
नई दिल्ली : आज, पूरी दुनिया के जैसे हमारे देश में भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस ज़ोर शोर से मनाया जा रहा है। वैसे तो हमारे देश में महिलाओं के सशक्तिकरण के ख़ूब दावे किये जाते हैं लेकिन यहां महिलाओं पर जमकर ज़ुल्म भी ढ़ाया जाता है। महिलाओं की आवाज़ को दबाने की कोशिशे भी ख़ूब की जाती हैं। इसके अलावा, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के मामले में तो भारत अपने पड़ोसी पाकिस्तान और नेपाल सहित कई देशों से कहीं पीछे है।
दुनियाभर में लोकतंत्र, शांति और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन आईपीयू (इंटर पार्लियामेंट्री यूनियन) के ताज़ा अध्ययन में ये सनसनीख़ेज़ रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत ’महिलाओं की राजनीति में हिस्सेदारी’ के मामले में 98 वें पायदान पर हैं। यहां लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व महज 10.8 फीसदी और राज्यसभा में 10.3 फीसदी है।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र होने का दंभ भरने वाले भारत में संसद के निचले सदन लोकसभा में 545 सदस्य हैं जिसमें सिर्फ 59 महिलाएं हैं जबकि 242 सदस्यों वाली राज्यसभा में केवल 25 महिला सांसद है।
महिलाओं की राजनीति में हिस्सेदारी के मामले में भारत बेनिन और जॉर्डन के साथ खड़ा है। यह पाकिस्तान से 47 पायदान नीचे और नेपाल से 80 पायदान नीचे है। आईपीयू की रिपोर्ट के मुतबिक पाकिस्तान की संसद के निचले सदन में 22.2 फीसदी महिलाएं सांसद हैं जबकि ऊपरी सदन में यह हिस्सेदारी 17 फीसदी है। पाकिस्तान महिलाओं की राजनीति में भागीदारी के मामले में 51 वें स्थान पर है जबकि नेपाल 18 वें पायदान पर है। यहां संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी 33.3 फीसदी है।
चीन और बांग्लादेश में भी भारत की तुलना में महिलाओं की राजनीति में अधिक भागीदारी है। चीन इस सूची में 55वें पायदान पर खड़ा है जहां 21.3 फीसदी महिलाओं को राजनीति में प्रतिनिधित्व मिला है। 65वें पायदान पर खड़े बांग्लादेश में राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी 18.6 प्रतिशत है।
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