
लंदन। अफगानिस्तान में तालिबान लड़ाकों ने अमेरिकी नेतृत्व वाली नाटो सेना से लोहा लेने का नायाब तरीका खोज निकाला है। वह एचआईवी-एड्स से संक्रमित इंजेक्शनों से सैनिकों को बीमार बनाने के षड्यंत्रों को अपना रहा है ।
यदि बम फटता है, तो इससे घायल होने वाले सैनिकों के शरीर में ये इंजेक्शन चुभ जाते हैं और वे एचआईवी-एड्स से संक्रमित हो सकते हैं। ब्रिटिश अखबार "द सन" के अनुसार, सैनिकों को बीमार करने के लिए तालिबान बम के साथ संक्रमित सुइयां लगा रहे हैं। अखबार के मुताबिक बमों में सीरिंज को छिपाया जा रहा है। ताकि इनकी बम निरोधी दस्तों को निशाना बनाया जा सके।
इस तकनीक के इस्तेमाल को हेलमंद में पूर्व सेना अधिकारी और कंजरवेटिव पार्टी के सांसद पैट्रिक मर्सर ने उजागर किया था। मर्सर ने कहा, यह बेहद खतरनाक आतंकी लड़ाई है। वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। इस तकनीक के अलावा आतंकी संक्रमित रेजर ब्लेड का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इस कारण ब्रिटिश इंजीनियर और बम खोजी टीमों को सुरक्षात्मक दस्ते दिए जा रहे हैं।

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