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Sunday, July 17, 2011

मणि कौल की अधूरी फिल्में पूरी करेंगे अनुराग


दिवंगत फिल्म निर्देशक मणि कौल की अधूरी फिल्मों का सह-निर्माण कर रहे फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने कहा कि वह उन्हें पूरा करने के लिए कृत संकल्प हैं। गौरतलब है कि कौल का छह जुलाई को लम्बी बीमारी के बाद 66 वर्ष की उम्र में दिल्ली में निधन हो गया था।

कश्यप एक फिल्म 'शी अंडर हर स्पेल' और दूसरी 'दीवार में खिड़की रहती तो' करना चाहते हैं। वह एक अन्य किताब 'रोजीलाइन' पर भी काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह फिल्मों का निर्माण नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और कुछ विदेशी निर्माताओं के साथ मिलकर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं वे फिल्में करना चाहता हूं, लेकिन मुझे सभी के साथ बैठक कर इस पर विचार करना होगा, रोजीलाइन को पूरा करना तो निश्चित रूप से तय है।

कौल के साथ अपने बीते दिनों को याद करते हुए कश्यप ने बताया कि मुझे विश्वास नहीं होता कि कौल नहीं रहे। वह एक बेहतरीन शिक्षक और लाजवाब दोस्त थे। उन्होंने कभी किसी को छोटा नहीं समझा। कश्यप ने कहा कि उनकी बहुचर्चित फिल्म 'दैट गर्ल इन येलो बूट्स' दो सितम्बर को रिलीज होगी। कश्यप की दो अन्य फिल्में 'गैंग्स ऑफ वासीपुर' और 'माइकेल' का निर्माण लगभग पूरा होने को है और ये फिल्में इसी साल रिलीज होंगी।

भारतीयों का ढाई अरब डॉलर स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में



जिनेवाः भारतीयों के विदेशी बैंकों में काले धन रखने की चर्चा होती रहती है लेकिन अब पता चल रहा है कि स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में भारतीयों का काला धन बड़े पैमाने पर जमा है।

वहां के सेंट्रल बैंक के मुताबिक भारतीयों का 2010 में वहां के बैंकों में ढ़ाई अरब डॉलर का काला धन जमा है। समझा जाता है कि बेईमान भारतीयों का कुल 1.5 खरब डॉलर विदेशी बैंकों में जमा है। विपक्षी पार्टियों और अन्ना हजारे तथा बाबा रामदेव के अनुयायियों का आरोप है कि सरकार इस धन को भारत लाने की इच्छुक नहीं है। स्विस नैशनल बैंक के मुताबिक वहां के बैंको में 2010 में भारतीयों का ढाई अरब डॉलर जमा था। पहले यह राशि ज्यादा थी लेकिन अब इसमें कटौती हुई है क्योंकि कई लोगों ने इससे पैसे निकाल लिए। पश्चिमी देशों में आए आर्थिक संकट के कारण वहां के बैंकों को काफी झटका लगा। वहां का एक बड़ा बैंक यूबीएस को भारी घाटा भी उठाना पड़ा। इसके बाद ग्राहकों ने वहां के बैंकों से पैसे निकालने शुरू कर दिए।

बताया जा रहा है कि कई भारतीय ग्राहकों ने स्विट्ज़रलैंड के बैंकों से पैसे निकालकर सिंगापुर के बैंकों में जमा कर दिया है। यह भी कहा जा रहा है कि चालाक भारतीयों ने वहां से पैसा निकाल कर दुबई के बैंकों में डाल दिय़ा है। स्विट्ज़रलैंड पर काफी दबाव है कि वह दुनिया भर के बेईमानों को अपने यहां पैसा न जमा करने दे। अमेरिका के दबाव पर उसने अपने पुराने कानून में बदलाव भी किया है। लेकिन भारत की तरफ से कोई ठोस प्रयास नहीं हुआ है।

शब-ए-बराअत यानि गुनाहों से बरी होने की रात


(न्यूज़लाईन विशेष) : शब-ए-बराअत यानि बरी (मुक्त) होने की रात, शब यानि रात और बराअत का अरबी में मतलब होता है मुक्ति। इस्लामिक कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 14 तारीख़ को शब-ए-बराअत कहते हैं। कहा जाता है कि इसी रात में लोगों के गुनाहों और नेकियों का हिसाब किताब किया जाता है।

मान्यता है के इस रात फ़रिश्ते लोगों द्वारा साल भर किये गये क्रिया कलापों का लेख-जोखा करते हैं। यही नहीं इसी रात जन्म लेने वाले और मरने वालों की सूची भी तैयार की जाती है। यही वजह है कि इस रात की एक विशेषता है और इस रात को रात भर जाग कर इबादत की जाती है और रोकर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगी जाती है।

इस रात को शब क़द्र यानि कदर करने की रात भी कहा जाता है, जिसमें आसमान से अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है। लोग क़ब्रिस्तान जा कर अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी क़ब्रों पर फ़ातिहा और दुरूद शरीफ़ पढ़ कर उन्हें सवाब (पुण्य) भेजते हैं। यही वजह है कि विद्वानों ने इस रात में की गई इबादत का सवाब कई सौ गुना ज़्यादा बताया है।

शब-ए-बराअत से अगले दिन यानि 15 शाबान को अधिकतर लोग रोज़ा रखते हैं, इस दिन रोज़ा रखना काफ़ी पुण्य बताया गया है। दरअसल शाबान माह से अगला महीना रमज़ान का होता है, जिसमें सभी मुस्लिम 30 दिनों तक रोज़े रखते हैं। पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शाबान माह की 15 तारीख से ही रोज़े रखने शुरू कर देते थे और पूरी तरह अल्लाह की इबादत में लग जाते थे।

इस पवित्र माह से इस्लामे इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना भी जुड़ी हुई है। इस महीने में मक्का के मोमिनों और मुशरिकों के बीच पहली जंग हुई थी, जिसे जंग-ए-बदर भी कहा जाता है। इस जंग में रसूले करीम ह. मुहम्मद (स.अ.व.) का एक दांत मुबारक शहीद हो गया था। लेकिन इस जंग को जीतकर उन्होंने असत्य पर सत्य की जीत का संदेश दिया था। यही वजह है कि विभिन्न विद्वानों ने इस मुबारक रात की कईं फ़ज़ीलत बयान की हैं। और इस रात की इबादत को और रातों की इबादत से कई गुना बेहतर बताया है।


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