मुंबई : टैक्स चोरी के मामले में फ़ंसे हसन अली को मुंबई की सेशन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में ज़मानत दे दी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की अली की रिमांड बढ़ाने की अपील खारिज करते हुए कहा कि इसके लिए ईडी पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका है।
हसन अली को प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को हिरासत में लिया था। इसके बाद लगातार गुरुवार और शुक्रवार को ईडी ने उन्हें कोर्ट में पेश किया। निदेशालय ने बुधवार को अली से पूछताछ के लिए 14 दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि वे अली के खिलाफ ठोस सबूत पेश करें, उन्हें रिमांड दे दिया जाएगा। अदालत ने सुनवाई को एक दिन के लिए टाल दिया। गुरुवार को फिर प्रवर्तन निदेशालय ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा और अदालत ने फिर उन्हें एक दिन का वक्त दिया। लेकिन शुक्रवार को भी निदेशालय कोई ठोस साक्ष्य अदालत को देने में असफल रहा और इसके बाद अदालत ने उनकी जमानत मंजूर कर ली।
निदेशालय ने गुरुवार को कोर्ट को बताया था हसन ने अपने स्विस बैंक खाते से सात लाख डॉलर ब्रिटेन स्थानांतरित करने की बात कबूल कर ली है। सरकारी वकील नितिन पोंडे ने दलील दी कि हसन से पूछताछ अभी पूरी नहीं हो पाई है लिहाजा रिमांड बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन इस बारे में वे कोई भी सबूत पेश नहीं कर सके।
गौरतलब है कि सरकार हसन अली और उसके साथियों से 71,845 करोड़ रुपए आयकर के अलावा 2 लाख 15 हजार करोड़ रुपए का जुर्माना भी वसूलने की तैयारी कर रही है। लेकिन अब हसन अली को ज़मानत मिलने के बाद इसे सरकार की किरकिरी माना जा रहा है।

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