Saturday, March 12, 2011

दारिया एनकाउंटर: चार पुलिसकर्मी सीबीआई की गिरफ़्त में


जयपुर : देश के चर्चित दारासिंह उर्फ दारिया एनकाउंटर में सीबीआई ने राजस्थान पुलिस के आरोपी पुलिसकर्मियों पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मानसरोवर में 23 अक्टूबर 2006 को हुए दारिया एनकाउंटर की जांच में जुटी सीबीआई ने इस एनकाउंटर को फर्जी क़रार दिया है। इस फर्जी एनकाउंटर में एसओजी के तत्कालीन एडीजी ए.के जैन, एसपी ए. पोन्नूचामी, एएसपी अरशद अली, इंस्पेक्टर राजेश चौधरी समेत 14 पुलिसकर्मी आरोपी है। एनकाउंटर टीम में शामिल राजस्थान पुलिस के दो इंस्पेक्टर, एक उपनिरीक्षक और एक एएसआई को सीबीआई ने शुक्रवार शाम को गिरफ्तार कर लिया है।

इस मामले में खास बात यह है कि इस एनकाउंटर को लेकर एक पूर्व मंत्री भी शक के घेरे में हैं और सीबीआई उनसे पूछताछ भी कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 9 अप्रेल 2010 से इस केस की जांच कर रही सीबीआई टीम, गिरफ्तारी के बाद चारों आरोपियों को अशोक नगर थाने के समीप स्थित सीबीआई के स्थानीय ऑफिस में ले गई। शनिवार को आरोपियों को स्टेशन रोड के समीप स्थित सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा।

शेष आरोपियों की तलाश में देर रात तक दबिश दी जा रही थी। कार्रवाई में मदद के लिए जिला पुलिस लाईन से सीबीआई ने 20 पुलिसकर्मी मांगे थे। सीबीआई के एसपी आर. एस पूनिया के नेतृत्व में दिल्ली से आई टीम 9 मार्च से ही जयपुर में डेरा डाले हुए है। चारों आरोपियों को गुरुवार को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन रात को छोड़ दिया था। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि दारासिंह को मानसरोवर में ले जाकर 23 अक्टूबर 2006 की सुबह गोली मारने वाली एसओजी टीम में शामिल इंस्पेक्टर नरेश शर्मा, निसार खान, एसआई सत्यनारायण गोदारा, एएसआई सुरेंद्र सिंह चौधरी आदि को गिरफ्तार किया गया है।

दारिया की पत्नी सुशीला की शिकायत में राज्य पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की थी। बाद में सुशीला ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी दारिया एनकाउंटर की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर केंद्र सरकार को पत्र लिखे थे। बाद में सुशीला की याचिका पर 9 अप्रेल 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को दारिया एनकाउंटर की जांच सौंपी थी।

दारिया एनकाउंटर के नामजद आरोपियों में एडीजी ए.के जैन, आईपीएस ए. पोन्नूचामी, एएसपी अरशद अली, इंस्पेक्टर राजेश चौधरी, जुल्फिकार, नरेश शर्मा, सुभाष गोदारा, एसआई सत्यनारायण गोदारा, एएसआई अरविंद भारद्वाज, सुरेंद्र सिंह चौधरी, हैड कांस्टेबल बद्रीप्रसाद, कांस्टेबल जगराम एवं ड्राइवर सरदार सिंह आदि के खिलाफ दारिया की पत्नी सुशीला ने साजिश रचकर हत्या करने का आरोप लगाया था।

एक बात और, इस मामले में पुलिस की गतिविधि को शक़ के घेरे में ला देती है। दारिया का एनकाउंटर करने से पांच दिन पहले एडीजी ए.के जैन ने रातों-रात 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। दारिया के खिलाफ 21 गंभीर मुकदमें होना बताए थे। जांच में पता चला कि उनमें से 11 मुकदमों दारिया बरी हो चुका था, और बाक़ी के 9 मामले अदालत में विचाराधीन थे। एक भी मुकदमा हत्या का नहीं था। दारिया को किसी कोर्ट से सजा भी नहीं हुई थी। दारिया के खिलाफ 29 जनवरी 2005 को अंतिम मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद कोई मुकदमा दर्ज हीं नहीं हुआ था।

जांच में ये पता चला था कि स्थानीय एसपी और आईजी की ओर से इनाम घोषित नहीं किया था। इसके बावजूद नियमों के विपरीत एडीजी ए. के जैन ने पहली बार में ही दारिया पर 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया। दारिया पर दर्ज सारे मुकदमें शराब तस्करी एवं चुनावी रंजिश को लेकर थे। दारिया मुकदमों की पेशी पर नहीं जा रहा था। क्योंकि पिछली बार जब वो कोर्ट में पेश होकर जेल गया था, तो जेल में मारपीट हुई थी। इसकी रिपोर्ट पर आरोपियों को सजा हुई थी।

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