगाई पर अंकुश के लिए रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अपनी अल्पकालिक दरों रेपो और रिवर्स रेपो रेट में चौथाई फीसदी का इजाफा कर दिया। इस कदम के बाद रेपो और रिवर्स रेपो रेट क्रमश: 5.50 और 4 फीसदी हो गई है। रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कम अवधि के कर्ज मुहैया कराता है, जबकि रिवर्स रेपो दर पर वह बैंकों से कम अवधि के लिए राशि उधार लेता है। इस कदम के बाद बैंकों की धन जुटाने की लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। इससे सभी तरह के लोन महंगे होने की आशंका इसलिए है कि रेपो और रिवर्स रेपो रेट पहले जब भी बढ़े, लोन भी महंगे होते रहे हैं। हालांकि, बैंक प्रमुखों का मानना है कि इस बढ़ोतरी का होम या कार लोन की ब्याज दरों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। रिजर्व बैंक ने खराब प्रदर्शन करने वाले निजी बैंकों के सीईओ और उनके निदेशकों के वेतन में कटौती करने और उनकी वेतन वृद्धि को 15 फीसदी तक सीमित करने का प्रस्ताव किया है। रिजर्व बैंक ने यह बात निजी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के वेतन के संबंध में तैयार नियमों के मसौदे में कही है। सरकारी बैंकों के प्रमुखों का वेतन निजी बैंकों के प्रमुखों की तुलना में काफी कम है। देश में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई की प्रमुख चंदा कोचर को वित्तवर्ष 2009-10 में वेतन के रूप में 1.73 करोड़ रुपए मिले, जबकि इसी अवधि में सरकारी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के प्रमुख ओपी भट्ट का वेतन महज 26.51 लाख रुपए रहा है। वित्त मंत्रालय की एक समिति ने एक सप्ताह पहले ही सरकारी बैंकों प्रमुखों को बेहतर वेतन देने की सिफारिश की है।

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