नई दिल्ली। लोकपाल बिल का प्रारूप तैयार करने को गठित सिविल सोसाइटी के सदस्य जस्टिस संतोष हेगडे ने समिति से त्यागपत्र नहीं देने का फ़ैसला किया है। उन्होंने शनिवार को दिल्ली में समिति सदस्यों के साथ आयोजित बैठक के बाद यह फ़ैसला लिया। बैठक की अध्यक्षता अन्ना हजारे ने की। बैठक के बाद समिति के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने बताया कि कर्नाटक के लोकायुक्त और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संतोष हेगडे लोकपाल बिल का प्रारूप तैयार करने वाली समिति में बने रहेंगे।
वहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बजाने वाले अन्ना हजारे के विरोध में अब तक उठते रहे सुर आंदोलन का रूप लेने जा रहा है। इसके लिए कुछ लोग अपने संगठनों के जरिए एक मंच पर आए हैं। तीसरा स्वाधीनता आंदोलन, इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंसेज (आईआरडीएस), नेशनल आरटीआई फोरम जैसे संगठनों 25 अप्रैल को 10 बजे से 1.30 बजे तक जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी की है।
इन संगठनों ने मीडिया को इस बारे में जानकारी भेजी है। नेशनल आरटीआई फोरम की ओर से भेजी गई जानकारी में सवाल उठाया गया है कि अन्ना अपने कुछ साथियों पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर चुप क्यों हैं? इसमें भूषण पिता--पुत्र पर लग रहे आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। जांच पूरी होने तक दोनों को लोकपाल बिल का ड्राफ्ट बनाने के लिए बनी समिति से बाहर रखने की मांग की गई है।
उधर, भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि लोकपाल बिल की मसौदा समिति के सदस्यों को निशाना बना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को तो ऐसे लोगों का समर्थन करना चाहिए। शनिवार को दिल्ली के लिए रवाना होते समय पुणे में अन्ना ने कहा, यदि हमारी लड़ाई जायज नहीं होती तो लोगों का इतने बड़े पैमाने पर समर्थन क्यों मिलता।
अन्ना संतोष हेगड़े को ड्राफ्ट कमेटी में बने रहने के लिए राजी करने के लिए दिल्ली पहुंचे। शाम में दोनों की बैठक हुई। बैठक में हेगड़े को समिति में बने रहने के लिए मनाने में अन्ना कामयाब रहे।

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