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Friday, February 11, 2011

मुबारक अपनी ज़िद पर क़ायम, नहीं देंगे पद से इस्तीफ़ा


मिस्र में कई दिनों से मचे क़ोहराम के अब और बढ़ने के आसार बन गये हैं। मुबारक के इस बयान ने जनता द्वारा किये जा रहे विरोध प्रदर्शन को और हवा देने का काम किया है। जनता की मांग को ठुकराते हुए मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने अपना पद छोड़ने से इनकार कर दिया है। लेकिन, जनता के ज़ख़मों पर मरहम लगाते हुए मुबारक ने कहा है कि उन्होंने उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान को कुछ अधिकार सौंपे है और उन्हें देश के युवाओं से बातचीत में कोई शर्मिंदगी नहीं है।

82 वर्षीय मुबारक ने राष्ट्र के नाम संबोधित अपने बयान में कहा कि हमने उन लोगों से वार्ता शुरू की है जो बदलाव और राजनीतिक शक्तियों की माँग कर रहे है और उनमें युवक भी शामिल है। हम सत्ता के शांतिपूर्ण परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुबारक ने वादा किया कि मैं राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी मैदान में नहीं उतरूँगा। मैंने यह भी कहा है कि जब तक जनता अगले सितंबर तक नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं कर लेती है, मैं संविधान की रक्षा का दायित्व निभाता रहूँगा। इसी बात की मैंने शपथ ली है और मिस्र को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने का प्रयास करता रहूँगा।

मुबारक ने बताया कि मैंने उपराष्ट्रपति को संविधान के आधार पर कुछ अधिकार हस्तांतरित करने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने संविधान के छह अनुच्छेदों को संशोधित करने और एक अनुच्छेद को रद्द करने का आग्रह किया है।

राष्ट्रपति के संबोधन से प्रदर्शनकारियों की नाराजगी दूर नहीं हुई और काहिरा के तहरीर चौक पर 17 वें दिन भी करीब दो लाख लोगों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने तुरंत आम हड़ताल का आह्वान किया और सेना के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली। दरअसल सैन्य नेतृत्व ने कुछ घंटे पहले ही घोषणा की थी वह देश की सुरक्षा एवं लोगों की जायज माँगों को पूरा करने को सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करेगा।

इसके अलावा, मुबारक ने मिस्र में लोकतंत्र की ओर परिवर्तन की प्रक्रिया को हवा दे रहे देशों पर अप्रत्यक्ष कटाक्ष करते हुए कहा कि मैं कभी भी विदेश की मर्जी के आगे नहीं झुका। मैंने हमेशा ही शांति तथा मिस्र एवं उसके स्थायित्व के लिए काम किया है।

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