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Thursday, February 10, 2011

एस-बैंड आवंटन घोटाला: दो सदस्यीय जांच आयोग का गठन


नई दिल्ली : देश में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला क़रार दिये गये एस-बैंड स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के लिये आयोग का गठन कर दिया गया है। इस घोटाले के कारण विपक्ष की आलोचनाओं का शिकार हो रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के व्यावसायिक धड़े एंट्रिक्स और एक निजी कम्पनी के बीच हुए करार मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय आयोग का गठन किया है।

उल्लेखनीय है कि इस करार से करदाताओं को दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी ने बताया कि यह आयोग एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। दो सदस्यीय इस आयोग में योजना आयोग के सदस्य बी. के. चतुर्वेदी और अंतरिक्ष आयोग के सदस्य रोडेम नरसिम्हा हैं।

उधर, इसरो ने एक बयान जारी कर कहा, "जांच आयोग को अपनी सिफारिश प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपने का निर्देश दिया गया है।" ज्ञात हो कि अंतरिक्ष मंत्रालय सीधे प्रधानमंत्री के अधीन है।

बयान में कहा गया है, "आयोग एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड और देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए करार की तकनीकी, व्यावसायिक और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा करेगा और साथ ही वह इस करार को मंजूरी देने के लिए अपनाई गई प्रक्रियाओं की भी जांच करेगा। आयोग मंजूरी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने और उसमें बदलावों के सम्बंध में सलाह भी देगा।"

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 में एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड और देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर 20 वर्ष का करार हुआ था। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) का आरम्भिक आकलन है कि इस करार से सरकारी खजाने को कम से कम दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

Monday, February 7, 2011

"2 लाख करोड़ का घोटाला" शक़ के दायरे में ’इसरो’


नई दिल्ली : हमारा भारत पुराने समय और अन्य देशों के मुक़ाबले जितनी तेज़ गति से प्रगति और विकास की ओर बढ़ रहा है, शायद उससे ज़्यादा तेज़ रफ़्तार से भ्रष्टाचार हमारे देश को घुन की तरह खा रहा है। अभी कुछ समय पहले प्रकाश में आया 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले भी पूरी नहीं हो पाई थी कि अब उससे भी बडा एक नया घोटाला सामने आ रहा है।

सीएजी को संदेह है कि एस-बैंड स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला, करीब 2 लाख करोड़ रुपए का है और यह 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले से भी बड़ा है। पूरे मामले में अंतरिक्ष विभाग और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन, इसरो संदेह के घेरे में हैं, इन पर एक निजी कंपनी को बिना नीलामी के बैंड आवंटित करने का आरोप हैं। प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने भी इस घोटाले की पूरी जांच कराए जाने की मांग की।

उल्लेखनीय है कि 2-जी स्पेक्ट्रम में 1.7 लाख करोड़ रुपयों का घोटाला किया गया है लेकिन इसरो में 2 लाख करोड़ रुपयों का घोटाला किये जाने के आसार हैं। अब सीएजी ने इसकी जांच शुरू कर दी है। यह करार 2005 में इसरो की शाखा एंट्रिक्स कार्पोरेशन लिमिटेड ने निजी कंपनी देवास मल्टिमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ करीब 600 करोड़ रुपए में किया था।

इस डील के बाद देवास मल्टिमीडिया को ब्राडबैंड स्पेक्ट्रम के कुल 2500 मेगाहर्ट्ज बैंड में से 70 मेगाहर्ट्ज बैंड प्राप्त हुए थे। ये बैंड पहले दूरदर्शन के पास थे जो सैटेलाइट और इन 70 मेगाहर्ट्ज बैंड की मदद से देशभर में अपने कार्यक्रम प्रसारित करता था। वर्तमान में इनकी कीमत काफी ज्यादा है।

इस करार के माध्यम से एस बैंड को पहली बार निजी क्षेत्र के लिए खोला गया जिसकी रेंज 2500 से 2690 मेगाहर्ट्ज के बीच है। सीएजी को पुख्ता जानकारी है कि करार करने में न केवल इसरो के नियमों का उल्लंघन किया गया बल्कि प्रधानमंत्री दफ्तर, कैबिनेट और स्पेस कमीशन को भी अंधेरे में रखा गया।

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